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बिबकोल में नहीं शुरू हो पाया कोवॉक्सिन का उत्पादन
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बिबकाल कंपनी।
- फोटो : BULANDSHAHR
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बिबकोल में नहीं शुरू हो पाया कोवॉक्सिन का उत्पादन
बुलंदशहर। चोला क्षेत्र स्थित बिबकोल कंपनी में कोविड से बचाव के लिए देशी टीका कोवॉक्सिन का उत्पादन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। टीका बनाने के लिए अभी तक लैब में मशीनरी और उपकरण नहीं पहुंच सके हैं। बताया जा रहा है कि जर्मनी और फ्रांस से उपकरण आने थे। वहां कोरोना के फिर से पैर पसारने के चलते सप्लाई नहीं हो पा रही है।
बिबकोल कंपनी की स्थापना वर्ष 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी। कंपनी को देश से पोलियो को खत्म करने के लिए बीसीजी वैक्सीन बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। अब तक कंपनी ने करीब 13 करोड़ डोज बनाई है। कोविड महामारी के बाद केंद्र सरकार ने बिबकोल को कोविड के खात्मे के लिए कोवाक्सिन बनाने की जिम्मेदारी दी थी। करीब 50 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया गया था। कंपनी की ओर से लैब निर्माण का कार्य शुरू करने के बाद मशीनरी के लिए ऑर्डर दिया गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी और फ्रांस से फिलिंग, वाशिंग, ड्रायर, लेवलिंग समेत अन्य प्रकार की मशीनरी व उपकरण की सप्लाई होनी थी।
फरवरी में दी जानी थी वैक्सीन की सप्लाई
पिछले दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कंपनी का निरीक्षण किया था। इस दौरान कंपनी प्रबंधन ने आश्वासन दिया था कि फरवरी में वैक्सीन की पहली खेप सप्लाई कर दी जाएगी, लेकिन वर्तमान में जो हालात है, उन्हें देखते हुए अभी वैक्सीन सप्लाई होने की उम्मीद कम दिख रही है।
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वैक्सीन निर्माण में प्रयोग होने वाली मशीनरी व उपकरण की सप्लाई जल्द से जल्द मिल सके इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। वैक्सीन का उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए उच्चाधिकारियों से लगातार वार्ता की जा रही है।
- सुनील कुमार शर्मा, एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट, बिबकोल
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बुलंदशहर। चोला क्षेत्र स्थित बिबकोल कंपनी में कोविड से बचाव के लिए देशी टीका कोवॉक्सिन का उत्पादन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। टीका बनाने के लिए अभी तक लैब में मशीनरी और उपकरण नहीं पहुंच सके हैं। बताया जा रहा है कि जर्मनी और फ्रांस से उपकरण आने थे। वहां कोरोना के फिर से पैर पसारने के चलते सप्लाई नहीं हो पा रही है।
बिबकोल कंपनी की स्थापना वर्ष 1989 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी। कंपनी को देश से पोलियो को खत्म करने के लिए बीसीजी वैक्सीन बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। अब तक कंपनी ने करीब 13 करोड़ डोज बनाई है। कोविड महामारी के बाद केंद्र सरकार ने बिबकोल को कोविड के खात्मे के लिए कोवाक्सिन बनाने की जिम्मेदारी दी थी। करीब 50 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया गया था। कंपनी की ओर से लैब निर्माण का कार्य शुरू करने के बाद मशीनरी के लिए ऑर्डर दिया गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी और फ्रांस से फिलिंग, वाशिंग, ड्रायर, लेवलिंग समेत अन्य प्रकार की मशीनरी व उपकरण की सप्लाई होनी थी।
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फरवरी में दी जानी थी वैक्सीन की सप्लाई
पिछले दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कंपनी का निरीक्षण किया था। इस दौरान कंपनी प्रबंधन ने आश्वासन दिया था कि फरवरी में वैक्सीन की पहली खेप सप्लाई कर दी जाएगी, लेकिन वर्तमान में जो हालात है, उन्हें देखते हुए अभी वैक्सीन सप्लाई होने की उम्मीद कम दिख रही है।
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वैक्सीन निर्माण में प्रयोग होने वाली मशीनरी व उपकरण की सप्लाई जल्द से जल्द मिल सके इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। वैक्सीन का उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए उच्चाधिकारियों से लगातार वार्ता की जा रही है।
- सुनील कुमार शर्मा, एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट, बिबकोल