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टीका लगने के बाद कम हुआ संक्रमण का असर
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टीका लगने के बाद कम हुआ संक्रमण का असर
बुलंदशहर। कोरोना से बचाव के लिए चल रहा टीकाकरण लोगों की सुरक्षा करने के साथ उन्हें अन्य बीमारियों से बचाने में भी मदद कर रहा है। पहली लहर के दौरान एकांत साधन जहां उपचार था तो दूसरी लहर से पूर्व टीका आने पर इससे राहत मिलनी शुरू हुई। हालांकि कोविड काल के दौरान नियमित टीकाकरण का कार्य प्रभावित रहा। जिसके लिए विभाग द्वारा समय-समय पर अभियान चला मरीज खोजकर टीका लगाए गए।
वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण की पहली लहर शुरू हुई तो सब कुछ थम गया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह संक्रमण कैसे लोगों को अपना शिकार बना रहा है और इससे बचने के लिए क्या करें। बाद में समय-समय पर गाइड लाइन जारी कर इससे बचाव किया गया। वहीं, पहली लहर थमने के बाद सभी ने सोचा कि अब दूसरी लहर नहीं आएगी। लेकिन विदेशों में दूसरी लहर आने पर देश में इससे बचाव के लिए वैक्सीन बनाई गई, जो जनवरी 2021 से लोगों को लगनी शुरू हो गई। अब तक जिले में 29 लाख लोगों को पहला टीका लगाया जा चुका है। इसमें काफी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल रहे जो पूर्व में अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे। अधिकांश को कोरोना से बचाव का टीका लगने पर जहां राहत मिली तो अधिकांश की बीमारियां भी कम हो गई। हालांकि कुछ लोग टीका लगने के बाद संक्रमण की चपेट में भी आए। लेकिन उनके लिए यह स्थिति अधिक गंभीर नहीं रही।
टीका लगने से संक्रमण का फैलाव हुआ कम
दूसरी लहर के दौरान लोग ऑक्सीजन की कमी से जूझे। कुछ ऐसे भी लोग रहे जिनकी टीका लगने के बाद मौत भी हो गई। हालांकि अन्य लोगों में संक्रमण का असर कम रहा। धीरे-धीरे अन्य आयु वर्ग के लोगों में टीका लगने पर उन्हें भी काफी राहत महसूस हुई। दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर से भी अधिक खतरा बताया गया। लेकिन 18 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाए जाने पर जिले में संक्रमण का अधिक फैलाव नहीं हो सका। तीसरी लहर के दौरान जिले में 6365 लोग संक्रमित मिले। इनमें 10 लोगों की मौत हो गई तो शेष स्वस्थ हो चुके है।
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घर-घर अभियान चलाकर खोजे गए नियमित टीकाकरण से छूटे पात्र
कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के दौरान संक्रमित के उपचार के चलते और संक्रमण से बचाव को लेकर सबसे अधिक फर्क नियमित टीकाकरण पर भी पड़ा। दो वर्ष में जहां एक-एक वर्ष बाद पोलियो की खुराक दी गई तो नियमित टीकाकरण से छूटे पात्रों को खोजने के लिए विभाग को घर-घर खोजो अभियान चलाना पड़ा। इस दौरान बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री महिलाएं खोज उन्हें टीका लगवाया गया।
बोले लोग =
स्वास्थ्य बिगड़ने को लेकर था संदेह
टीका लगवाने से शुरू में डर लगा कि कही टीका लगने से स्वास्थ्य न बिगड़ जाए। लेकिन कोरोना का आक्रामक रूप देखकर बचाव के लिए टीका लगवाया। इससे संक्रमण से बचाव के साथ अन्य बीमारियों से भी राहत मिली है।
- रोहित अग्रवाल
अपनी बारी आने पर लगवाया टीका
पहली लहर के बाद जब देश द्वारा टीका बनाया गया तो खुशी हुई कि अब देश संक्रमण से बच जाएगा। लेकिन शुरुआत में 60 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगना शुरू हुआ। अपनी बारी आने पर टीका लगवाया।
- नरेश मित्तल
कोट =
कोरोना से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई। हालांकि नियमित टीकाकरण से वंचित बच्चे और गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर टीका लगाया गया। पल्स पोलियो की खुराक भी दी गई। टीकाकरण से संक्रमण से बचाव की एक मात्र साधन है। इसके चलते तीसरी लहर का असर कम रहा।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। कोरोना से बचाव के लिए चल रहा टीकाकरण लोगों की सुरक्षा करने के साथ उन्हें अन्य बीमारियों से बचाने में भी मदद कर रहा है। पहली लहर के दौरान एकांत साधन जहां उपचार था तो दूसरी लहर से पूर्व टीका आने पर इससे राहत मिलनी शुरू हुई। हालांकि कोविड काल के दौरान नियमित टीकाकरण का कार्य प्रभावित रहा। जिसके लिए विभाग द्वारा समय-समय पर अभियान चला मरीज खोजकर टीका लगाए गए।
वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण की पहली लहर शुरू हुई तो सब कुछ थम गया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह संक्रमण कैसे लोगों को अपना शिकार बना रहा है और इससे बचने के लिए क्या करें। बाद में समय-समय पर गाइड लाइन जारी कर इससे बचाव किया गया। वहीं, पहली लहर थमने के बाद सभी ने सोचा कि अब दूसरी लहर नहीं आएगी। लेकिन विदेशों में दूसरी लहर आने पर देश में इससे बचाव के लिए वैक्सीन बनाई गई, जो जनवरी 2021 से लोगों को लगनी शुरू हो गई। अब तक जिले में 29 लाख लोगों को पहला टीका लगाया जा चुका है। इसमें काफी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल रहे जो पूर्व में अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे। अधिकांश को कोरोना से बचाव का टीका लगने पर जहां राहत मिली तो अधिकांश की बीमारियां भी कम हो गई। हालांकि कुछ लोग टीका लगने के बाद संक्रमण की चपेट में भी आए। लेकिन उनके लिए यह स्थिति अधिक गंभीर नहीं रही।
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टीका लगने से संक्रमण का फैलाव हुआ कम
दूसरी लहर के दौरान लोग ऑक्सीजन की कमी से जूझे। कुछ ऐसे भी लोग रहे जिनकी टीका लगने के बाद मौत भी हो गई। हालांकि अन्य लोगों में संक्रमण का असर कम रहा। धीरे-धीरे अन्य आयु वर्ग के लोगों में टीका लगने पर उन्हें भी काफी राहत महसूस हुई। दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर से भी अधिक खतरा बताया गया। लेकिन 18 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाए जाने पर जिले में संक्रमण का अधिक फैलाव नहीं हो सका। तीसरी लहर के दौरान जिले में 6365 लोग संक्रमित मिले। इनमें 10 लोगों की मौत हो गई तो शेष स्वस्थ हो चुके है।
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घर-घर अभियान चलाकर खोजे गए नियमित टीकाकरण से छूटे पात्र
कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर के दौरान संक्रमित के उपचार के चलते और संक्रमण से बचाव को लेकर सबसे अधिक फर्क नियमित टीकाकरण पर भी पड़ा। दो वर्ष में जहां एक-एक वर्ष बाद पोलियो की खुराक दी गई तो नियमित टीकाकरण से छूटे पात्रों को खोजने के लिए विभाग को घर-घर खोजो अभियान चलाना पड़ा। इस दौरान बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री महिलाएं खोज उन्हें टीका लगवाया गया।
बोले लोग =
स्वास्थ्य बिगड़ने को लेकर था संदेह
टीका लगवाने से शुरू में डर लगा कि कही टीका लगने से स्वास्थ्य न बिगड़ जाए। लेकिन कोरोना का आक्रामक रूप देखकर बचाव के लिए टीका लगवाया। इससे संक्रमण से बचाव के साथ अन्य बीमारियों से भी राहत मिली है।
- रोहित अग्रवाल
अपनी बारी आने पर लगवाया टीका
पहली लहर के बाद जब देश द्वारा टीका बनाया गया तो खुशी हुई कि अब देश संक्रमण से बच जाएगा। लेकिन शुरुआत में 60 से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगना शुरू हुआ। अपनी बारी आने पर टीका लगवाया।
- नरेश मित्तल
कोट =
कोरोना से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई। हालांकि नियमित टीकाकरण से वंचित बच्चे और गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर टीका लगाया गया। पल्स पोलियो की खुराक भी दी गई। टीकाकरण से संक्रमण से बचाव की एक मात्र साधन है। इसके चलते तीसरी लहर का असर कम रहा।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ