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बिजली दफ्तर अग्निकांडः खुली हुई थीं राजस्व रिकार्ड की अलमारियां
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Tue, 19 Jan 2016 10:55 PM IST
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‘बिजली दफ्तर में जब आग लगी तो राजस्व रिकार्ड की अल्मारियां खुलीं हुईं थीं। ’ इसके संकेत बिजली दफ्तर में बीते बुधवार की रात लगी आग की जांच के दौरान मिले हैं।
जांच अधिकारी प्राथमिक जांच में मान रहे हैं कि अग्निकांड संदिग्ध है। उनका अनुमान है कि आग रात करीब 10 से 12 बजे के बीच लगी होगी।
मंगलवार को चीफ इंजीनियर द्वारा गठित टीम के तीनों अधिकारियों ने मौके पर जाकर गहनता से अग्निकांड की जांच की। जांच में सामने आने वाले तथ्य चौंकाने वाले थे।
जांच में सामने आया है कि दीवार में फिट लोहे की मजबूत अलमारियों के अंदर रखे राजस्व के रिकॉर्ड को आखिरकार आग ने कैसे चपेट में ले लिया, जबकि कमरे के पास रखी छोटी सी अलमारी के अंदर आग नहीं पहुंच सकी।
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राजस्व के रिकॉर्ड वाली अलमारी काफी मोटी परत की थी और यह दीवार में फिट थी। लेकिन सुबह अलमारी का पूरा ढांचा दीवार से हटकर नीचे गिर गया था। इस अलमारी में रखे करोड़ों रुपये के राजस्व के रिकॉर्ड पूरी तरह जल गए।
वहीं कैशरूम के पास रखी छोटी सी अलमारी गैलरी में आग लगने के बावजूद सुरक्षित थी। जांच अफसरों ने इसकी पूरी तरह संभावना जताई है कि कैश रूम बंद करने से पहले राजस्व के रिकॉर्ड की अलमारी को खुला छोड़ दिया गया।
इसके कारण ही इस अलमारी के अंदर रखा राजस्व का रिकॉर्ड नष्ट हुआ।
तीन बाबू-चौकीदार के लिखित बयान दर्ज
जांच अधिकारियों ने हैड कैशियर यतेन्द्र शर्मा, कार्यालय सहायक ऋषिकांत शर्मा, कार्यालय सहायक आशुतोष त्यागी के लिखित बयान दर्ज किए हैं।
इसके अलावा चौकीदार के भी लिखित बयान दर्ज किए गए हैं। जांच टीम से जुड़े एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बयानों में विरोधाभास नजर आ रहा है।
चौकीदार द्वारा रटा-रटाया बयान दिया जा रहा है। जबकि पता चला था कि घटना के वक्त चौकीदार खंड में मौजूद ही नहीं था।
पहली सूचना के पांच पहले घंटे लगी आग
आग लगने के बाद से ही कर्मचारियों और चौकीदार द्वारा यह हल्ला मचाया जा रहा था कि आग करीब तीन बजे लगी। जबकि विभागीय जांच में माना गया है कि आग करीब पांच से छह घंटे पहले लगी। आग के लगने का समय करीब 10 से 12 बजे के बीच हो सकता है।
रात में क्यों खुला दफ्तर
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आ रही है कि 13 जनवरी की रात दफ्तर करीब नौ बजे तक खुला। जबकि दफ्तर बंद होने का समय शाम पांच बजे का होता है।
कैशियर से संबंधित रिकॉर्ड नहीं
अंसारी रोड कैशकाउंटर के कैशियर मितेन्द्र सागर ने नवंबर माह में करीब 20 लाख रुपये का घोटाला किया था। कैशियर मितेन्द्र सागर को निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच अधिकारी ने पूछा कि आखिर कैशियर मितेन्द्र सागर से संबंधित रिकॉर्ड कहां है।
अभी तक की गई जांच में घटना पूरी तरह संदिग्ध है। तीन बाबुओं और चौकीदार के लिखित बयान दर्ज किए गए हैं। बड़ी अलमारी में आग लगना और छोटी सुरक्षित होना पूरी घटना को संदिग्ध दर्शा रहा है। आग लगने का अनुमान करीब 10 से 12 बजे के बीच का है।
- राकेश कुशवाहा, एसई, जांच अधिकारी
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जांच अधिकारी प्राथमिक जांच में मान रहे हैं कि अग्निकांड संदिग्ध है। उनका अनुमान है कि आग रात करीब 10 से 12 बजे के बीच लगी होगी।
मंगलवार को चीफ इंजीनियर द्वारा गठित टीम के तीनों अधिकारियों ने मौके पर जाकर गहनता से अग्निकांड की जांच की। जांच में सामने आने वाले तथ्य चौंकाने वाले थे।
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जांच में सामने आया है कि दीवार में फिट लोहे की मजबूत अलमारियों के अंदर रखे राजस्व के रिकॉर्ड को आखिरकार आग ने कैसे चपेट में ले लिया, जबकि कमरे के पास रखी छोटी सी अलमारी के अंदर आग नहीं पहुंच सकी।
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राजस्व के रिकॉर्ड वाली अलमारी काफी मोटी परत की थी और यह दीवार में फिट थी। लेकिन सुबह अलमारी का पूरा ढांचा दीवार से हटकर नीचे गिर गया था। इस अलमारी में रखे करोड़ों रुपये के राजस्व के रिकॉर्ड पूरी तरह जल गए।
वहीं कैशरूम के पास रखी छोटी सी अलमारी गैलरी में आग लगने के बावजूद सुरक्षित थी। जांच अफसरों ने इसकी पूरी तरह संभावना जताई है कि कैश रूम बंद करने से पहले राजस्व के रिकॉर्ड की अलमारी को खुला छोड़ दिया गया।
इसके कारण ही इस अलमारी के अंदर रखा राजस्व का रिकॉर्ड नष्ट हुआ।
तीन बाबू-चौकीदार के लिखित बयान दर्ज
जांच अधिकारियों ने हैड कैशियर यतेन्द्र शर्मा, कार्यालय सहायक ऋषिकांत शर्मा, कार्यालय सहायक आशुतोष त्यागी के लिखित बयान दर्ज किए हैं।
इसके अलावा चौकीदार के भी लिखित बयान दर्ज किए गए हैं। जांच टीम से जुड़े एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बयानों में विरोधाभास नजर आ रहा है।
चौकीदार द्वारा रटा-रटाया बयान दिया जा रहा है। जबकि पता चला था कि घटना के वक्त चौकीदार खंड में मौजूद ही नहीं था।
पहली सूचना के पांच पहले घंटे लगी आग
आग लगने के बाद से ही कर्मचारियों और चौकीदार द्वारा यह हल्ला मचाया जा रहा था कि आग करीब तीन बजे लगी। जबकि विभागीय जांच में माना गया है कि आग करीब पांच से छह घंटे पहले लगी। आग के लगने का समय करीब 10 से 12 बजे के बीच हो सकता है।
रात में क्यों खुला दफ्तर
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आ रही है कि 13 जनवरी की रात दफ्तर करीब नौ बजे तक खुला। जबकि दफ्तर बंद होने का समय शाम पांच बजे का होता है।
कैशियर से संबंधित रिकॉर्ड नहीं
अंसारी रोड कैशकाउंटर के कैशियर मितेन्द्र सागर ने नवंबर माह में करीब 20 लाख रुपये का घोटाला किया था। कैशियर मितेन्द्र सागर को निलंबित कर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच अधिकारी ने पूछा कि आखिर कैशियर मितेन्द्र सागर से संबंधित रिकॉर्ड कहां है।
अभी तक की गई जांच में घटना पूरी तरह संदिग्ध है। तीन बाबुओं और चौकीदार के लिखित बयान दर्ज किए गए हैं। बड़ी अलमारी में आग लगना और छोटी सुरक्षित होना पूरी घटना को संदिग्ध दर्शा रहा है। आग लगने का अनुमान करीब 10 से 12 बजे के बीच का है।
- राकेश कुशवाहा, एसई, जांच अधिकारी