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Bulandshahar News: इमाम हुसैन की याद में सोगवारों ने निकाला अलम का जुलूस
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शिकारपुर में ढोल नगाड़ों के साथ अलम का जुलूस निकालते सोगवार आयोजक
बुलंदशहर/शिकारपुर/ सिकंदराबाद। मोहर्रम का चांद दिखने के बाद से सभी इमाम बारगाहों को अलम और काले झंडों से सजा दिया गया है। सोगवारों में गम का माहौल बना है। हर रात एक शहीद का ताबूत निकाला जाता है। मोहर्रम की 4 तारीख को शिकारपुर के मोहल्ला रंग महल से एक जुलूस निकाला गया। इसमें ढोल-नगाड़ों की धुन और काले झंडे शामिल थे। जुलूस अपनी मंजिल तय करता हुआ मिलन मियां के चौक में पहुंचकर संपन्न हुआ। सभी समुदाय के लोगों ने जगह-जगह छबील लगाकर जुलूस में शामिल लोगों को शरबत पिलाया। जुलूस को सफल बनाने में मुमताज हैदर, अनवार हैदर, तकी अब्बास, हैदर मेहदी और राहुल का सहयोग रहा। वहीं, बुलंदशहर में बुधवार की रात में मरहूम खुर्शीद हुसैन, मरहूम सैयद अजीजुल हसन दरोगा, इमामा बारगाह कलान में मजलिसों का आयोजन किया गया। सैयद हसन जहीर रिजवी, साबिर हुसैन, सैयद इशरत अली रिजवी ने मरसिया पढ़ा। सैयद राहत जैदी, प्रोफेसर शाने हैदर, मौलाना हसन अब्बास ने जिक्रे कर्बला किया। शारिक हुसैन, कौसर रिजवी, सिकंदर इलाहाबादी ने नोहा ख्वानी की। इस अवसर पर जावेद जाफरी, जफर अब्बास रिजवी, नदीम कैसर, आलम रिजवी, अनवर अली, चाहत हुसैन, आरिफ हुसैन समेत बड़ी संख्या में अजादार मौजूद रहे। सिकंदराबाद में भी काजीवाड़ा स्थित इमामबाड़ा अब्बास में मजलिस का आयोजन किया गया। मौलाना इकबाल हैदर ने मजलिस को खिताब किया।
शहादत का मंजर सुन अजादारों की आंखें हुईं नम
बुलंदशहर/सिकंदराबाद। बुधवार की रात में इमाम बारगाहों में आयोजित मजलिसों में कर्बला के शहीदों की शहादत का मंजर बयां किया गया। शहादत का मंजर सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गई। मजिलसों में कही हजरत इमाम हुसैन के बचपन के दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर, तो कहीं हजरत मुस्लिम के दो बेटों की कर्बला में हुई शहादत का मंजर बयां किया गया। इमामबाड़ा कलान में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हसन अब्बास ने कहा कि हजरत अली हमेश नबी रस के साथ रहे। उनके साथ हिजरत की। रात में पैगंबर साहब की जान बचाई। मौलाना ने हजरत मुस्लिम के दोनों बेटों मोहम्मद और इब्राहिम के कुर्बान होने का जिक्र किया। जिसे सुनकर अजादारों की आंखों में आंसू आ गए। जनपद के अन्य इमामबाड़ों में भी मजलिसे हुसैन की गई। इसमें कर्बला के शहीदों की शहादत का मंजर बयां किया गया।
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शहादत का मंजर सुन अजादारों की आंखें हुईं नम
बुलंदशहर/सिकंदराबाद। बुधवार की रात में इमाम बारगाहों में आयोजित मजलिसों में कर्बला के शहीदों की शहादत का मंजर बयां किया गया। शहादत का मंजर सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गई। मजिलसों में कही हजरत इमाम हुसैन के बचपन के दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर, तो कहीं हजरत मुस्लिम के दो बेटों की कर्बला में हुई शहादत का मंजर बयां किया गया। इमामबाड़ा कलान में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हसन अब्बास ने कहा कि हजरत अली हमेश नबी रस के साथ रहे। उनके साथ हिजरत की। रात में पैगंबर साहब की जान बचाई। मौलाना ने हजरत मुस्लिम के दोनों बेटों मोहम्मद और इब्राहिम के कुर्बान होने का जिक्र किया। जिसे सुनकर अजादारों की आंखों में आंसू आ गए। जनपद के अन्य इमामबाड़ों में भी मजलिसे हुसैन की गई। इसमें कर्बला के शहीदों की शहादत का मंजर बयां किया गया।
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