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पिता लाचारः गुरु कर रहा सपना साकार

Sat, 18 Mar 2017 11:33 PM IST
अमर उजाला/बुलंदशहर
अमर उजाला/बुलंदशहर Updated Sat, 18 Mar 2017 11:33 PM IST
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Father helpless: dream of master doing realization
गांव कौठरी कुरैना के अध्यापक राहुल के साथ रितिका। - फोटो : ब्यूरो

जहां समाज में अभी भी कुछ लोग बेटियों को बोझ समझ रहे है, वहीं एक गुरु ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का सार्थक संदेश दे रहा है। प्राइमरी स्कूल के इस शिक्षक ने एक व्यक्ति को पैरालाइसिस होने के  बाद उसकी बेटी को गोद ले लिया। बेटी को पढ़ाने में लाचार पिता का सपना अब बिटिया का गुरु साकार कर रहा है।

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औरंगाबाद क्षेत्र के गांव बांसुरी निवासी बुद्धपाल की 10 वर्षीया बेटी रितिका पढ़ाई मेें होशियार है। करीब तीन साल पहले बुद्धपाल सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उनका उपचार हुआ, लेकिन शरीर के एक भाग पर पैरालाइसिस हो गया। इसके बाद रितिका की पढ़ाई छूट गई।
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मां मजदूरी करके घर का खर्च चलाने लगी। गांव कोठरा कुरैना में सहायक अध्यापक राहुल यशवर्धन ने रितिका के स्कूल नहीं आने का कारण जाना तो उन्हें पूरी घटना की जानकारी   हुई। इसके बाद राहुल ने रितिका की पढ़ाई शुरू कराते हुए उसे ‘गोद’ ले लिया। उसकी पढ़ाई-लिखाई से लेकर सभी खर्च राहुल उठाते हैं।
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राहुल ने उसकी हायर एजुकेशन से लेकर शादी तक का जिम्मा लिया है। रितिका के पिता का सपना था कि वह पढ़-लिखकर अफसर बने। रितिका के पिता की लाचारी से यह सपना टूटने लगा था, लेकिन प्राइमरी स्कूल के इस शिक्षक के कारण अब उसके हौसलों को पंख लगे हैं। वह दोबारा अफसर बनने का सपना देख रही है।

वह स्कूल में पढ़ने वाले करीब 200 बच्चों में सबसे होशियार व संस्कारी है।

इससे समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक संदेश जाता है। बेटियों को बोझ समझने वाले लोगों के लिए ऐसी सोच करारा जवाब है। -आंजनेय कुमार सिंह, डीएम

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