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25 साल में कोर्ट नहीं पहुंची चार्जशीट

Thu, 31 Mar 2016 11:07 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर Updated Thu, 31 Mar 2016 11:07 PM IST
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police could not file chagrsheet in court since 25 years.
कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

खून के रिश्ते पर खाकी का सितम बेहद भारी पड़ा है। 25 साल से भाई की मौत के कसूरवारों को को सजा दिलाने के लिए पीड़ित को खाकी के दर से केवल ठोकरें ही मिल रही हैं। अब पुलिस अफसरों की तरफ से पीड़ित के भाई की चार्जशीट ही खोने की बात कही जा रही है।

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न्यायालय ने जब मामले में पुलिस अफसरों को तलब किया तो फाइल गुम होने का खुलासा हुआ। पीड़ित ने एक बार फिर एसएसपी को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। अगौता थाना क्षेत्र के अकबरपुर रैना गांव निवासी गजेंद्र सिंह पुत्र स्व. चमर सिंह ने एसएसपी पीयूष श्रीवास्तव को भेजे पत्र में बताया है कि 18 अक्तूबर 1991 को धर्मवीर सिंह पुत्र मलखान सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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जिसके संबंध में धर्मवीर के चचेरे भाई बलवीर सिंह पुत्र काले सिंह निवासी जमालपुर मजरा गांव ने श्यामवीर मास्टर, जगतवीर उर्फ गुड्डू पुत्रगण राजेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह पुत्र रणधीर सिंह निवासी अकबरपुर गांव और नरेंद्र उर्फ नागू पुत्र नैन सिंह निवासी तेजगढ़ी सैदपुर की मड़ैया के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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आरोप है कि तब से अब तक कई थानेदार और एसएसपी बदले, मगर एक भी विवेचक न्यायालय में चार्जशीट पेश नहीं कर सका। जबकि किसी भी मामले में पुलिस को 90 दिन के भीतर चार्जशीट कोर्ट में पेश करनी होती है।

इस संबंध में जब पीड़ित ने कोर्ट की शरण ली तो पता चला कि संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही के चलते चार्जशीट मय केस डायरी गुम हो गई है। तब से पीड़ित न्याय की आस में कोर्ट कचहरी और पुलिस अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट रहा है। एसएसपी पीयूष श्रीवास्तव ने कहना है कि पीड़ित उनसे मिला नहीं हैं। पूरा मामला संज्ञान में नहीं है। फाइल देखने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

मामूली बात पर हुई थी हत्या
गजेंद्र सिंह ने बताया कि धर्मवीर सिंह बुग्गी से भैंसरौली शरीफपुर जा रहे थे। रास्ते में आरोपी पीछे से स्कूटर व साइकिल से आ रहे थे। आरोपियों ने साइड लेने के लिए हॉर्न बजाया। इसी बीच आरोपियों ने स्कूटर रोककर गाली-गलौंच शुरू कर दी। आरोपियों ने राइफल से धर्मवीर की गोली मारकर हत्या कर दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी।


90 दिन के भीतर प्रत्येक मामले में चार्जशीट कोर्ट में पेश करनी होती है। तय समय के बीत जाने पर कोर्ट से अगले 90 दिन के भीतर चार्जशीट कोर्ट में पेश करने की अनुमति लेनी होती है। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो यह कानून का मजाक बनाया गया है। जहां तक चार्जशीट और केस डायरी गुम होने की बात है तो लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए। - सुमन सिंह राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता

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