{"_id":"576eb8634f1c1bc525b4a08a","slug":"during-shutdown-the-current-scorched-daughter","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘शटडाउन के दौरान करंट से झुलसी बिटिया’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘शटडाउन के दौरान करंट से झुलसी बिटिया’
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
Updated Sat, 25 Jun 2016 10:29 PM IST
विज्ञापन
करंट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिटिया मामले में संवेदनहीन बने अफसरों का झूठ भी अब सामने आने लगा है। बिटिया के हाइटेंशन लाइन से झुलसने के वक्त अफसर बिजलीघर से शटडाउन दिखा रहे हैं। वहीं पीवीवीएनएल एमडी ने अब दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। सर्किल द्वितीय के अधीक्षण अभियंता को जांच सौंपी है।
विज्ञापन
नगर के डीएम रोड स्थित झुग्गीपट्टी निवासी अख्तर की 12 वर्षीया बेटी चांदनी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गई थी। डॉक्टरों को चांदनी का एक हाथ तक काटना पड़ा था। पीड़िता का पिता प्रशासन और कारपोरेशन अफसरों के दफ्तरों की खाक छानता रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
मामला अखबारों की सुर्खियां बनने के बाद अखिल भारतीय यादव महासभा के सचिव नितिन यादव ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री समेत तमाम आयोगों में की। मुख्यमंत्री के संज्ञान लेते ही मामले की जांच शासन स्तर से शुरू कराई गई। एमडी ने विद्युत सुरक्षा निदेशालय को जांच सौंपी। मामले में एसई के खिलाफ कार्रवाई भी हुई।
विज्ञापन
अब बुलंदशहर एक्सईएन द्वारा रिपोर्ट दी गई है कि बिटिया के झुलसने के समय तो बिजलीघर से शटडाउन था, हालांकि एक्सईएन बिटिया के करंट से झुलसने की बात मान रहे हैं।
पीवीवीएनएल एमडी अभिषेक प्रकाश ने अब मामले की दोबारा जांच के लिए सर्किल द्वितीय के अधीक्षण अभियंता राकेश कुशवाहा को निर्देश दिए हैं।
बिटिया को बेहतर इलाज की दरकार
पिछले आठ माह से जिंदगी और मौत से जूझ रही बिटिया को इलाज की दरकार है। बिटिया का पिता आर्थिक रूप से काफी कमजोर है, जिसके कारण वह उसका बेहतर उपचार भी नहीं करा पा रहा है। सिस्टम ऐसा है कि बिटिया के पिता के पास 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद का चेक भी सात माह बाद पहुंचा।
बिटिया की मदद को जारी यह छोटा सा चेक अफसरों के दफ्तराें में ही घूमता रहा। फजीहत बढ़ी तो अफसर स्वयं चेक देने जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल में बिटिया का उपचार संभव नहीं है। उसका बेहतर उपचार दिल्ली के बड़े अस्पताल में ही संभव है, लेकिन बेबस पिता और नकारा सिस्टम बिटिया को इलाज तक नहीं मुहैया करा पा रहा है।
एमडी के निर्देश मिल चुके हैं। बिटिया के मामले की जांच शुरू कर दी गई है। बिटिया के मामले से जुड़ी सभी पत्रावलियां तलब की गई हैं। जल्द ही निष्पक्ष तरीके से जांच कर रिपोर्ट एमडी को भेजी जाएगी। - राकेश कुशवाहा, अधीक्षण अभियंता