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जांच अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप, मारपीट और लूट की धाराएं हटाईं
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जांच अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप, मारपीट और लूट की धाराएं हटाईं
बुलंदशहर। छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में देहात कोतवाली में तैनात जांच अधिकारी पर आरोपी पक्ष से साठगांठ के आरोप लगे हैं। पीड़ित महिला का कहना है कि जांच अधिकारी ने मामले में संगीन धाराएं जिसमें मारपीट और लूटपाट शामिल है, हटा दी हैं। उसने आला अफसरों से कार्रवाई की गुहार लगाई है।
कोतवाली देहात क्षेत्र के दरियापुर गांव में दो पक्षों में गत 4 जून को झगड़ा हुआ था। प्रधान पक्ष के लोगों ने एक महिला के साथ अभद्रता करते हुए छेड़छाड़ और मारपीट की थी। इसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुई। इसके बाद कोतवाली देहात पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया था। बताया गया कि मामले में कोतवाली देहात में तैनात जांच अधिकारी एक उपनिरीक्षक ने दूसरे पक्ष से साठगांठ कर संगीन धाराएं हटा दीं। पीड़ित महिला ने बताया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन जांच अधिकारी तमाम संगीन धाराएं हटा दी। जिससे आरोपी की जमानत हो गई । आरोपी को लाभ देने के लिए सब इंस्पेक्टर आरोपियों के घर रात दिन कई कई बार चक्कर काटते रहे। पीड़ित महिला का यह भी आरोप है कि वह शिकायत करने की उच्च अधिकारियों से बात कहती हैं तो दरोगा उसे उल्टा जेल भेजने की धमकी दी।
पीड़िता ने खोई आस
पीड़िता ने आरोपियों से साठगांठ करने पर जांच अधिकारी से शिकायत की है। साथ ही भविष्य में न्याय मिलने की उम्मीद से भी आस छोड़ दी है। पीड़िता का कहना है की भविष्य में उसके खिलाफ भी झूठे मुकदमे या अन्य कोई वारदात हो सकती है।
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मामले में अभी कोई ऐसा शिकायती पत्र नहीं मिला है, यदि ऐसा कुछ हुआ है तो मामले की गहनता से जांच पड़ताल करा कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। दोषी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। - संतोष कुमार सिंह, एसएसपी
दहेज एक्ट के केस में दस हजार वसूलने का आरोप, बैठी जांच
औरंगाबाद। अगौता थाना क्षेत्र के गांव पवसरा निवासी दो सगी बहनों के दहेज एक्ट के केस में पीड़ित ने थाने के दो दरोगाओं पर दस हजार रुपये वसूलने का आरोप लगाते हुए एसएसपी से शिकायत की है। एसएसपी ने प्रकरण में जांच बैठाते हुए सीओ सिकंदराबाद को इसकी जांच सौंपी है।
गांव पवसरा निवासी परमाल सिंह ने एसएसपी को शिकायती पत्र देते हुए बताया कि 16 दिसंबर 2020 को दहेज एक्ट का मुकदमा अगौता थाने में दर्ज कराया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद अगौता थाने के एक दरोगा से पीड़ित परिवार मिला। दरोगा ने दस हजार रुपये मिलने पर फैसला कराने की बात कही। फैसला न होने पर सभी आरोपियों को जेल भेजने की बात कही। पीड़ित का आरोप है 21 मार्च को दरोगा ने विवाहिताओं को थाने बुला लिया और पीड़ित से दस हजार रुपये साथी दरोगा को देने की बात कही। जिस पर पीड़ित ने उन्हें पैसे दे दिए। दरोगा ने दोनों विवाहिताओं के बयान दर्ज करके उन्हें थाने से भेज दिया। पीड़ित का आरोप है कि दरोगा ने कई बार आरोपियों को पकड़ने के लिए कार भी मंगवा ली। लेकिन ऐन वक्त पर दरोगा दबिश के लिये मना करके उसे वापस भेज देते थे। पीड़ित ने एसएसपी से दस हजार रुपये वापस दिलाने के साथ दोनों दारोगाओं पर कार्रवाई करने की मांग की है। एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने प्रकरण की जांच सीओ सिकंदराबाद नम्रता श्रीवास्तव को सौंपी है।
कोरोना काल के दौरान दहेज एक्ट के केस में सात साल से कम सजा होने के कारण सभी छह आरोपियों को थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया गया था। पीड़ित से पैसे वसूलने का आरोप निराधार है। - सुबोध कुमार, एसआई थाना अगौता
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बुलंदशहर। छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में देहात कोतवाली में तैनात जांच अधिकारी पर आरोपी पक्ष से साठगांठ के आरोप लगे हैं। पीड़ित महिला का कहना है कि जांच अधिकारी ने मामले में संगीन धाराएं जिसमें मारपीट और लूटपाट शामिल है, हटा दी हैं। उसने आला अफसरों से कार्रवाई की गुहार लगाई है।
कोतवाली देहात क्षेत्र के दरियापुर गांव में दो पक्षों में गत 4 जून को झगड़ा हुआ था। प्रधान पक्ष के लोगों ने एक महिला के साथ अभद्रता करते हुए छेड़छाड़ और मारपीट की थी। इसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुई। इसके बाद कोतवाली देहात पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया था। बताया गया कि मामले में कोतवाली देहात में तैनात जांच अधिकारी एक उपनिरीक्षक ने दूसरे पक्ष से साठगांठ कर संगीन धाराएं हटा दीं। पीड़ित महिला ने बताया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन जांच अधिकारी तमाम संगीन धाराएं हटा दी। जिससे आरोपी की जमानत हो गई । आरोपी को लाभ देने के लिए सब इंस्पेक्टर आरोपियों के घर रात दिन कई कई बार चक्कर काटते रहे। पीड़ित महिला का यह भी आरोप है कि वह शिकायत करने की उच्च अधिकारियों से बात कहती हैं तो दरोगा उसे उल्टा जेल भेजने की धमकी दी।
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पीड़िता ने खोई आस
पीड़िता ने आरोपियों से साठगांठ करने पर जांच अधिकारी से शिकायत की है। साथ ही भविष्य में न्याय मिलने की उम्मीद से भी आस छोड़ दी है। पीड़िता का कहना है की भविष्य में उसके खिलाफ भी झूठे मुकदमे या अन्य कोई वारदात हो सकती है।
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मामले में अभी कोई ऐसा शिकायती पत्र नहीं मिला है, यदि ऐसा कुछ हुआ है तो मामले की गहनता से जांच पड़ताल करा कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। दोषी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। - संतोष कुमार सिंह, एसएसपी
दहेज एक्ट के केस में दस हजार वसूलने का आरोप, बैठी जांच
औरंगाबाद। अगौता थाना क्षेत्र के गांव पवसरा निवासी दो सगी बहनों के दहेज एक्ट के केस में पीड़ित ने थाने के दो दरोगाओं पर दस हजार रुपये वसूलने का आरोप लगाते हुए एसएसपी से शिकायत की है। एसएसपी ने प्रकरण में जांच बैठाते हुए सीओ सिकंदराबाद को इसकी जांच सौंपी है।
गांव पवसरा निवासी परमाल सिंह ने एसएसपी को शिकायती पत्र देते हुए बताया कि 16 दिसंबर 2020 को दहेज एक्ट का मुकदमा अगौता थाने में दर्ज कराया गया था। मुकदमा दर्ज होने के बाद अगौता थाने के एक दरोगा से पीड़ित परिवार मिला। दरोगा ने दस हजार रुपये मिलने पर फैसला कराने की बात कही। फैसला न होने पर सभी आरोपियों को जेल भेजने की बात कही। पीड़ित का आरोप है 21 मार्च को दरोगा ने विवाहिताओं को थाने बुला लिया और पीड़ित से दस हजार रुपये साथी दरोगा को देने की बात कही। जिस पर पीड़ित ने उन्हें पैसे दे दिए। दरोगा ने दोनों विवाहिताओं के बयान दर्ज करके उन्हें थाने से भेज दिया। पीड़ित का आरोप है कि दरोगा ने कई बार आरोपियों को पकड़ने के लिए कार भी मंगवा ली। लेकिन ऐन वक्त पर दरोगा दबिश के लिये मना करके उसे वापस भेज देते थे। पीड़ित ने एसएसपी से दस हजार रुपये वापस दिलाने के साथ दोनों दारोगाओं पर कार्रवाई करने की मांग की है। एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने प्रकरण की जांच सीओ सिकंदराबाद नम्रता श्रीवास्तव को सौंपी है।
कोरोना काल के दौरान दहेज एक्ट के केस में सात साल से कम सजा होने के कारण सभी छह आरोपियों को थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया गया था। पीड़ित से पैसे वसूलने का आरोप निराधार है। - सुबोध कुमार, एसआई थाना अगौता