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15 प्रतिशत अधिक वोट लेकर भी एक सीट नहीं जीत पाया गठबंधन
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15 प्रतिशत अधिक वोट लेकर भी एक सीट नहीं जीत पाया गठबंधन
बुलंदशहर। जिले में सभी सीटें हारने के बावजूद सपा और रालोद का जनाधार बढ़ा है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में 2022 के चुनाव में 4.8 प्रतिशत अधिक वोट मिला है। भाजपा के मत प्रतिशत में भी बढ़ोतरी हुई है। उसे इस बार 3.47 फीसदी अधिक मत मिले। जबकि बसपा और कांग्रेस को नुकसान झेलना पड़ा। बसपा का 11.21 फीसदी वोट जहां उससे जहां छिटक गया, वहीं कांग्रेस से छिटकने वाले वोटर 50 प्रतिशत से भी अधिक हैं। कांग्रेस को इस बार महज 1.61 फीसदी मतदाताओं ने ही पसंद किया। आम आदमी पार्टी और ओवैसी की एआईएमआईएम भी मतदाताओं को लुभाने में नाकाम रहे।
संजय शर्मा को इस बार 3.36 प्रतिशत अधिक वोट मिला
अनूपशहर सीट पर 2017 में भाजपा प्रत्याशी संजय शर्मा को 49.28 फीसदी वोट मिले थे। इस बार यह आंकड़ा 3.36 फीसदी बढ़कर 52.64 फीसदी पहुंच गया। यहां बसपा को करीब दो फीसदी वोटों का घाटा हुआ। उसे इस बार केवल 20.11 फीसदी मतदाताओं ने ही वोट किया है। 2017 में सपा-रालोद के प्रत्याशियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए कुल 26.41 फीसदी वोट प्राप्त किए थे, इस बार यह सीट एनसीपी के खाते में जाने के बाद 7.89 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
सपा-रालोद के खाते में नौ प्रतिशत वोटों का इजाफा
सिकंदराबाद सीट पर मतदाताओं ने 2017 के सापेक्ष भाजपा को 4.17 फीसदी अधिक वोट देकर पहला चुनाव लड़ रहे लक्ष्मीराज सिंह को विधानसभा पहुंचा दिया। यहां 2017 में सपा और रालोद के प्रत्याशियों ने अलग-अलग लड़ते हुए कुल 26.55 फीसदी वोट प्राप्त किया था। इस बार एक साथ आने पर 35.26 फीसदी मिला। बसपा का वोट यहां पर 30.42 फीसदी से गिरकर इस बार 15.61 फीसदी पर आ गया।
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बुलंदशहर सीट पर 27 फीसदी गिरा बसपा का वोट
जिले की सबसे हॉट बुलंदशहर सदर विधानसभा सीट पर भाजपा को गठबंधन से टक्कर मिलती दिखी। यहां मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी को कुल 48.94 फीसदी वोट दिया, यह 2017 के सापेक्ष 3.12 फीसदी अधिक था। सपा-रालोद गठबंधन ने अपने वोट बैंक में 22 फीसदी की बढ़ोत्तरी करते हुए 38.99 फीसदी वोट प्राप्त किया। बसपा को यहां पर सबसे अधिक 26.94 फीसदी मतों का नुकसान झेलना पड़ा है।
देवेंद्र लोधी के मतों में साढ़े चार प्रतिशत का इजाफा
भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र लोधी का कुछ जगह विरोध भी हुआ था, बावजूद मतदाताओं ने पिछले चुनाव के मुकाबले 4.43 फीसदी अधिक वोट करते हुए उनके पक्ष में 58.9 फीसदी मतदान किया। गठबंधन के प्रत्याशी को यहां पर केवल 23.49 फीसदी वोट मिले, जो कि पिछले चुनाव के मुकाबले 13.79 फीसदी अधिक था। बसपा को यहां भी 9.18 फीसदी की मतों का नुकसान उठाना पड़ा। इस बार केवल 14.29 फीसदी वोट ही बसपा प्रत्याशी को मिल सके।
कल्याण के गढ़ में और मजबूत हुई भाजपा
कल्याण सिंह की कर्मभूमि डिबाई में भी इस बार भाजपा का 4.78 प्रतिशत वोट बढ़ गया। 53.82 प्रतिशत के मुकाबले इस बार 58.60 प्रतिशत वोट भाजपा के पक्ष में गया। गठबंधन के प्रत्याशी को इस बार 23.50 फीसदी के सापेक्ष 27.61 फीसदी वोट मिले। बसपा को यहां भी 10.48 फीसदी का वोटों का नुकसान हुआ। इस बार कुल 11.17 फीसदी ही वोट मिल सके।
अनिल शर्मा पर बढ़ा मतदाताओं का भरोसा
भाजपा से मंत्री अनिल शर्मा और गठबंधन से पूर्व मंत्री किरनपाल के मैदान में उतरने से यहां मुकाबला कड़ा माना जा रहा था, लेकिन मतदाताओं को रिझाने में अनिल शर्मा कामयाब रहे। इस बार भरोसा और मजबूत हुआ है। 2017 के सापेक्ष 2.25 फीसदी अधिक मत प्राप्त करते हुए अनिल शर्मा ने किरनपाल को एकतरफा मात दी। भाजपा के अनिल शर्मा को 53.04 फीसदी वोट मिले, जबकि गठबंधन प्रत्याशी किरनपाल को 23.25 फीसदी वोट ही मिल सके। बसपा को यहां भी 8.35 फीसदी मतों का नुकसान हुआ।
खुर्जा में सपा को 25 फीसदी वोटों का फायदा
खुर्जा विधानसभा सीट पर भी इस बार भाजपा को 2.2 फीसदी अधिक वोट मिला। वहीं, सपा को 25.46 फीसदी वोटों का फायदा हुआ, लेकिन वह जीतने के लिए काफी नहीं था। बसपा को 5.99 फीसदी वोटों का नुकसान झेलना पड़ा।
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बुलंदशहर। जिले में सभी सीटें हारने के बावजूद सपा और रालोद का जनाधार बढ़ा है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव की तुलना में 2022 के चुनाव में 4.8 प्रतिशत अधिक वोट मिला है। भाजपा के मत प्रतिशत में भी बढ़ोतरी हुई है। उसे इस बार 3.47 फीसदी अधिक मत मिले। जबकि बसपा और कांग्रेस को नुकसान झेलना पड़ा। बसपा का 11.21 फीसदी वोट जहां उससे जहां छिटक गया, वहीं कांग्रेस से छिटकने वाले वोटर 50 प्रतिशत से भी अधिक हैं। कांग्रेस को इस बार महज 1.61 फीसदी मतदाताओं ने ही पसंद किया। आम आदमी पार्टी और ओवैसी की एआईएमआईएम भी मतदाताओं को लुभाने में नाकाम रहे।
संजय शर्मा को इस बार 3.36 प्रतिशत अधिक वोट मिला
अनूपशहर सीट पर 2017 में भाजपा प्रत्याशी संजय शर्मा को 49.28 फीसदी वोट मिले थे। इस बार यह आंकड़ा 3.36 फीसदी बढ़कर 52.64 फीसदी पहुंच गया। यहां बसपा को करीब दो फीसदी वोटों का घाटा हुआ। उसे इस बार केवल 20.11 फीसदी मतदाताओं ने ही वोट किया है। 2017 में सपा-रालोद के प्रत्याशियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए कुल 26.41 फीसदी वोट प्राप्त किए थे, इस बार यह सीट एनसीपी के खाते में जाने के बाद 7.89 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
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सपा-रालोद के खाते में नौ प्रतिशत वोटों का इजाफा
सिकंदराबाद सीट पर मतदाताओं ने 2017 के सापेक्ष भाजपा को 4.17 फीसदी अधिक वोट देकर पहला चुनाव लड़ रहे लक्ष्मीराज सिंह को विधानसभा पहुंचा दिया। यहां 2017 में सपा और रालोद के प्रत्याशियों ने अलग-अलग लड़ते हुए कुल 26.55 फीसदी वोट प्राप्त किया था। इस बार एक साथ आने पर 35.26 फीसदी मिला। बसपा का वोट यहां पर 30.42 फीसदी से गिरकर इस बार 15.61 फीसदी पर आ गया।
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बुलंदशहर सीट पर 27 फीसदी गिरा बसपा का वोट
जिले की सबसे हॉट बुलंदशहर सदर विधानसभा सीट पर भाजपा को गठबंधन से टक्कर मिलती दिखी। यहां मतदाताओं ने भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी को कुल 48.94 फीसदी वोट दिया, यह 2017 के सापेक्ष 3.12 फीसदी अधिक था। सपा-रालोद गठबंधन ने अपने वोट बैंक में 22 फीसदी की बढ़ोत्तरी करते हुए 38.99 फीसदी वोट प्राप्त किया। बसपा को यहां पर सबसे अधिक 26.94 फीसदी मतों का नुकसान झेलना पड़ा है।
देवेंद्र लोधी के मतों में साढ़े चार प्रतिशत का इजाफा
भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र लोधी का कुछ जगह विरोध भी हुआ था, बावजूद मतदाताओं ने पिछले चुनाव के मुकाबले 4.43 फीसदी अधिक वोट करते हुए उनके पक्ष में 58.9 फीसदी मतदान किया। गठबंधन के प्रत्याशी को यहां पर केवल 23.49 फीसदी वोट मिले, जो कि पिछले चुनाव के मुकाबले 13.79 फीसदी अधिक था। बसपा को यहां भी 9.18 फीसदी की मतों का नुकसान उठाना पड़ा। इस बार केवल 14.29 फीसदी वोट ही बसपा प्रत्याशी को मिल सके।
कल्याण के गढ़ में और मजबूत हुई भाजपा
कल्याण सिंह की कर्मभूमि डिबाई में भी इस बार भाजपा का 4.78 प्रतिशत वोट बढ़ गया। 53.82 प्रतिशत के मुकाबले इस बार 58.60 प्रतिशत वोट भाजपा के पक्ष में गया। गठबंधन के प्रत्याशी को इस बार 23.50 फीसदी के सापेक्ष 27.61 फीसदी वोट मिले। बसपा को यहां भी 10.48 फीसदी का वोटों का नुकसान हुआ। इस बार कुल 11.17 फीसदी ही वोट मिल सके।
अनिल शर्मा पर बढ़ा मतदाताओं का भरोसा
भाजपा से मंत्री अनिल शर्मा और गठबंधन से पूर्व मंत्री किरनपाल के मैदान में उतरने से यहां मुकाबला कड़ा माना जा रहा था, लेकिन मतदाताओं को रिझाने में अनिल शर्मा कामयाब रहे। इस बार भरोसा और मजबूत हुआ है। 2017 के सापेक्ष 2.25 फीसदी अधिक मत प्राप्त करते हुए अनिल शर्मा ने किरनपाल को एकतरफा मात दी। भाजपा के अनिल शर्मा को 53.04 फीसदी वोट मिले, जबकि गठबंधन प्रत्याशी किरनपाल को 23.25 फीसदी वोट ही मिल सके। बसपा को यहां भी 8.35 फीसदी मतों का नुकसान हुआ।
खुर्जा में सपा को 25 फीसदी वोटों का फायदा
खुर्जा विधानसभा सीट पर भी इस बार भाजपा को 2.2 फीसदी अधिक वोट मिला। वहीं, सपा को 25.46 फीसदी वोटों का फायदा हुआ, लेकिन वह जीतने के लिए काफी नहीं था। बसपा को 5.99 फीसदी वोटों का नुकसान झेलना पड़ा।