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Bulandshahar News: दुष्कर्म में मिली फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील
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बुलंदशहर। साढ़े छह साल पहले ट्यूशन से लौट रही छात्रा के अपहरण के बाद सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के दोषियों की फांसी को हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद (25 साल) किए जाने के खिलाफ परिजन सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। परिजनों ने हाईकोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर नहीं की और कहा कि यह न्याय की जीत नहीं है।
दो जनवरी 2018 को नगर निवासी कक्षा 12 की छात्रा ट्यूशन पढ़कर लौट रही थी। इसी दौरान कार सवार तीन बदमाशों ने छात्रा का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म करते हुए छात्रा की हत्या कर दी थी। बाद में आरोपियों ने छात्रा का शव गौतमबुद्धनगर की नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। बाद में छात्रा का शव मिलने पर परिजनों ने गौमतबुद्धनगर पहुंचकर शव की शिनाख्त की थी। पुलिस ने तीन आरोपी जुल्फिकार अब्बासी, दिलशाद अब्बासी और ईसराइल उर्फ मलानी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। साथ ही आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। 24 मार्च 2021 को मामले में अपर सत्र न्यायाधीश राजेश पाराशर की कोर्ट ने तीनों आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, अपहरण का दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। दोषियों ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास (25 साल) में तब्दील कर दिया। पीड़ित परिजनों ने शनिवार को अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से वह बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। कहा कि एक घर लौट रही बेटी को बिना जान पहचान आरोपियों ने अपहरण करते हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की वारदात को अंजाम दिया, ऐसे में आरोपियों की फांसी की सजा बरकरार रहनी चाहिए थी।
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दो जनवरी 2018 को नगर निवासी कक्षा 12 की छात्रा ट्यूशन पढ़कर लौट रही थी। इसी दौरान कार सवार तीन बदमाशों ने छात्रा का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म करते हुए छात्रा की हत्या कर दी थी। बाद में आरोपियों ने छात्रा का शव गौतमबुद्धनगर की नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया था। बाद में छात्रा का शव मिलने पर परिजनों ने गौमतबुद्धनगर पहुंचकर शव की शिनाख्त की थी। पुलिस ने तीन आरोपी जुल्फिकार अब्बासी, दिलशाद अब्बासी और ईसराइल उर्फ मलानी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। साथ ही आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। 24 मार्च 2021 को मामले में अपर सत्र न्यायाधीश राजेश पाराशर की कोर्ट ने तीनों आरोपियों को सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, अपहरण का दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। दोषियों ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। इसमें हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास (25 साल) में तब्दील कर दिया। पीड़ित परिजनों ने शनिवार को अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से वह बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। कहा कि एक घर लौट रही बेटी को बिना जान पहचान आरोपियों ने अपहरण करते हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की वारदात को अंजाम दिया, ऐसे में आरोपियों की फांसी की सजा बरकरार रहनी चाहिए थी।
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