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मॉक ड्रिल : सांस लेने में दिक्कत ...10 मिनट में ऑक्सीजन सपोर्ट
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मॉक ड्रिल : सांस लेने में दिक्कत ...10 मिनट में ऑक्सीजन सपोर्ट
बुलंदशहर। तीसरी लहर से निपटने को अस्पताल कितने तैयार हैं, इसका जायजा शुक्रवार को मॉक ड्रिल के माध्यम से लिया गया। जिले के पांच अस्पतालों में सुविधाओं को परखा गया। अचानक एक बच्चे को 11 बजे अस्पताल लाया गया। पल्स चेक करने पर ऑक्सीजन लेवल कम होने पर उसे दस मिनट के अंदर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। मौके पर मौजूद एडी हेल्थ ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और जल्द से जल्द खामियों को दूर प्लांट को संचालित करने के निर्देश दिए। जिले के पांचों कोविड अस्पतालों में चिकित्सकों ने मॉक ड्रिल के दौरान पल्स चेक कर ऑक्सीजन मास्क लगाकर भर्ती करने की प्रक्रिया पूर्ण की।
संसाधनों की हुई परख, लगाई गईं पांच-पांच टीमें
संभावित तीसरी लहर के संक्रमित मिलने पर आइसोलेशन, एचडीयू, वेंटिलेटर, एनआईसीयू और पीआईसीयू जांच परख की। वहीं, उपचार के दौरान चिकित्सकों को क्या-क्या एहतियात उठाने होंगे इस पर भी रिहर्सल किया गया। मॉक ड्रिल में जनपद के सभी अस्पतालों में पांच-पांच अस्पतालों की टीम लगी हुई थी। इस दौरान पास में रहने वाले बच्चों को भी मॉक ड्रिल में शामिल किया गया। सिकंदराबाद में संयुक्त चिकित्सालय में एसीएमओ डॉ. रोहताश यादव टीम के साथ मॉक ड्रिल में मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि करीब 11 बजे एक बच्चे को अस्पताल लाया गया। जो आते ही डॉक्टर ने उसका पल्स आदि चेक किया और सांस लेने में दिक्कत आने पर तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। इस दौरान कुल 10 मिलट का समय लगा।
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इन अस्पतालों में भी हुआ मॉक ड्रिल
खुर्जा स्थित जटिया चिकित्सालय में एडी हेल्थ डॉ. दीपक ओहरी द्वारा तैयारियों को परखा गया। डिबाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉ. आलोक भार्गव ने, शिकारपुर सीएचसी पर एडी हेल्थ और स्याना सीएचसी पर डॉ. रविंद्र कुमार ने तैयारियों को प्रशिक्षण के दौरान जांचा। कुछ स्थानों पर ऑक्सीजन प्लांट न लगने से खामियां मिलीं।
कुछ कमियां मिलीं हैं, उन्हें जल्द दूर किया जाएगा
बच्चों के लिए बनाए गए पांचों कोविड अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएं सही मिलीं। एक-दो केंद्रों पर खामियां मिलने पर सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। तीसरी लहर से निपटने को अस्पताल कितने तैयार हैं, इसका जायजा शुक्रवार को मॉक ड्रिल के माध्यम से लिया गया। जिले के पांच अस्पतालों में सुविधाओं को परखा गया। अचानक एक बच्चे को 11 बजे अस्पताल लाया गया। पल्स चेक करने पर ऑक्सीजन लेवल कम होने पर उसे दस मिनट के अंदर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। मौके पर मौजूद एडी हेल्थ ने ऑक्सीजन प्लांट लगाने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और जल्द से जल्द खामियों को दूर प्लांट को संचालित करने के निर्देश दिए। जिले के पांचों कोविड अस्पतालों में चिकित्सकों ने मॉक ड्रिल के दौरान पल्स चेक कर ऑक्सीजन मास्क लगाकर भर्ती करने की प्रक्रिया पूर्ण की।
संसाधनों की हुई परख, लगाई गईं पांच-पांच टीमें
संभावित तीसरी लहर के संक्रमित मिलने पर आइसोलेशन, एचडीयू, वेंटिलेटर, एनआईसीयू और पीआईसीयू जांच परख की। वहीं, उपचार के दौरान चिकित्सकों को क्या-क्या एहतियात उठाने होंगे इस पर भी रिहर्सल किया गया। मॉक ड्रिल में जनपद के सभी अस्पतालों में पांच-पांच अस्पतालों की टीम लगी हुई थी। इस दौरान पास में रहने वाले बच्चों को भी मॉक ड्रिल में शामिल किया गया। सिकंदराबाद में संयुक्त चिकित्सालय में एसीएमओ डॉ. रोहताश यादव टीम के साथ मॉक ड्रिल में मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि करीब 11 बजे एक बच्चे को अस्पताल लाया गया। जो आते ही डॉक्टर ने उसका पल्स आदि चेक किया और सांस लेने में दिक्कत आने पर तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। इस दौरान कुल 10 मिलट का समय लगा।
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इन अस्पतालों में भी हुआ मॉक ड्रिल
खुर्जा स्थित जटिया चिकित्सालय में एडी हेल्थ डॉ. दीपक ओहरी द्वारा तैयारियों को परखा गया। डिबाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉ. आलोक भार्गव ने, शिकारपुर सीएचसी पर एडी हेल्थ और स्याना सीएचसी पर डॉ. रविंद्र कुमार ने तैयारियों को प्रशिक्षण के दौरान जांचा। कुछ स्थानों पर ऑक्सीजन प्लांट न लगने से खामियां मिलीं।
कुछ कमियां मिलीं हैं, उन्हें जल्द दूर किया जाएगा
बच्चों के लिए बनाए गए पांचों कोविड अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएं सही मिलीं। एक-दो केंद्रों पर खामियां मिलने पर सुधार करने के निर्देश दिए हैं।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ