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वृद्धा की शवयात्रा में डीजे संग निकाली घोड़ों की सवारी
बुलंदशहर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2016 12:46 AM IST
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अनूपशहर क्षेत्र में बदलते परिवेश में अब वृद्धों की मौत पर धूमधाम से शवयात्रा निकाला आम रिवाज बन गया है। शनिवार को इस पंरपरा में डीजे तो बजा ही साथ में घोड़ों की सवारी भी शामिल की गई।
गांव ऐंचौरा निवासी रेशमीदेवी पत्नी इंद्रजीतसिंह उम्र करीब 87 साल का शुक्रवार को देहांत हो गया था। चार पीढ़ी देख चुकी रेशमी देवी की अर्थी को परंपरा के हिसाब से विमान बनाकर शानदार तरीके से सजाया गया।
परिजन और ग्रामीण बाजे गाजे और डीजे की धुनें पर थिरकते रंग गुलाल उड़ाते और आतिशबाजी के साथ शवयात्रा जिसमें घोड़े भी डांस कर रहे थे। अंतिम संस्कार के लिए अनूपशहर गंगातट पर शनिवार दोपहर लेकर आए।
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एलआईसी एजेंट पुत्र सिंहराज ने बताया उनका छह भाइयों का भरा पूरा परिवार है उनकी वृद्धा मां ने जीवन की सभी खुशियां देख ली हैं। इसलिए उनकी मौत पर क्षेत्रीय परंपरा के तहत ही शवयात्रा को गाजे-बाजे और डीजे, घोड़े के डांस के साथ निकाला गया है।
पुरोहित विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि कलियुग में आदमी की अधिकतम आयु ही सौ साल मानी गई है इसलिए आदमी के जीवन के बारे में कामना की गई है-जीवेम शरद शतम।
उन्होंने कहा कि वृद्धों की मौत पर खुशियां मनाते हुए शवयात्रा निकाला जाना आम रिवाज है।
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गांव ऐंचौरा निवासी रेशमीदेवी पत्नी इंद्रजीतसिंह उम्र करीब 87 साल का शुक्रवार को देहांत हो गया था। चार पीढ़ी देख चुकी रेशमी देवी की अर्थी को परंपरा के हिसाब से विमान बनाकर शानदार तरीके से सजाया गया।
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परिजन और ग्रामीण बाजे गाजे और डीजे की धुनें पर थिरकते रंग गुलाल उड़ाते और आतिशबाजी के साथ शवयात्रा जिसमें घोड़े भी डांस कर रहे थे। अंतिम संस्कार के लिए अनूपशहर गंगातट पर शनिवार दोपहर लेकर आए।
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एलआईसी एजेंट पुत्र सिंहराज ने बताया उनका छह भाइयों का भरा पूरा परिवार है उनकी वृद्धा मां ने जीवन की सभी खुशियां देख ली हैं। इसलिए उनकी मौत पर क्षेत्रीय परंपरा के तहत ही शवयात्रा को गाजे-बाजे और डीजे, घोड़े के डांस के साथ निकाला गया है।
पुरोहित विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि कलियुग में आदमी की अधिकतम आयु ही सौ साल मानी गई है इसलिए आदमी के जीवन के बारे में कामना की गई है-जीवेम शरद शतम।
उन्होंने कहा कि वृद्धों की मौत पर खुशियां मनाते हुए शवयात्रा निकाला जाना आम रिवाज है।