{"_id":"61044e7b8ebc3e5f0e06101f","slug":"bulandshahr-news-bulandshahr-news-gbd223242781","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईएएस, डॉक्टर तो कोई बनना चाहता है सफल बिजनेसमैन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईएएस, डॉक्टर तो कोई बनना चाहता है सफल बिजनेसमैन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो समाचार =
आईएएस, डॉक्टर तो कोई बनना चाहता है सफल बिजनेसमैन
संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। सीबीएसई 12वीं कक्षा में अव्वल सभी सात विद्यार्थियों ने भविष्य को लेकर सपने संजोए हैं, कोई आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर, एडवोकेट तो कोई बिजनेसमैन बनना चाहता है। इसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि माता-माता और गुरुजनों के मार्गदर्शन में अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। 12वीं में सफलता हासिल करने के बाद अव्वल आए मेधावियों के परिवार में खुशी का माहौल है।
अक्षति का आईएएस बनने का है सपना
डीपीएस स्कूल की छात्रा अक्षति का सपना आईएएस बनने का है। वह खुर्जा नगर की रहने वाली हैं और उनके पिता डॉ. भूपेंद्र सिंह और माता डॉ. शुचिता पंवार प्राध्यापक हैं। इस समय वे बाल कल्याण समिति के सदस्य भी हैं। अक्षति का कहना है कि मेरा बचपन से ही सपना आईएएस बनने का रहा है, जिसे पूरा कर अपने माता-पिता का नाम रोशन करूंगी।
विशाखा भी बनना चाहती है आईएएस अधिकारी
छात्रा विशाखा सिंघल भी आईएएस बनना चाहती हैं। वह कस्बा गुलावठी की निवासी हैं। उसके पिता संजीव सिंघल बिजनेसमैन हैं और माता कनिका सिंघल गृहणि हैं। विशाखा का कहना है कि मैं आईएसए अधिकारी बनकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं।
विज्ञापन
डॉक्टर बनकर मरीजों की करूंगी सेवा
छात्रा हर्षिता गढ़ मुक्तेश्वर की रहने वाली हैं। उसके पिता संजीव मावी शिक्षक हैं और माता पुष्पा देवी गृहणि हैं। हर्षिता का कहना है कि मेरा सपना है कि मैं डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा कर सकूं। इसके लिए मेरी तैयारी जारी है। रिजल्ट आने के बाद उत्साह में और वृद्धि हुई है। मेरी सफलता का श्रेय माता पिता के साथ ही गुरूजनों को भी जाता है।
इंजीनियर बनने का संजोया है सपना
नगर के लल्ला बाबू चौराहे के नजदीक रहने वाली छात्रा कीर्ति भारद्वाज इंजीनियर बनने का सपना संजोये हुए हैं। उसका कहना है कि मेरा यह सपना बचपन का है और इसे पूरा करना ही मेरा लक्ष्य है। कीर्ति के पिता प्रदीप कुमार बिजनेसमैन हैं और माता रितु गृहणि हैं।
एडवोकेट बनकर महिलाओं को दिलाऊंगी न्याय
छात्रा भव्या अग्रवाल का कहना है कि मैं एडवोकेट बनकर गरीबों और महिलाओं को न्याय दिलाऊंगी। उसका कहना है कि मुझे जो नंबर मिले हैं उसकी उम्मीद नहीं थी। भव्या नगर के मोहल्ला साठा स्थित देवी मंदिर के पास रहती हैं। उसके पिता सुशील कुमार बिजनेसमैन हैं और माता मीनू अग्रवाल गृहणि हैं।
सफल बिजनेसमैन बनना चाहते हैं पर्व बंसल
छात्र पर्व बंसल नगर के अंसारी रोड का रहने वाले हैं। उसके पिता बिजनेसमैन हैं और माता भावेश बंसल गृहणि हैं। पर्व का कहना है कि मेरे पिता बिजनेसमैन हैं। मेरी सपना सफल बिजनेसमैन बनने का है, इसके लिए तैयारी कर रहा हूं, आगे की पढ़ाई भी जारी रखूंगा।
आईएएस बनकर देश सेवा करने का है लक्ष्य
सिकंदराबाद क्षेत्र में संचालित विद्याज्ञान स्कूल की छात्रा अनसुईया आईएएस बनना चाहती हैं। वह मूलत: जिला महोबा की रहने वाली हैं। उसके तीन भाई और तीन बहने हैं। अनसुईया ने बताया कि तीन बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि तीन भाई और मैं अभी पढ़ाई कर रहे हैं। पिता लक्ष्मी प्रसाद छोटे किसान हैं और मां रति बाई गृहणि हैं। जब मैंने विद्याज्ञान स्कूल में प्रवेश के लिए परीक्षा दी थी, तभी से ठान लिया था कि मैं आईएएस बनकर देश सेवा और अपने परिवार का नाम रोशन करूंगी। इस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत जारी है।
विज्ञापन
आईएएस, डॉक्टर तो कोई बनना चाहता है सफल बिजनेसमैन
संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। सीबीएसई 12वीं कक्षा में अव्वल सभी सात विद्यार्थियों ने भविष्य को लेकर सपने संजोए हैं, कोई आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर, एडवोकेट तो कोई बिजनेसमैन बनना चाहता है। इसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि माता-माता और गुरुजनों के मार्गदर्शन में अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं। 12वीं में सफलता हासिल करने के बाद अव्वल आए मेधावियों के परिवार में खुशी का माहौल है।
अक्षति का आईएएस बनने का है सपना
डीपीएस स्कूल की छात्रा अक्षति का सपना आईएएस बनने का है। वह खुर्जा नगर की रहने वाली हैं और उनके पिता डॉ. भूपेंद्र सिंह और माता डॉ. शुचिता पंवार प्राध्यापक हैं। इस समय वे बाल कल्याण समिति के सदस्य भी हैं। अक्षति का कहना है कि मेरा बचपन से ही सपना आईएएस बनने का रहा है, जिसे पूरा कर अपने माता-पिता का नाम रोशन करूंगी।
विज्ञापन
विशाखा भी बनना चाहती है आईएएस अधिकारी
छात्रा विशाखा सिंघल भी आईएएस बनना चाहती हैं। वह कस्बा गुलावठी की निवासी हैं। उसके पिता संजीव सिंघल बिजनेसमैन हैं और माता कनिका सिंघल गृहणि हैं। विशाखा का कहना है कि मैं आईएसए अधिकारी बनकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हूं।
विज्ञापन
डॉक्टर बनकर मरीजों की करूंगी सेवा
छात्रा हर्षिता गढ़ मुक्तेश्वर की रहने वाली हैं। उसके पिता संजीव मावी शिक्षक हैं और माता पुष्पा देवी गृहणि हैं। हर्षिता का कहना है कि मेरा सपना है कि मैं डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा कर सकूं। इसके लिए मेरी तैयारी जारी है। रिजल्ट आने के बाद उत्साह में और वृद्धि हुई है। मेरी सफलता का श्रेय माता पिता के साथ ही गुरूजनों को भी जाता है।
इंजीनियर बनने का संजोया है सपना
नगर के लल्ला बाबू चौराहे के नजदीक रहने वाली छात्रा कीर्ति भारद्वाज इंजीनियर बनने का सपना संजोये हुए हैं। उसका कहना है कि मेरा यह सपना बचपन का है और इसे पूरा करना ही मेरा लक्ष्य है। कीर्ति के पिता प्रदीप कुमार बिजनेसमैन हैं और माता रितु गृहणि हैं।
एडवोकेट बनकर महिलाओं को दिलाऊंगी न्याय
छात्रा भव्या अग्रवाल का कहना है कि मैं एडवोकेट बनकर गरीबों और महिलाओं को न्याय दिलाऊंगी। उसका कहना है कि मुझे जो नंबर मिले हैं उसकी उम्मीद नहीं थी। भव्या नगर के मोहल्ला साठा स्थित देवी मंदिर के पास रहती हैं। उसके पिता सुशील कुमार बिजनेसमैन हैं और माता मीनू अग्रवाल गृहणि हैं।
सफल बिजनेसमैन बनना चाहते हैं पर्व बंसल
छात्र पर्व बंसल नगर के अंसारी रोड का रहने वाले हैं। उसके पिता बिजनेसमैन हैं और माता भावेश बंसल गृहणि हैं। पर्व का कहना है कि मेरे पिता बिजनेसमैन हैं। मेरी सपना सफल बिजनेसमैन बनने का है, इसके लिए तैयारी कर रहा हूं, आगे की पढ़ाई भी जारी रखूंगा।
आईएएस बनकर देश सेवा करने का है लक्ष्य
सिकंदराबाद क्षेत्र में संचालित विद्याज्ञान स्कूल की छात्रा अनसुईया आईएएस बनना चाहती हैं। वह मूलत: जिला महोबा की रहने वाली हैं। उसके तीन भाई और तीन बहने हैं। अनसुईया ने बताया कि तीन बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि तीन भाई और मैं अभी पढ़ाई कर रहे हैं। पिता लक्ष्मी प्रसाद छोटे किसान हैं और मां रति बाई गृहणि हैं। जब मैंने विद्याज्ञान स्कूल में प्रवेश के लिए परीक्षा दी थी, तभी से ठान लिया था कि मैं आईएएस बनकर देश सेवा और अपने परिवार का नाम रोशन करूंगी। इस सपने को पूरा करने के लिए मेहनत जारी है।