{"_id":"580f98704f1c1b3924bc320f","slug":"again-pf-scam-in-power-corporation","type":"story","status":"publish","title_hn":"पावर कारपोरेशन में फिर पीएफ घोटाला","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
पावर कारपोरेशन में फिर पीएफ घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
Updated Tue, 25 Oct 2016 11:07 PM IST
विज्ञापन
पीएफ घोटाला
- फोटो : ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भ्रष्टाचार के लिए बदनाम पावर कारपोरेशन में अब पीएफ घोटाला सामने आया है। अफसरों की शह पर विद्युत संविदाकर्मियों के पीएफ के 14 लाख रुपये हर माह ठेकेदार डकार रहे हैं। जिलाधिकारी के सामने हुआ समझौता भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इसके बावजूद कारपोरेशन अफसर लंबी तानकर सो रहे हैं।
विज्ञापन
पावर कारपोरेशन में करीब 750 कर्मचारी संविदा पर तैनात हैं। इन कर्मियों को शासन से हर माह करीब 8000 रुपये मानदेय मिलता है। एक कर्मचारी का भविष्य निधि करीब 1800 रुपये होती है। हर माह करीब 14 लाख रुपये की बंदरबांट की जा रही है।
विज्ञापन
भविष्य निधि का यह पैसा आता तो संविदाकर्मियों के लिए है, लेकिन इसे ठेकेदार अपने परिचितों के खाते में डाल देते हैं। मतलब साफ है कि काम कोई और करता है और रिकॉर्ड में किसी अन्य का नाम दर्ज होता है। तत्कालीन डीएम शुभ्रा सक्सेना के समक्ष बिजली अफसर, ठेकेदार और यूनियन पदाधिकारियों के बीच समझौता हुआ था कि सभी कर्मियों को शासन से निर्धारित दर से भुगतान किया जाएगा।
विज्ञापन
पीएफ का पैसा भी कर्मियों के खाते में डाला जाएगा, लेकिन यह समझौता भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। अफसरों और ठेकेदारों के गठजोड़ के आगे डीएम के समक्ष हुआ समझौता नाकाफी रहा।
कर्मियों को बांट रहे फर्जी चेक
पावर कारपोरेशन के ठेकेदार कर्मचारियों को फर्जी चेक बांट रहे हैं। अंसारी रोड बिजलीघर पर तैनात संविदाकर्मी शशि कपूर ने अधीक्षण अभियंता से की शिकायत में बताया कि उसे फर्जी चेक दिया गया है। उसके पास बीमार पत्नी की दवाई तक के पैसे नहीं हैं।
ठेकेदार ने पिछले पांच माह से उसे वेतन नहीं दिया है। इस बार जो चेक दिया, वह फर्जी निकला। शिकायत की गई तो उसने चेक छीनकर वापस ले लिया और वहां से भगा दिया।
750 संविदाकर्मियों को हर माह करीब 1800 रुपये भविष्य निधि मिलती है। यह पैसा कर्मियों के खाते में नहीं, बल्कि ठेकेदारों के परिचितों के खाते में जाती है। डीएम के समक्ष हुए समझौते का भी आज तक पालन नहीं किया गया। जिले में हर माह करीब 14 लाख रुपये की रकम का बंदरबांट किया जा रहा है। - सुरेंद्र सिंह, सचिव संविदाकर्मी यूनियन
सभी ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कर्मियों को शासन की दर से भुगतान के साथ पीएफ भी उनके खाते में डाला जाए। इसकी मॉनीटरिंग के लिए अफसरों को निर्देश दिए गए हैं। संविदाकर्मियों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले की जांच कराई जाएगी - राकेश कुशवाहा, अधीक्षण अभियंता