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बच्चे पूछते हैं मम्मी पापा कब आएंगे, कैसे बताऊं...
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बच्चे पूछते हैं मम्मी पापा कब आएंगे, कैसे बताऊं...
बुलंदशहर। कोरोना काल के दौरान दिवंगत शिक्षक परिवार अपनों को खोने का दर्द भुला नहीं पा रहे हैं। इसी तरह नगर के मोहल्ला शांति निकेतन निवासी दिवंगत शिक्षक के परिवार का हाल है। भरी आंखों से दिवंगत शिक्षक की पत्नी ने बताया कि बच्चे पूछते हैं कि मम्मी, पापा कब आएंगे, अब उन्हें कैसे बताऊं की अब वह कभी वापस नहीं आएंगे। बच्चे इतने छोटे हैं कि वह यह भी नहीं जानते की उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। वहीं, अब पति के चले जाने के बाद बच्चों की परवरिश की चिंता भी सताने लगी है।
नगर के मोहल्ला शांति निकेतन निवासी शिक्षक विनोद सिंह की 24 अप्रैल को मौत हुई थी। वह गांव चरौरा मुस्तफाबाद स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। पत्नी सीमा चौधरी ने बताया कि उन्होंने 11 अप्रैल को पंचायत चुनाव की ट्रेनिंग में भाग लिया था। वहां से लौटने के बाद उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई और काफी इलाज करवाने के बाद भी नहीं बच सके। उनकी मौत की खबर ने मुझे जीते-जी मार दिया और अब आठ वर्षीय बेटे सुशांत सिंह और तीन वर्षीय बेटे विराट सिंह के भविष्य की चिंता सता रही है। मेरे सिर पर अब सास-ससुर का ही साया रह गया है। एमए करने के बावजूद भी पति, बच्चों और सास-ससुर की सेवा करने का ठान लिया था। लेकिन ऐसा पता नहीं था कि पति विनोद सिंह खुशहाल जीवन के बीच छोड़कर चले जाएंगे। सीमा चौधरी ने बताया कि उनका अपना घर है, लेकिन चिंता यह सता रही है कि कैसे छोटे बच्चों को संभाल सकूंगी। वहीं, बुजुर्ग हो चुके सास-ससुर की जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर है। सीमा बताती है कि पति हमेशा कहा करते थे कि तुम एमए हो और नौकरी कर सकती हो, लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम सास-ससुर की सेवा करने के साथ बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई पर ध्यान दो, जिससे मैं दोनों बेटों को शिक्षक या अधिकारी बनाकर अपना सपना साकार कर सकूं। पति अपने सपने अपने साथ ले गए और अब उनका सपना कैसे पूरा होगा। अब तो सिर्फ मेरे पास पति की याद और बच्चों की परवरिश के साथ उनकी पढ़ाई और पति के सपने साकार करना ही रह गया है।
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बुलंदशहर। कोरोना काल के दौरान दिवंगत शिक्षक परिवार अपनों को खोने का दर्द भुला नहीं पा रहे हैं। इसी तरह नगर के मोहल्ला शांति निकेतन निवासी दिवंगत शिक्षक के परिवार का हाल है। भरी आंखों से दिवंगत शिक्षक की पत्नी ने बताया कि बच्चे पूछते हैं कि मम्मी, पापा कब आएंगे, अब उन्हें कैसे बताऊं की अब वह कभी वापस नहीं आएंगे। बच्चे इतने छोटे हैं कि वह यह भी नहीं जानते की उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। वहीं, अब पति के चले जाने के बाद बच्चों की परवरिश की चिंता भी सताने लगी है।
नगर के मोहल्ला शांति निकेतन निवासी शिक्षक विनोद सिंह की 24 अप्रैल को मौत हुई थी। वह गांव चरौरा मुस्तफाबाद स्थित प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। पत्नी सीमा चौधरी ने बताया कि उन्होंने 11 अप्रैल को पंचायत चुनाव की ट्रेनिंग में भाग लिया था। वहां से लौटने के बाद उनकी अचानक तबीयत खराब हो गई और काफी इलाज करवाने के बाद भी नहीं बच सके। उनकी मौत की खबर ने मुझे जीते-जी मार दिया और अब आठ वर्षीय बेटे सुशांत सिंह और तीन वर्षीय बेटे विराट सिंह के भविष्य की चिंता सता रही है। मेरे सिर पर अब सास-ससुर का ही साया रह गया है। एमए करने के बावजूद भी पति, बच्चों और सास-ससुर की सेवा करने का ठान लिया था। लेकिन ऐसा पता नहीं था कि पति विनोद सिंह खुशहाल जीवन के बीच छोड़कर चले जाएंगे। सीमा चौधरी ने बताया कि उनका अपना घर है, लेकिन चिंता यह सता रही है कि कैसे छोटे बच्चों को संभाल सकूंगी। वहीं, बुजुर्ग हो चुके सास-ससुर की जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर है। सीमा बताती है कि पति हमेशा कहा करते थे कि तुम एमए हो और नौकरी कर सकती हो, लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम सास-ससुर की सेवा करने के साथ बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई पर ध्यान दो, जिससे मैं दोनों बेटों को शिक्षक या अधिकारी बनाकर अपना सपना साकार कर सकूं। पति अपने सपने अपने साथ ले गए और अब उनका सपना कैसे पूरा होगा। अब तो सिर्फ मेरे पास पति की याद और बच्चों की परवरिश के साथ उनकी पढ़ाई और पति के सपने साकार करना ही रह गया है।
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