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बरारी नरसंहार : हत्यारे रनवीर को सजा-ए-मौत

Thu, 21 Jul 2016 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Thu, 21 Jul 2016 11:36 PM IST
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Bararee Massacre: Ranbir killer sentenced to death
क्राइम - फोटो : अमर उजाला

आठ साल की लंबी सुनवाई के बाद बहुचर्चित बरारी नरसंहार मामले के दोषी रनवीर को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ सुनील कुमार सिंह प्रथम ने बृहस्पतिवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। साथ ही डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया ।

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फैसला सुनाते वक्त जज ने इसे विरल में से विरलतम श्रेणी की वारदात करार देते हुए कहा कि रनवीर ने बेरहमी से उस शिशु की भी हत्या कर दी, जो गर्भ में था। रनवीर ने सुखवीर का वंश ही मिटा दिया। ऐसे इंसान के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है।
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फैसले के वक्त बीते दिन साक्ष्यों के अभाव में बरी किए गए रनवीर की पत्नी देवेंद्री और उसका भाई मनवीर अदालत में मौजूद नहीं थे। कड़ी सुरक्षा में फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्ट के बाहर ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार  28 जुलाई 2008 की रात दो बजे उसके भाई सुखवीर की ट्यूबवेल पर गला काटकर हत्या कर दी गई। कुछ देर बाद घर में घुसकर सुखवीर की पत्नी सुरेखबाला, बेटा सूर्यप्रताप, सूर्यप्रताप की पत्नी ममता, दूसरा बेटा अभिषेक, अभिषेक की पत्नी लता व सूर्यप्रताप के पुत्र चीकू की हत्या कर दी थी।

खास बात यह थी कि लता नौ माह की गर्भवती थी। इस मामले में मृतक सुखवीर के भाई मनवीर ने अपने भाई रनवीर पुत्र शिवचरण सिंह, उसकी पत्नी देवेंद्री और रनवीर के पुत्र को नामजद कराया।

विवेचना के दौरान पुलिस ने मनवीर को भी आरोपी बनाकर चार्जशीट में शामिल किया। बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ सुनील कुमार सिंह प्रथम ने मुख्य आरोपी रनवीर पुत्र शिवचरण को दोषी करार देकर फैसला सुरक्षित कर लिया था।

वहीं, दो सहअभियुक्त मनवीर और देवेंद्री को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।। तीसरे सहअभियुक्त रनवीर के पुत्र की पत्रावली किशोर न्यायालय में लंबित है। बृहस्पतिवार दोपहर न्यायाधीश ने बरारी नरसंहार के दोषी को फांसी की सजा सुनाई।

साथ ही हत्या के मामले में एक लाख रुपये और आर्म्स एक्ट में 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया । सरकारी पक्ष से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता मोहम्मद शारिक और एडीजीसी राजेश कुमार गुप्ता ने की।


गांव में कोई नहीं लौटा, भाई की शक्ल देखने आया हूं

रनवीर के बड़े भाई जगवीर ने बताया कि वारदात के बाद से देवेंद्री और उसका बेटा- बेटी कभी गांव नहीं लौटे। इस समय रनवीर का घर खाली पड़ा है।  वारदात के एक साल बाद ही मां रामकली का देहांत हो गया था। जगवीर ने कहा कि मैं तो सिर्फ भाई की शक्ल देखने आया हूं।

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