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बिजली चोरी कराने में टेस्ट विभाग के अफसर भी शामिल!
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:21 AM IST
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बिजली चोरी कराने में टेस्ट विभाग के अफसर भी शामिल!
बुलंदशहर। पूर्व जिपं अध्यक्ष के पुत्र के दूध प्लांट में बिजली चोरी कराने में टेस्ट विभाग के अफसर भी शामिल थे। जानकारी के मुताबिक प्लांट में लगे मीटर की प्रतिमाह एमआरआई के लिए टीम जाती थी, लेकिन खानापूर्ति करके वापस लौट जाती थी। जिसके चलते समय रहते अफसरों के पास बिजली चोरी की रिपोर्ट नहीं पहुंच सकी। अब अफसर टेस्ट विभाग के अफसरों की भी भूमिका की जांच कर रहे हैं।
20 जुलाई को जटपुरा में पूर्व जिपं अध्यक्ष के पुत्र के दूध प्लांट मै. राजदीश फूड पर बिजली अफसरों ने छापा मारा था। जिसके बाद टीम ने प्लांट संचालक व उसके पिता के खिलाफ 252 केवीए बिजली चोरी तथा अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब अफसरों की जांच में नया खुलासा हुआ है। टेस्ट विभाग द्वारा मीटर की एमआरआई के लिए प्रतिमाह टीम भेजी जाती थी, लेकिन मीटर की रिपोर्ट प्रतिमाह सामान्य ही दर्शायी जा रही थी। सूत्रों के अनुसार मिलीभगत के चलते जानबूझकर एमआरआई रिपोर्ट को बदला जाता था, ताकि प्लांट में बिजली चोरी का खुलासा न किया जा सके। निगम के एसई एके सिंह ने बताया कि जांच में तथ्य सामने आए हैं। कुछ संदिग्ध अफसर-कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बुलंदशहर। पूर्व जिपं अध्यक्ष के पुत्र के दूध प्लांट में बिजली चोरी कराने में टेस्ट विभाग के अफसर भी शामिल थे। जानकारी के मुताबिक प्लांट में लगे मीटर की प्रतिमाह एमआरआई के लिए टीम जाती थी, लेकिन खानापूर्ति करके वापस लौट जाती थी। जिसके चलते समय रहते अफसरों के पास बिजली चोरी की रिपोर्ट नहीं पहुंच सकी। अब अफसर टेस्ट विभाग के अफसरों की भी भूमिका की जांच कर रहे हैं।
20 जुलाई को जटपुरा में पूर्व जिपं अध्यक्ष के पुत्र के दूध प्लांट मै. राजदीश फूड पर बिजली अफसरों ने छापा मारा था। जिसके बाद टीम ने प्लांट संचालक व उसके पिता के खिलाफ 252 केवीए बिजली चोरी तथा अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब अफसरों की जांच में नया खुलासा हुआ है। टेस्ट विभाग द्वारा मीटर की एमआरआई के लिए प्रतिमाह टीम भेजी जाती थी, लेकिन मीटर की रिपोर्ट प्रतिमाह सामान्य ही दर्शायी जा रही थी। सूत्रों के अनुसार मिलीभगत के चलते जानबूझकर एमआरआई रिपोर्ट को बदला जाता था, ताकि प्लांट में बिजली चोरी का खुलासा न किया जा सके। निगम के एसई एके सिंह ने बताया कि जांच में तथ्य सामने आए हैं। कुछ संदिग्ध अफसर-कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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