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Bulandshahar News: कोरोना काल के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी खुर्जा की क्रॉकरी की मांग
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खुर्जा स्थित शोरूम में रखी क्रॉकरी
खुर्जा। कोरोना काल के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में खुर्जा की क्रॉकरी की मांग बढ़नी शुरू हो गई है। विदेशों में अब चाइना के उत्पादों से लोग दूरी बना रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कोविड-19 बीमारी के बाद अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के देशों में अब चाइना से कारोबार कम हो गया है।
खुर्जा में करीब 300 से अधिक पॉटरी इकाइयां संचालित हैं। इसमें 40 से अधिक बड़ी इकाइयाें का कारोबार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है। हर साल यह इकाइयां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 140 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करती हैं। इसमें यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के विभिन्न देशों में उत्पाद भेजा जाता है। वहीं उद्यमियों ने बताया कि साल 2020 से पहले अमेरिका, फ्रांस, इटली, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, नेपाल और दक्षिणी अमेरिकी देशों में उनका माल जाता था। विदेशों में सबसे ज्यादा चाइना की क्रॉकरी की डिमांड थी। कोरोना के बाद एक साल के लिए कारोबार बंद हो गया। धीरे-धीरे कारोबार पटरी पर आया।
उद्यमी गुलजीत मिन्हास ने बताया कि कोविड-19 बीमारी के संक्रमण फैलने के कारण विदेशों में चाइना के माल से लोगों ने दूरी बना ली। इसका फायदा भारत को मिला। यूं कहें तो खुर्जा की क्रॉकरी की डिमांड बढ़ गई है। यह काफी अच्छा मौका है। ऐसे में अमेरिका, साउथ कोरिया, इटली, साऊदी अरब समेत विभिन्न देशों में उत्पाद भेजा जा रहा है। साथ ही उत्पाद की वरीयता को बढ़ाया जा रहा है।
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उद्यमी दर्शन छत्रवाल ने बताया कि उनके उत्पाद अमेरिका, इंडोनिशया, टर्की, ब्राजील, नेपाल, अमेरिका, यूरोप समेत 20 से अधिक विदेशों में जाता है। कोविड के बाद भारत के उत्पाद की डिमांड बढ़ गई है। मगर अभी चाइना की अपेक्षा भारत का उत्पाद महंगा है। ऐसे में कम लागत में अच्छा उत्पाद बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि विदेश में कारोबार को बढ़ाया जा सके।
मशीनरी का भी मिल सकता है लाभ
उद्यमी दर्शन छत्रवाल ने बताया कि उद्योग का मुख्य भाग मशीनरी होती है। जहां बेहतर मशीनरी होती है, वहीं पर उत्पाद अच्छा बन सकता है। वर्तमान में चाइना के पास बेहतर मशीन और भट्टी हैं। चाइना के उत्पाद की डिमांड में गिरावट आने पर मशीनरी भी बंद पड़ी है। इसलिए मशीनरी स्टॉकर और भट्टी वाले खुर्जा की ओर से कारोबार करने को तैयार हैं। ऐसे में भारत को मशीनरी का भी लाभ मिल सकता है।
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खुर्जा में करीब 300 से अधिक पॉटरी इकाइयां संचालित हैं। इसमें 40 से अधिक बड़ी इकाइयाें का कारोबार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा है। हर साल यह इकाइयां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 140 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करती हैं। इसमें यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के विभिन्न देशों में उत्पाद भेजा जाता है। वहीं उद्यमियों ने बताया कि साल 2020 से पहले अमेरिका, फ्रांस, इटली, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, इंडोनेशिया, नेपाल और दक्षिणी अमेरिकी देशों में उनका माल जाता था। विदेशों में सबसे ज्यादा चाइना की क्रॉकरी की डिमांड थी। कोरोना के बाद एक साल के लिए कारोबार बंद हो गया। धीरे-धीरे कारोबार पटरी पर आया।
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उद्यमी गुलजीत मिन्हास ने बताया कि कोविड-19 बीमारी के संक्रमण फैलने के कारण विदेशों में चाइना के माल से लोगों ने दूरी बना ली। इसका फायदा भारत को मिला। यूं कहें तो खुर्जा की क्रॉकरी की डिमांड बढ़ गई है। यह काफी अच्छा मौका है। ऐसे में अमेरिका, साउथ कोरिया, इटली, साऊदी अरब समेत विभिन्न देशों में उत्पाद भेजा जा रहा है। साथ ही उत्पाद की वरीयता को बढ़ाया जा रहा है।
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उद्यमी दर्शन छत्रवाल ने बताया कि उनके उत्पाद अमेरिका, इंडोनिशया, टर्की, ब्राजील, नेपाल, अमेरिका, यूरोप समेत 20 से अधिक विदेशों में जाता है। कोविड के बाद भारत के उत्पाद की डिमांड बढ़ गई है। मगर अभी चाइना की अपेक्षा भारत का उत्पाद महंगा है। ऐसे में कम लागत में अच्छा उत्पाद बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि विदेश में कारोबार को बढ़ाया जा सके।
मशीनरी का भी मिल सकता है लाभ
उद्यमी दर्शन छत्रवाल ने बताया कि उद्योग का मुख्य भाग मशीनरी होती है। जहां बेहतर मशीनरी होती है, वहीं पर उत्पाद अच्छा बन सकता है। वर्तमान में चाइना के पास बेहतर मशीन और भट्टी हैं। चाइना के उत्पाद की डिमांड में गिरावट आने पर मशीनरी भी बंद पड़ी है। इसलिए मशीनरी स्टॉकर और भट्टी वाले खुर्जा की ओर से कारोबार करने को तैयार हैं। ऐसे में भारत को मशीनरी का भी लाभ मिल सकता है।