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लक्की देवी हत्याकांड के दोषी पति को आजीवन कारावास
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लक्की देवी हत्याकांड के दोषी पति को आजीवन कारावास
बुलंदशहर। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 के न्यायालय ने खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव लखावटी में विवाहिता लक्की देवी की हत्या में पति प्रवेश कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 24 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2015 को खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव लखावटी में विवाहिता लक्की देवी की फंदा डालकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में पति प्रवेश निवासी गांव लखावटी को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 के न्यायालय में हुई। एसएसपी के निर्देश पर उक्त घटना को जिलास्तर पर घटित जघन्य अपराधों की श्रेणी में रखते हुए मॉनीटरिंग सेल के माध्यम से न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई।
यह गवाह हुए पेश
मृतका के पिता शीशपाल, मायके का पड़ोसी सतीश शर्मा, डा. सचिन कुमार, एसडीएम आनंद श्रीनेत्र, प्रारंभिक विवेचक रामजीलाल निरंजन, अग्रिम विवेचक आरपी सिंह, महिला कांस्टेबल रोशिला और नेपाल सिंह की गवाही के आधार और साक्ष्यों का अवलोकन कर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर कोर्ट नपे पति प्रवेश को दोषी माना।
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बुलंदशहर। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 के न्यायालय ने खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव लखावटी में विवाहिता लक्की देवी की हत्या में पति प्रवेश कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 24 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 2015 को खुर्जा देहात क्षेत्र के गांव लखावटी में विवाहिता लक्की देवी की फंदा डालकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में पति प्रवेश निवासी गांव लखावटी को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 के न्यायालय में हुई। एसएसपी के निर्देश पर उक्त घटना को जिलास्तर पर घटित जघन्य अपराधों की श्रेणी में रखते हुए मॉनीटरिंग सेल के माध्यम से न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई।
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यह गवाह हुए पेश
मृतका के पिता शीशपाल, मायके का पड़ोसी सतीश शर्मा, डा. सचिन कुमार, एसडीएम आनंद श्रीनेत्र, प्रारंभिक विवेचक रामजीलाल निरंजन, अग्रिम विवेचक आरपी सिंह, महिला कांस्टेबल रोशिला और नेपाल सिंह की गवाही के आधार और साक्ष्यों का अवलोकन कर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर कोर्ट नपे पति प्रवेश को दोषी माना।
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