{"_id":"6ad28f6af02807b13d0ce35e","slug":"donated-his-body-to-the-very-medical-college-where-he-had-pursued-his-mbbs-studies-bulandshahr-news-c-133-1-bul1004-168496-2026-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: जिस मेडिकल कॉलेज से की एमबीबीएस की पढ़ाई, निधन के बाद उसी को किया देहदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: जिस मेडिकल कॉलेज से की एमबीबीएस की पढ़ाई, निधन के बाद उसी को किया देहदान
विज्ञापन
औरंगाबाद। क्षेत्र के गांव निमचाना निवासी डॉ. ईश्वर चंद्रा का 74 वर्ष की आयु में बृहस्पतिवार रात निधन हो गया। डॉ. चंद्रा ने मृत्यु से पूर्व ही अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के लिए दान करने का संकल्प लिया था। अब उनकी देह मेरठ स्थित लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज (एलएलआरएम) को सौंपी जाएगी। खास बात यह है कि डॉ. चंद्रा ने वर्ष 1970 में इसी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी।
डॉ. ईश्वर चंद्रा मूल रूप से अगौता क्षेत्र के गांव निमचाना के निवासी थे। करीब पांच दशक पहले उन्होंने औरंगाबाद कस्बे में स्याना रोड पर एक अस्पताल खोलकर लंबे समय तक चिकित्सा सेवाएं दीं। डेढ़ वर्ष पहले वह परिवार के साथ गुरुग्राम चले गए थे। पिछले काफी समय से उनका स्वास्थ्य खराब होने पर मेरठ के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। पुत्र विजय गोयल ने बताया कि पिता ने मृत्यु पूर्व ही अपने शरीर को दान करने का फैसला लिया था। इसके लिए वह मेरठ मेडिकल कॉलेज में देह दान की सारी प्रक्रियाएं पहले ही पूरा कर चुके थे। उनका मानना था कि मृत्यु उपरांत मेरा शरीर चिकित्सा की पढ़ाई/शोध कर रहे छात्रों के काम आए, जिससे वह कुछ नया और अच्छा कर सकें। डॉक्टर चंद्रा की मृत्यु के बाद परिजन ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में देहदान की प्रक्रिया करने वाले शरीर रचना विभाग को सूचित कर दिया है। अब यह शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया जाएगा। इधर, चिकित्सक के निधन की सूचना से पूरे कस्बे और क्षेत्र में शोक की लहर है। परिवार में उनकी पत्नी डॉक्टर सुधा गुप्ता, पुत्र विजय गुप्ता, पुत्री अमृता अग्रवाल और दामाद गौरव अग्रवाल हैं।
विज्ञापन
डॉ. ईश्वर चंद्रा मूल रूप से अगौता क्षेत्र के गांव निमचाना के निवासी थे। करीब पांच दशक पहले उन्होंने औरंगाबाद कस्बे में स्याना रोड पर एक अस्पताल खोलकर लंबे समय तक चिकित्सा सेवाएं दीं। डेढ़ वर्ष पहले वह परिवार के साथ गुरुग्राम चले गए थे। पिछले काफी समय से उनका स्वास्थ्य खराब होने पर मेरठ के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। पुत्र विजय गोयल ने बताया कि पिता ने मृत्यु पूर्व ही अपने शरीर को दान करने का फैसला लिया था। इसके लिए वह मेरठ मेडिकल कॉलेज में देह दान की सारी प्रक्रियाएं पहले ही पूरा कर चुके थे। उनका मानना था कि मृत्यु उपरांत मेरा शरीर चिकित्सा की पढ़ाई/शोध कर रहे छात्रों के काम आए, जिससे वह कुछ नया और अच्छा कर सकें। डॉक्टर चंद्रा की मृत्यु के बाद परिजन ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में देहदान की प्रक्रिया करने वाले शरीर रचना विभाग को सूचित कर दिया है। अब यह शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया जाएगा। इधर, चिकित्सक के निधन की सूचना से पूरे कस्बे और क्षेत्र में शोक की लहर है। परिवार में उनकी पत्नी डॉक्टर सुधा गुप्ता, पुत्र विजय गुप्ता, पुत्री अमृता अग्रवाल और दामाद गौरव अग्रवाल हैं।
विज्ञापन