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छह माह में एक से 2500 के पार पहुंच गए संक्रमित
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औरंगाबाद में कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेते स्वास्थ्य कर्मचारी। फाइल फोटो।
- फोटो : BULANDSHAHR
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छह माह में 2700 के पार पहुंच गए संक्रमित
बुलंदशहर। जिले में 29 मार्च को पहला संक्रमित मिला था। इसके बाद संक्रमण की रफ्तार तेज होती चली गई। 24 अगस्त को कुल संक्रमित दो हजार से ज्यादा हो गए। मार्च के महीने में पहले संक्रमित युवक समेत परिवार के तीन ही संक्रमित थे। इसके बाद धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ता चला गया। मार्च में किसी भी संक्रमित की मृत्यु नहीं हुई थी, लेकिन 10 सितंबर तक 49 लोगों की मौत संक्रमण से हो चुकी है।
मार्च से 68 दिन तक चले लॉकडाउन में 127 मरीज मिले थे, 10 सितंबर तक कोरोना के मरीज 2700 के पार पहुंच चुके हैं। कुल जांच की बात करें तो अभी तक डेढ़ लाख के करीब नमूने लिए जा चुके हैं। लॉकडाउन के दौरान जिले में मई तक कोरोना संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज नहीं थी, जितनी अनलॉक-एक शुरू होने के बाद से अब तक रही है।
लॉकडाउन के आंकड़े
पहला लॉकडाउन - 21 दिन - 13 संक्रमित
दूसरा लॉकडाउन - 19 दिन - 44 संक्रमित
तीसरा लॉकडाउन - 14 दिन - 23 संक्रमित
चौथा लॉकडाउन - 14 दिन - 47 संक्रमित
अनलॉक-एक - 30 दिन - 480 संक्रमित
अनलॉक-दो - 31 दिन - 844 संक्रमित
अनलॉक-तीन - 31 दिन - 949 संक्रमित
अनलॉक-चार - 10 दिन - 410 संक्रमित
नोएडा-दिल्ली व अन्य राज्यों से आए लोग लाए संक्रमण
जिले में मिला पहला संक्रमित युवक नोएडा से संक्रमण लेकर आया था, जिसके बाद जिले में लॉकडाउन के दौरान आवाजाही रहने से प्रवासी मजदूर समेत नोएडा-दिल्ली से आने वाले लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती रही। अप्रैल में जहां जमातियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई तो वहीं, अस्पतालों के कर्मचारी, पुलिसकर्मी, व्यापारी, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और कई अफसर संक्रमित मिले।
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जिला कारागार में समय-समय पर मिले कोरोना पॉजिटिव
जिला कारागार में कोरोना काल शुरू होते ही कैदियों से परिजनों के मिलने पर पाबंदी लगा दी गई। लेकिन कारागार के कर्मियों का बाहरी क्षेत्र से आनाजाना लगे रहने और शुरू में बिना जांच के विचाराधीन बंदी को रखने से कोरोना संक्रमण मरीज मिले। इसके बाद प्रशासन द्वारा विचाराधीन बंदियों को अस्थाई जेल में रखने की व्यवस्था की गई, लेकिन इसके बाद भी जिला कारागार में कोरोना संक्रमित मिलने का सिलसिला जारी रहा।
कई अफसर भी हो चुके कोरोना का शिकार
अगस्त माह में सीएमओ कोरोना पॉजिटिव पाए गए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में चार एसीएमओ समेत कई अफसर पॉजिटिव पाए गए। वहीं, पुलिस विभाग में एसपी देहात और एसपी क्राइम समेत कई अन्य अधिकारियों में भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। हालांकि अब विभागों में सतर्कता बरतनी शुरू हो गई है। थर्मल स्क्रीनिंग और हाथों को सैनिटाइज करवाने के बाद ही कार्यालयों में प्रवेश दिया जा रहा है।
रिकवरी रेट में भी हुई बढ़ोतरी
कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन में जहां 127 में पुष्टि हुई। वहीं दो मरीजों की मौत और 83 लोग डिस्चार्ज होकर घर को लौटे। इसके बाद एक जून से शुरू हुए अनलॉक-एक के दौरान 480 में संक्रमण की पुष्टि हुई। जिसमें 18 की मौत और 353 लोग ठीक हुए। एक जुलाई से शुरू हुए अनलॉक-दो के दौरान 844 में संक्रमण की पुष्टि हुई। जिसमें 13 की मौत और 541 अब तक डिस्चार्ज किए गए। एक अगस्त से शुरू हुए अनलॉक-तीन में 949 लोगों में संक्रमण मिला। जिसमें 13 की मौत और 803 लोग डिस्चार्ज किए गए। वहीं, एक सितंबर से शुरू हुए अनलॉक-चार में 10 दिन में 410 से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं और 320 लोग डिस्चार्ज हो चुके हैं।
अनलॉक के दौरान कार्यालयों में बढ़ने लगी आवाजाही
लॉकडाउन के दौरान जहां अधिकांश कार्यालय बंद रखे गए और विभागीय अफसरों ने घर पर ही जरूरत के कार्य पूर्ण किए। अनलॉक-एक के दौरान 33 फीसदी कर्मियों को कार्य करने की छूट मिलने पर कार्यालयों में कर्मियों के साथ लोगों की आवाजाही शुरू हो गई। वहीं, अनलॉक-चार में अधिकांश विभागों में शत-प्रतिशत कर्मी काम पर बुलाए जा रहे हैं।
जांच-उपचार सुविधा बढ़ाई
देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आने पर जिले में बाहरी देशों से आने वालों को क्वारंटीन कर जांच के लिए सैंपल लेने शुरू कर दिए थे। अप्रैल में बाहरी राज्यों से लोगों की आवाजाही शुरू होने और कोरोना संक्रमण से मिलते-जुलते लक्षण वाले लोग मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा स्कूल/ कॉलेज को क्वारंटीन केंद्र बनाकर निगरानी की गई। हालांकि अन्य जिलों की अपेक्षा जनपद में कोरोना संक्रमण का ग्राफ कम है।
सोशल डिस्टेंस का नहीं हो रहा पालन
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शासन ने सोशल डिस्टेंस का पालन करने का निर्देश दिया था। साथ ही घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाने का नियम बनाकर मास्क न लगाने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा नाममात्र की कार्रवाई किए जाने से जिले जगह-जगह सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन होने लगा है और लोग बिना मास्क के घर से बाहर निकल रहे हैं।
जनपद में कोरोना संक्रमण को फैलने से बचाने के लिए टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाई गई है। लोगों में जहां कोरोना संक्रमण मिल रहा है। वहीं, तेजी से रिकवर भी हो रहे हैं। लोगों से अपील है कि कोरोना जांच कराने में विभाग की मदद करें और सुरक्षा संबंधी बचाव अपनाए।
डॉ. रोहताश यादव, एसीएमओ/नोडल अधिकारी
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बुलंदशहर। जिले में 29 मार्च को पहला संक्रमित मिला था। इसके बाद संक्रमण की रफ्तार तेज होती चली गई। 24 अगस्त को कुल संक्रमित दो हजार से ज्यादा हो गए। मार्च के महीने में पहले संक्रमित युवक समेत परिवार के तीन ही संक्रमित थे। इसके बाद धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ता चला गया। मार्च में किसी भी संक्रमित की मृत्यु नहीं हुई थी, लेकिन 10 सितंबर तक 49 लोगों की मौत संक्रमण से हो चुकी है।
मार्च से 68 दिन तक चले लॉकडाउन में 127 मरीज मिले थे, 10 सितंबर तक कोरोना के मरीज 2700 के पार पहुंच चुके हैं। कुल जांच की बात करें तो अभी तक डेढ़ लाख के करीब नमूने लिए जा चुके हैं। लॉकडाउन के दौरान जिले में मई तक कोरोना संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज नहीं थी, जितनी अनलॉक-एक शुरू होने के बाद से अब तक रही है।
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लॉकडाउन के आंकड़े
पहला लॉकडाउन - 21 दिन - 13 संक्रमित
दूसरा लॉकडाउन - 19 दिन - 44 संक्रमित
तीसरा लॉकडाउन - 14 दिन - 23 संक्रमित
चौथा लॉकडाउन - 14 दिन - 47 संक्रमित
अनलॉक-एक - 30 दिन - 480 संक्रमित
अनलॉक-दो - 31 दिन - 844 संक्रमित
अनलॉक-तीन - 31 दिन - 949 संक्रमित
अनलॉक-चार - 10 दिन - 410 संक्रमित
नोएडा-दिल्ली व अन्य राज्यों से आए लोग लाए संक्रमण
जिले में मिला पहला संक्रमित युवक नोएडा से संक्रमण लेकर आया था, जिसके बाद जिले में लॉकडाउन के दौरान आवाजाही रहने से प्रवासी मजदूर समेत नोएडा-दिल्ली से आने वाले लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होती रही। अप्रैल में जहां जमातियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई तो वहीं, अस्पतालों के कर्मचारी, पुलिसकर्मी, व्यापारी, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और कई अफसर संक्रमित मिले।
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जिला कारागार में समय-समय पर मिले कोरोना पॉजिटिव
जिला कारागार में कोरोना काल शुरू होते ही कैदियों से परिजनों के मिलने पर पाबंदी लगा दी गई। लेकिन कारागार के कर्मियों का बाहरी क्षेत्र से आनाजाना लगे रहने और शुरू में बिना जांच के विचाराधीन बंदी को रखने से कोरोना संक्रमण मरीज मिले। इसके बाद प्रशासन द्वारा विचाराधीन बंदियों को अस्थाई जेल में रखने की व्यवस्था की गई, लेकिन इसके बाद भी जिला कारागार में कोरोना संक्रमित मिलने का सिलसिला जारी रहा।
कई अफसर भी हो चुके कोरोना का शिकार
अगस्त माह में सीएमओ कोरोना पॉजिटिव पाए गए, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में चार एसीएमओ समेत कई अफसर पॉजिटिव पाए गए। वहीं, पुलिस विभाग में एसपी देहात और एसपी क्राइम समेत कई अन्य अधिकारियों में भी कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। हालांकि अब विभागों में सतर्कता बरतनी शुरू हो गई है। थर्मल स्क्रीनिंग और हाथों को सैनिटाइज करवाने के बाद ही कार्यालयों में प्रवेश दिया जा रहा है।
रिकवरी रेट में भी हुई बढ़ोतरी
कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन में जहां 127 में पुष्टि हुई। वहीं दो मरीजों की मौत और 83 लोग डिस्चार्ज होकर घर को लौटे। इसके बाद एक जून से शुरू हुए अनलॉक-एक के दौरान 480 में संक्रमण की पुष्टि हुई। जिसमें 18 की मौत और 353 लोग ठीक हुए। एक जुलाई से शुरू हुए अनलॉक-दो के दौरान 844 में संक्रमण की पुष्टि हुई। जिसमें 13 की मौत और 541 अब तक डिस्चार्ज किए गए। एक अगस्त से शुरू हुए अनलॉक-तीन में 949 लोगों में संक्रमण मिला। जिसमें 13 की मौत और 803 लोग डिस्चार्ज किए गए। वहीं, एक सितंबर से शुरू हुए अनलॉक-चार में 10 दिन में 410 से अधिक संक्रमित मिल चुके हैं और 320 लोग डिस्चार्ज हो चुके हैं।
अनलॉक के दौरान कार्यालयों में बढ़ने लगी आवाजाही
लॉकडाउन के दौरान जहां अधिकांश कार्यालय बंद रखे गए और विभागीय अफसरों ने घर पर ही जरूरत के कार्य पूर्ण किए। अनलॉक-एक के दौरान 33 फीसदी कर्मियों को कार्य करने की छूट मिलने पर कार्यालयों में कर्मियों के साथ लोगों की आवाजाही शुरू हो गई। वहीं, अनलॉक-चार में अधिकांश विभागों में शत-प्रतिशत कर्मी काम पर बुलाए जा रहे हैं।
जांच-उपचार सुविधा बढ़ाई
देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला सामने आने पर जिले में बाहरी देशों से आने वालों को क्वारंटीन कर जांच के लिए सैंपल लेने शुरू कर दिए थे। अप्रैल में बाहरी राज्यों से लोगों की आवाजाही शुरू होने और कोरोना संक्रमण से मिलते-जुलते लक्षण वाले लोग मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा स्कूल/ कॉलेज को क्वारंटीन केंद्र बनाकर निगरानी की गई। हालांकि अन्य जिलों की अपेक्षा जनपद में कोरोना संक्रमण का ग्राफ कम है।
सोशल डिस्टेंस का नहीं हो रहा पालन
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शासन ने सोशल डिस्टेंस का पालन करने का निर्देश दिया था। साथ ही घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाने का नियम बनाकर मास्क न लगाने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा नाममात्र की कार्रवाई किए जाने से जिले जगह-जगह सोशल डिस्टेंस का उल्लंघन होने लगा है और लोग बिना मास्क के घर से बाहर निकल रहे हैं।
जनपद में कोरोना संक्रमण को फैलने से बचाने के लिए टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाई गई है। लोगों में जहां कोरोना संक्रमण मिल रहा है। वहीं, तेजी से रिकवर भी हो रहे हैं। लोगों से अपील है कि कोरोना जांच कराने में विभाग की मदद करें और सुरक्षा संबंधी बचाव अपनाए।
डॉ. रोहताश यादव, एसीएमओ/नोडल अधिकारी