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बुलंदशहर में ग्लैंडर फारसी : खच्चर की फिर आई पॉजिटिव रिपोर्ट
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बुलंदशहर में ग्लैंडर फारसी : खच्चर की फिर आई पॉजिटिव रिपोर्ट
बुलंदशहर। अश्व में पाई जाने वाली खतरनाक ग्लैंडर फारसी बीमारी ने जनपद में दस्तक दे दी है। हिसार लैब से पूर्व में एक घोड़ी और एक खच्चर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। विभागीय अधिकारियों ने इनमें इस बीमारी के लक्षण न होने की बात कही थी। साथ ही उनके सैंपल लेकर दोबारा जांच के लिए भेजे गए थे। अब इन सैंपल की रिपोर्ट लैब से प्राप्त हो गई है। इसके अनुसार खच्चर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जबकि घोड़ी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। पशु पालन विभाग अब फिर से खच्चर का सैंपल जांच को भेजा जाएगा। अफसरों का दावा है कि खच्चर में अभी भी ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
ग्लैंडर्स-फारसी बीमारी गधे-घोड़ों से मनुष्य में बड़ी तेजी से फैलती है। ऐसे में पशुपालन विभाग इस बीमारी को लेकर पूरी तरह से अलर्ट रहता है। गत माह पशुपालन विभाग ने लखावटी ब्लॉक के गांव शेखपुर गढ़वा से एक पशुपालक के एक खच्चर और एक घोड़ी का सैंपल जांच को भेज गया था। लैब से दोनों पशुओं की रिपोर्ट विभाग को पॉजिटिव रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसके बाद विभाग ने फिर से दोनों के सैंपल भेजे थे, जिसमें अब खच्चर की रिपोर्ट फिर से ग्लैंडर्स फारसी पॉजिटिव और घोड़ी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। फिर से रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने गांव में पहुंचकर खच्चर के शरीर की जांच की है, लेकिन शरीर पर ग्लैंडर्स फारसी के कोई लक्षण नहीं हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि फिर से खच्चर की रिपोर्ट हिसार लैब भेजी जाएगी और वहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकेगा। बताया कि ग्लैंडर्स फारसी में घोड़े या खच्चर को बुखार, नाक से स्त्राव होना, शरीर पर फोड़े-फुंसी और उसमें कमजोरी आ जाती है। लेकिन खच्चर में ऐसे कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अफसरों का यह भी कहना है कि कभी कभी लैब से रिपोर्ट गलत आ जाती है। काफी सैंपलों की जांच वहां प्रतिदिन होती है। ऐसे में अब फिर सैंपल भेजा जाएगा और फिर वहां से जो रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर कार्यवाही होगी। बता दें कि ग्लैंडर्स फारसी की पुष्टि होने के बाद पशुओं को सीधा मौत के घाट उतारा जाता है, और उसके स्वामी को आर्थिक सहायता दी जाती है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह का कहना है कि हरियाणा के जनपद हिसार स्थित लैब से खच्चर की रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव प्राप्त हुई है। घोड़ी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। खच्चर का सैंपल लेकर फिर एक बार प्रयोगशाला के लिए भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद फिर आगे की कार्रवाई होगी। इस समय खच्चर में ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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बुलंदशहर। अश्व में पाई जाने वाली खतरनाक ग्लैंडर फारसी बीमारी ने जनपद में दस्तक दे दी है। हिसार लैब से पूर्व में एक घोड़ी और एक खच्चर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। विभागीय अधिकारियों ने इनमें इस बीमारी के लक्षण न होने की बात कही थी। साथ ही उनके सैंपल लेकर दोबारा जांच के लिए भेजे गए थे। अब इन सैंपल की रिपोर्ट लैब से प्राप्त हो गई है। इसके अनुसार खच्चर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जबकि घोड़ी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। पशु पालन विभाग अब फिर से खच्चर का सैंपल जांच को भेजा जाएगा। अफसरों का दावा है कि खच्चर में अभी भी ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
ग्लैंडर्स-फारसी बीमारी गधे-घोड़ों से मनुष्य में बड़ी तेजी से फैलती है। ऐसे में पशुपालन विभाग इस बीमारी को लेकर पूरी तरह से अलर्ट रहता है। गत माह पशुपालन विभाग ने लखावटी ब्लॉक के गांव शेखपुर गढ़वा से एक पशुपालक के एक खच्चर और एक घोड़ी का सैंपल जांच को भेज गया था। लैब से दोनों पशुओं की रिपोर्ट विभाग को पॉजिटिव रिपोर्ट प्राप्त हुई है। इसके बाद विभाग ने फिर से दोनों के सैंपल भेजे थे, जिसमें अब खच्चर की रिपोर्ट फिर से ग्लैंडर्स फारसी पॉजिटिव और घोड़ी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। फिर से रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने गांव में पहुंचकर खच्चर के शरीर की जांच की है, लेकिन शरीर पर ग्लैंडर्स फारसी के कोई लक्षण नहीं हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि फिर से खच्चर की रिपोर्ट हिसार लैब भेजी जाएगी और वहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकेगा। बताया कि ग्लैंडर्स फारसी में घोड़े या खच्चर को बुखार, नाक से स्त्राव होना, शरीर पर फोड़े-फुंसी और उसमें कमजोरी आ जाती है। लेकिन खच्चर में ऐसे कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अफसरों का यह भी कहना है कि कभी कभी लैब से रिपोर्ट गलत आ जाती है। काफी सैंपलों की जांच वहां प्रतिदिन होती है। ऐसे में अब फिर सैंपल भेजा जाएगा और फिर वहां से जो रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर कार्यवाही होगी। बता दें कि ग्लैंडर्स फारसी की पुष्टि होने के बाद पशुओं को सीधा मौत के घाट उतारा जाता है, और उसके स्वामी को आर्थिक सहायता दी जाती है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह का कहना है कि हरियाणा के जनपद हिसार स्थित लैब से खच्चर की रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव प्राप्त हुई है। घोड़ी की रिपोर्ट निगेटिव आई है। खच्चर का सैंपल लेकर फिर एक बार प्रयोगशाला के लिए भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद फिर आगे की कार्रवाई होगी। इस समय खच्चर में ग्लैंडर्स फारसी के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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