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गठबंधन बिगाड़ेगा कई टिकट दावेदारों का ‘सियासी गेम’
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sat, 07 Jan 2017 11:21 PM IST
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कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी विधानसभा चुनाव में अगर सपा, कांग्रेस और रालोद का गठबंधन हुआ तो सभी सीटों पर टिकट दावेदारों का खेल बिगड़ जाएगा। सभी सीटों पर प्रत्याशी कर चुकी सपा को गठबंधन होने की स्थिति में दो से तीन सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़नी पड़ सकती है। गठबंधन की चर्चाओं से दावेदारों में हलचल मची है।
भाजपा को रोकने के लिए अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा, कांग्रेस और रालोद के गठबंधन की चर्चा जोरों पर हैं। सपा सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। बुलंदशहर सदर से शुजात आलम, अनूपशहर से हिमायत अली, खुर्जा से रविंद्र वाल्मीकि, डिबाई से हरीश लोधी, शिकारपुर से राकेश शर्मा, स्याना से डॉ. राजीव लोधी और
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सिकंदराबाद से अब्दुल रब पार्टी के प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं। गठबंधन होने की स्थिति में सपा को कम से कम दो से तीन सीटें कांग्रेस और रालोद के लिए छोड़नी पड़ सकती हैं। 2012 विधानसभा चुनाव में सपा ने डिबाई और शिकारपुर सीट जीती थी तो कांग्रेस ने खुर्जा और स्याना।
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सपा के दोनों विधायक श्रीभगवान शर्मा और मुकेश शर्मा पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं, जबकि स्याना से कांग्रेस विधायक दिलनवाज खान अब बसपा के साथ हैं। दिलनवाज अब बसपा के टिकट पर स्याना से ताल ठोंक रहे हैं। गठबंधन होने पर कांग्रेस स्याना और खुर्जा सीट तो मांगेगी ही, साथ में सिकंदराबाद विधानसभा सीट पर भी अपना दावा ठोंक सकती है।
इसके अलावा यदि रालोद भी गठबंधन में शामिल हुई तो वह अनूपशहर, स्याना और शिकारपुर विधानसभा पर जाटों के निर्णायक वोट होने का हवाला देकर अपना दावा ठोकेंगी। अनूपशहर विधानसभा सीट पर सपा भी अपना दावा ठोकेंगी।
इसका कारण है कि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी हिमायत अली दूसरे नंबर पर रहे थे और बहुत कम वोटों से ही वह चुनाव हारे थे। गठबंधन की बिछ रही बिसात से तीनों पार्टियों के टिकट दावेदारों में हलचल है।
गठबंधन हुआ तो बिगड़ेगा समीकरण
सपा, रालोद, कांग्रेस का गठबंधन हुआ तो अन्य पार्टियों का समीकरण भी बिगड़ जाएगा। गठबंधन हुआ तो विधानसभा चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय हो जाएगा। गठबंधन होने पर रालोद, सपा और कांग्रेस का वोटबैंक बिखरेगा नहीं, जिसका सीधा फायदा गठबंधन प्रत्याशियों को मिलेगा। गठबंधन हुआ तो यादव, मुस्लिम, जाट और ब्राह्मण वोट इन प्रत्याशियों का भविष्य तय करेंगे।
भाजपा में टिकट के दावेदारों की लंबी लिस्ट
सातों विधानसभाओं में से कुछ पर भाजपा के टिकट दावेदारों की लंबी लिस्ट है। इसमें अनूपशहर और शिकारपुर में सबसे ज्यादा उम्मीदवार हैं। इसलिए पार्टी आलाकमान को मुश्किलें हो रही है। शायद यही कारण कि पार्टी अंदर खाने विरोध को रोकने के लिए भाजपा अपने प्रत्याशियों की लिस्ट नामांकन से महज एक या दो दिन पहले जारी करेगी।