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Bulandshahar News: गमगीन माहौल में पिता और बच्चे को किया सुपुर्द-ए-खाक
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पहासू के गांव पठान टोला में मृतक दिलशाद के घर के बाहर मौजूद लोग। संवाद
पहासू। अहमदगढ़ थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में पठान टोला मोहल्ला निवासी दिलशाद (32) और उनके छह साल के बेटे जयान की मौत हो गई थी। शुक्रवार दोपहर को बाप-बेटे को गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। वहीं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पहासू के पठान टोला नई बस्ती मोहल्ला निवासी इब्राहिम ने बताया कि उनके भाई दिलशाद (32) बृहस्पतिवार को बच्चों को बुखार की दवा दिलवाने के लिए बाइक से डिबाई जा रहे थे। जब वह अहमदगढ़ थाना क्षेत्र के मुमरेजपुर गांव के पास पहुंचे तभी टैंकर ने बाइक में टक्कर मार दी थी। हादसे में दिलशाद व उनके छह साल के बेटे जयान की मौत हो गई थी।
वहीं, दिलशाद की पत्नी साबरा व दो बेटियां घायल हो गईं थी। बृहस्पतिवार रात को पोस्टमॉर्टम जांच के बाद शव मोहल्ले में पहुंचे, मृत बाप-बेटे को देख परिजन बिलख उठे। शुक्रवार को जैसे ही दोनों शवों को कब्रिस्तान ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई दिलशाद की पत्नी साबरा दहाड़ मार कर रोते-रोते बेहोश हो गई।
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बड़ी बेटी माहीन अपने पापा के शव को टकटकी लगाए देख गुमसुम बैठी नजर आईं। वहीं, दिलशाद की छह माह की बेटी परिवार की महिलाओं की गोद में बैठी थी, जिसको कुछ नहीं पता। जो पिता रोजाना उसको बाहर लेकर घूमते और गोद में खिलाते थे, वह अब दोबारा नहीं आएंगे। दोपहर को गमगीन माहौल में दोनों शवों को मुस्लिम रीति-रिवाज से सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
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पहासू के पठान टोला नई बस्ती मोहल्ला निवासी इब्राहिम ने बताया कि उनके भाई दिलशाद (32) बृहस्पतिवार को बच्चों को बुखार की दवा दिलवाने के लिए बाइक से डिबाई जा रहे थे। जब वह अहमदगढ़ थाना क्षेत्र के मुमरेजपुर गांव के पास पहुंचे तभी टैंकर ने बाइक में टक्कर मार दी थी। हादसे में दिलशाद व उनके छह साल के बेटे जयान की मौत हो गई थी।
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वहीं, दिलशाद की पत्नी साबरा व दो बेटियां घायल हो गईं थी। बृहस्पतिवार रात को पोस्टमॉर्टम जांच के बाद शव मोहल्ले में पहुंचे, मृत बाप-बेटे को देख परिजन बिलख उठे। शुक्रवार को जैसे ही दोनों शवों को कब्रिस्तान ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई दिलशाद की पत्नी साबरा दहाड़ मार कर रोते-रोते बेहोश हो गई।
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बड़ी बेटी माहीन अपने पापा के शव को टकटकी लगाए देख गुमसुम बैठी नजर आईं। वहीं, दिलशाद की छह माह की बेटी परिवार की महिलाओं की गोद में बैठी थी, जिसको कुछ नहीं पता। जो पिता रोजाना उसको बाहर लेकर घूमते और गोद में खिलाते थे, वह अब दोबारा नहीं आएंगे। दोपहर को गमगीन माहौल में दोनों शवों को मुस्लिम रीति-रिवाज से सुपुर्द-ए-खाक किया गया।