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Bulandshahar News: जिनके अपने नहीं मिलते... युवा अपने कंधों पर उठाते हैं उनके मोक्ष की जिम्मेदारी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:21 AM IST
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For those who have no one of their own... the youth shoulder the responsibility of their salvation.
पितृ पक्ष पर विशेष वाली खबर के लिए राष्ट्र चेतना मिशन के अध्यक्ष हेमंत सिंह

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बुलंदशहर। जिंदगी के अंतिम सफर पर ले जाने के लिए जिनके अपने नहीं मिलते हैं, उनके मोक्ष की जिम्मेदारी युवा अपने कंधों पर उठाते हैं। जिले में करीब चार हजार लोग अभी तक ऐसे रहे हैं जिनके दाह संस्कार के लिए अपने नहीं मिले तो राष्ट्र चेतना मिशन से जुड़े युवाओं ने अज्ञात शवों का पूरे कर्मकांड के साथ अंतिम संस्कार किया। गंगा में उनका अस्थि विसर्जन भी कराया।
राष्ट्र चेतना मिशन के अध्यक्ष हेमंत सिंह ने बताया कि 15 वर्ष पूर्व जिले में शिनाख्त न हो पाने वाले अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार में पुलिस को कठिनाइयां होती देखी। उस समय पुलिस को इतना खर्चा नहीं मिल पाता था जिससे लकड़ियों का इंतजाम कर ठीक से शव का अंतिम संस्कार किया जाए। पुलिस के इस कार्य को देखे जाने के बाद अपने हाथों से अज्ञात अंतिम संस्कार विधि विधान से कराने की जिम्मेदारी उठाई।
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बताया कि अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए राष्ट्र चेतना मिशन संस्था बनाकर युवाओं को इसमें जोड़ा गया। संस्था में पिंटू गुर्जर, राम अवतार लोधी, देव, लकी, विकास सिंह, रविपाल, सोनू राघव, शुभ पंडित, महेश लोधी, हिमांशु वाल्मिकी, कपिल राणा, न्यू गुप्ता, मयूर अग्रवाल आदि जुड़े हुए हैं। जिले में जिन चार हजार अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार कराया गया है उनमें से 3500 के परिवार का अभी तक पता नहीं चल सका है। --
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कोरोना काल में भी आगे आए राष्ट्र चेतना मिशन के युवा
राष्ट्र चेतना मिशन के अध्यक्ष ने बताया कि कोरोना काल में जब लोग एक-दूसरे के संपर्क में आने से बचने लगे थे। अंतिम संस्कारु के लिए चार कंधे मिलने भी मुश्किल हो रहे थे। ऐसे लोगों का टीम ने पीपीई किट पहनकर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया। कोरोना काल में शहर के 80 लोगों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया। अभी तक अज्ञात शवों में करीब तीन सौ परिवार के लोग पूछते-पूछते आ चुके हैं।

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मिल-जुल कर करते हैं अंतिम संस्कार का इंतजाम
संस्था के संरक्षक सीए मनीष मांगलिक ने बताया कि अब तो पुलिस वाले अज्ञात शव मिलने के बाद उसकी शिनाख्त न हो पाने पर संस्था से संपर्क कर उसका विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराते आ रहे हैं। अंतिम संस्कार के लिए मिशन किसी भी संस्था से कोई पैसा नहीं लेता। सभी पदाधिकारी आपस में सहयोग करते हैं।
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