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भ्रष्टाचार के आरोप में सात ग्राम सचिव निलंबित
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भ्रष्टाचार के आरोप में सात ग्राम सचिव निलंबित
बुलंदशहर। गांवों के विकास के लिए मिली राशि में हेरफेर का मामला उजागर हुआ है। इसकी जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सात ग्राम सचिवों को भ्रष्टाचार के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि इन सभी ग्राम सचिवों ने एक कंपनी के नाम 4.89 लाख रुपये की राशि का भुगतान कर गोलमाल कर लिया।
जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार एक शिकायत मिलने पर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिले के सात ग्राम सचिव भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए। अगौता ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत सलैमगढ़, रसीदपुर और रसूलपुर तेलिया में तैनात सचिव राजीव कुमार पर आरोप है कि गांव के विकास के लिए मिली 50 हजार की राशि का गोलमाल कर दिया। ग्राम पंचायत सैदपुरा, जीवंत, जौठ, अढ़ौली, आलमगीरपुर, नैनसुख, चरौरा मुस्तफाबाद, सराय छबीला व पौथ में तैनात ग्राम सचिव कपिल कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 3.65 लाख रुपये की हेराफेरी की है। ब्लॉक जहांगीराबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत सूरजपुर टीकरी, बादशाहपुर तालाब व श्यौरामपुर में तैनात सचिव गौरव भाल पर 30,500 रुपये का हेरफेर करने का आरोप है। इसी तरह मुल्लानी, व बामनपुर तालुका में तैनात सचिव गौरव कुमार पर 29 हजार रुपये, ग्राम पंचायत सिहाली झायां पर तैनात सचिव रोहित ढाका पर चार हजार रुपये, पाली परतापुर में तैनात ग्राम सचिव अमित मलिक पर दो हजार और ग्राम पंचायत बांसुरी व टिटौटा में तैनात ग्राम सचिव अजीम खां पर 8500 रुपये की राशि का हेरफेर करने का आरोप है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन सभी ग्राम सचिवों ने एसजे इंटरप्राइजेज नामक कंपनी को इस राशि का भुगतान किया है। जबकि इस कंपनी से विभाग का न तो किसी तरह का कोई करार है और न ही कोई सामान आदि खरीदा गया है।
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जांच में ये थे शामिल
शिकायत मिलने के बाद सीडीओ अभिषेक पांडेय ने जिला ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग के परियोजना निदेशक विनय कुमार श्रीवास्तव, जिला विकास अधिकारी सुभाष नेमा और जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ. प्रीतम सिंह को जांच सौंपी थी।
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पूरी जांच के बाद ही सातों ग्राम सचिवों को निलंबित किया गया है। आगामी जांच भी शुरू हो गई है। - डॉ. प्रीतम सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी
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बुलंदशहर। गांवों के विकास के लिए मिली राशि में हेरफेर का मामला उजागर हुआ है। इसकी जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सात ग्राम सचिवों को भ्रष्टाचार के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि इन सभी ग्राम सचिवों ने एक कंपनी के नाम 4.89 लाख रुपये की राशि का भुगतान कर गोलमाल कर लिया।
जिला पंचायत राज अधिकारी के अनुसार एक शिकायत मिलने पर जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिले के सात ग्राम सचिव भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए। अगौता ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत सलैमगढ़, रसीदपुर और रसूलपुर तेलिया में तैनात सचिव राजीव कुमार पर आरोप है कि गांव के विकास के लिए मिली 50 हजार की राशि का गोलमाल कर दिया। ग्राम पंचायत सैदपुरा, जीवंत, जौठ, अढ़ौली, आलमगीरपुर, नैनसुख, चरौरा मुस्तफाबाद, सराय छबीला व पौथ में तैनात ग्राम सचिव कपिल कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 3.65 लाख रुपये की हेराफेरी की है। ब्लॉक जहांगीराबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत सूरजपुर टीकरी, बादशाहपुर तालाब व श्यौरामपुर में तैनात सचिव गौरव भाल पर 30,500 रुपये का हेरफेर करने का आरोप है। इसी तरह मुल्लानी, व बामनपुर तालुका में तैनात सचिव गौरव कुमार पर 29 हजार रुपये, ग्राम पंचायत सिहाली झायां पर तैनात सचिव रोहित ढाका पर चार हजार रुपये, पाली परतापुर में तैनात ग्राम सचिव अमित मलिक पर दो हजार और ग्राम पंचायत बांसुरी व टिटौटा में तैनात ग्राम सचिव अजीम खां पर 8500 रुपये की राशि का हेरफेर करने का आरोप है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन सभी ग्राम सचिवों ने एसजे इंटरप्राइजेज नामक कंपनी को इस राशि का भुगतान किया है। जबकि इस कंपनी से विभाग का न तो किसी तरह का कोई करार है और न ही कोई सामान आदि खरीदा गया है।
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जांच में ये थे शामिल
शिकायत मिलने के बाद सीडीओ अभिषेक पांडेय ने जिला ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग के परियोजना निदेशक विनय कुमार श्रीवास्तव, जिला विकास अधिकारी सुभाष नेमा और जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ. प्रीतम सिंह को जांच सौंपी थी।
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पूरी जांच के बाद ही सातों ग्राम सचिवों को निलंबित किया गया है। आगामी जांच भी शुरू हो गई है। - डॉ. प्रीतम सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी