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अधिवक्ता नहीं कर रही परमाणु वैज्ञानिक का सहयोग

Fri, 31 Mar 2017 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Fri, 31 Mar 2017 12:54 AM IST
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Do not advocate nuclear scientist
क्राइम - फोटो : अमर उजाला

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अमेरिका में तैनात भारती परमाणु वैज्ञानिक डॉ. तरुण भारद्वाज को नजरबंद हुए तीन माह से अधिक समय बीत चुका है। अमेरिकी संघीय न्यायालय से उसे न्याय मिलने की उम्मीद है, लेकिन अब उनकी वकील ही उनका सहयोग नहीं कर रही है। परिजनों का आरोप है कि वे सोलिसिटर जनरल के दबाव में आ गईं हैं ।

वे अब मनोचिकित्सक से बात करने की सलाह दे रही है अन्यथा केस छोड़ने की धमकी दे रही है। अब बूढ़े माता-पिता को पीएम आफिस से ही बेटे की स्वदेश वापसी की आस नजर आ रही है।
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शिकारपुर निवासी डीएपी इंटर कॉलेज के रिटायर शिक्षक रामकिशन शर्मा के पुत्र डॉ. तरुण कुमार भारद्वाज ने भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र से पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद वर्ष 2010 में ए एंड एम यूनिवर्सिटी टैक्सास अमेरिका में बतौर परमाणु वैज्ञानिक नियुक्ति पाई।
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अक्तूबर 2015 में नस्लवादी व्यवहार और भृष्टाचार का विरोध करने पर षड्यंत्र के तहत उनके बेटे को झूठे आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया गया। उसे नौकरी से निकाल दिया गया तो उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

संघीय न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुये विवि को 350 मिलियन डालर(दो अरब चौंतीस करोड़ तेईस लाख पिचहत्तर हजार रूपये) देने का आदेश दिया। विवि प्रशासन ने पेमेंट करने के बजाए 29 दिसंबर 2016 को उसे नजरबंद कर लिया गया। परिजनों के अनुसार विवि प्रशासन और सोलिसिटर जनरल उसके बेटे को पागल करार देने पर तुले हैं।

बेटे को न्याय दिलाने और भारत वापसी के लिए बूढे़ माता पिता बडे़ बेटे प्रसून के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय गए थे। 28 मार्च 2017 में प्रधानमंत्री कार्यालय से परिजनों को फोन आया था। पीएम के सचिव ने उनके वैज्ञानिक बेटे को न्याय दिलाने के लिये भारत सरकार द्वारा हर संभव सहायता किये जाने का आश्वासन दिया था।

बृहस्पतिवार सुबह वैज्ञानिक बेटे ने फोन कर परिजनों के होश उड़ा दिए। भाई प्रसून ने बताया कि भाई तरुण की कोर्ट में पैरवी कर रही वकील उनका सहयोग नहीं कर रही है। भाई ने उन्हें बताया कि वह भी सोलिसिटर जनरल जनरल के दबाव में आ गई है।


वकील ने उन्हें पागल करार देने के षड्यंत्रकारी मनोचिकित्सक से बात करने की सलाह दी है। वकील ने उसे धमकी दी है कि बात न करने की स्थित वह उसका केस नहीं लड़ेगी। बूढ़ी मां ने कहा कि अब प्रधानमंत्री मोदी ही उसके बेटे को न्याय दिला पाएंगे।

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