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मां-बेटी की हत्या में तीन को उम्रकैद की सजा
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जिला एवं सत्र न्यायालय।
- फोटो : BULANDSHAHR
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मां-बेटी की हत्या में तीन को उम्रकैद की सजा
बुलंदशहर। एकतरफा प्रेम में मां-बेटी की हत्या में अपर सत्र न्यायाधीश पंचम नीलम ढाका की कोर्ट ने रोहताश और उसके दो साथियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। रोहताश महिला से एकतरफा प्यार करता था। संबंध बनाने से महिला के इनकार पर आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी चंद्रभान सिंह ने बताया कि चंद्रवीर सिंह ने बीबीनगर थाना पुलिस को बताया था कि 1 मार्च 2016 को वह गांव सठला और अल्लीपुर के बीच स्थित अपने गेहूं के खेत पर था। तभी उसे खेत में पड़े एक बोरे से बदबू आई तो उसने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने जांच की तो बोरे में सड़ी-गली अवस्था में रूपवती और उसकी आठ वर्षीय बेटी रश्मि शव मिले। अमीचंद ने आरोप लगाया कि उसके ममेरे भाई रोहताश ने ही दोनों की हत्या कर शव बोरे में छिपाया। पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच करते हुए आरोपी रोहताश को गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपी ने बताया था कि वह महिला से एकतरफा प्यार करता था और संबंध बनाना चाहता था। इसका विरोध करने पर उसने अपने साथियों दिनेश और जितेंद्र उर्फ जीतू के साथ मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था। इसके लिए उसने महिला को झूठी सूचना दी थी कि उसके पति का एक्सीडेंट हो गया है। जिसके चलते रूपवती व उसकी बेटी को साथ ले आया और मौका पाकर धारदार हथियार से दोनों की हत्या कर शव बोरे में छिपा दिया था।
यह गवाह कोर्ट में हुए पेश
मामले में चंद्रवीर, पीड़ित अमीचंद, ज्ञान चंद, बदन सिंह, कांस्टेबल रतनपाल, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डा. शिवकुमार उपाध्याय, डा. अरुण कुमार, नेपाल सिंह, अमित कुमार राठी, आरपी सिंह, निरीक्षक निसार हुसैन, एसआई प्रवीण कुमार के बयान दर्ज किए गए।
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गैंगस्टर धर्मवीर को चार साल की जेल, 20 हजार अर्थदंड
बुलंदशहर। गैंगस्टर धर्मवीर को कोर्ट ने दोषी मानते हुए चार साल की सजा व 20 हजार रूपये की अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोेपी पर छह मुकदमे दर्ज हुए थे। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर अधिनियम योगेश कुमार ने बताया कि वर्ष 1997 में आरोपी धर्मवीर आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। जमीन आदि को हड़पने, फिरौती के लिए आरोपी हत्या और हत्या के प्रयास जैसी वारदातों को अंजाम देता था। जनता में असुरक्षा की भावना के चलते उनके खिलाफ कोई मुकदमा लिखाने के लिए तैयार नहीं होता। खुर्जा नगर थाने में 29 अक्तूबर 1997 को गैंगस्टर एक्ट के तहत धर्मवीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में पुलिस ने धर्मवीर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में हरिशंकर और जयपाल ने गवाही दी। संवाद
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बुलंदशहर। एकतरफा प्रेम में मां-बेटी की हत्या में अपर सत्र न्यायाधीश पंचम नीलम ढाका की कोर्ट ने रोहताश और उसके दो साथियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। रोहताश महिला से एकतरफा प्यार करता था। संबंध बनाने से महिला के इनकार पर आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी थी।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी चंद्रभान सिंह ने बताया कि चंद्रवीर सिंह ने बीबीनगर थाना पुलिस को बताया था कि 1 मार्च 2016 को वह गांव सठला और अल्लीपुर के बीच स्थित अपने गेहूं के खेत पर था। तभी उसे खेत में पड़े एक बोरे से बदबू आई तो उसने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने जांच की तो बोरे में सड़ी-गली अवस्था में रूपवती और उसकी आठ वर्षीय बेटी रश्मि शव मिले। अमीचंद ने आरोप लगाया कि उसके ममेरे भाई रोहताश ने ही दोनों की हत्या कर शव बोरे में छिपाया। पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच करते हुए आरोपी रोहताश को गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपी ने बताया था कि वह महिला से एकतरफा प्यार करता था और संबंध बनाना चाहता था। इसका विरोध करने पर उसने अपने साथियों दिनेश और जितेंद्र उर्फ जीतू के साथ मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था। इसके लिए उसने महिला को झूठी सूचना दी थी कि उसके पति का एक्सीडेंट हो गया है। जिसके चलते रूपवती व उसकी बेटी को साथ ले आया और मौका पाकर धारदार हथियार से दोनों की हत्या कर शव बोरे में छिपा दिया था।
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यह गवाह कोर्ट में हुए पेश
मामले में चंद्रवीर, पीड़ित अमीचंद, ज्ञान चंद, बदन सिंह, कांस्टेबल रतनपाल, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डा. शिवकुमार उपाध्याय, डा. अरुण कुमार, नेपाल सिंह, अमित कुमार राठी, आरपी सिंह, निरीक्षक निसार हुसैन, एसआई प्रवीण कुमार के बयान दर्ज किए गए।
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गैंगस्टर धर्मवीर को चार साल की जेल, 20 हजार अर्थदंड
बुलंदशहर। गैंगस्टर धर्मवीर को कोर्ट ने दोषी मानते हुए चार साल की सजा व 20 हजार रूपये की अर्थदंड की सजा सुनाई है। आरोेपी पर छह मुकदमे दर्ज हुए थे। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर अधिनियम योगेश कुमार ने बताया कि वर्ष 1997 में आरोपी धर्मवीर आपराधिक वारदातों को अंजाम देता था। जमीन आदि को हड़पने, फिरौती के लिए आरोपी हत्या और हत्या के प्रयास जैसी वारदातों को अंजाम देता था। जनता में असुरक्षा की भावना के चलते उनके खिलाफ कोई मुकदमा लिखाने के लिए तैयार नहीं होता। खुर्जा नगर थाने में 29 अक्तूबर 1997 को गैंगस्टर एक्ट के तहत धर्मवीर पर मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में पुलिस ने धर्मवीर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में हरिशंकर और जयपाल ने गवाही दी। संवाद