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किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही फूलों की फसल
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डिबाई क्षेत्र के एक गांव में हो रही गेंदा की फसल।
- फोटो : BULANDSHAHR
किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही फूलों की फसल
बुलंदशहर। किसानों के लिए फूलों की खेती फायदे का सौदा साबित हो रही है। वह एक बीघा में 15 से 20 हजार का मुनाफा ले रहे हैं। डिबाई क्षेत्र में हो रही खेती का किसान लगातार रकबा बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा जनपद में अन्य क्षेत्र में भी किसान फूलों की खेती कर अच्छी आमदनी पा रहे हैं।
शादी-विवाह हो या फिर कोई कार्यक्रम, फूलों की सबसे ज्यादा मांग रहती है। डिबाई क्षेत्र में इस समय बड़े पैमाने पर फूलों की खेती की जा रही है। इसके अलावा सिकंदराबाद, स्याना, बुलंदशहर, खुर्जा, जहांगीराबाद और शिकारपुर आदि क्षेत्रों में भी फूलों की खेती की जा रही है। अधिकतर किसान अपने फूल को दिल्ली के साथ गाजियाबाद, नोएडा आदि बड़े शहरों में ही बेचना पसंद करते हैं। यहां पर फूलों के दाम भी अधिक मिल जाते हैं। डिबाई क्षेत्र में फूलों की खेती कर रहे किसान त्रिलोकपुर निवासी जवाहर लाल राजपूत, ऋषिपाल सिंह, मोहनलाल और बालिस्टर सिंह आदि ने बताया कि हम पिछले कई साल से फूलों की खेती कर रहे हैं। वह सबसे अधिक गेंदा के फूल की खेती करते हैं। फूल की खेती करने पर एक तो लागत कम आती है और आमदनी अधिक होती है। इस क्षेत्र में फूलों की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। किसान फूल की खेती कर 15 से 20 हजार रुपये प्रति बीघा मुनाफा ले रहे हैं। अच्छी आमदनी को देखते हुए किसान लगातार फूलों की खेती का रकबा भी बढ़ा रहे हैं।
इनसेट =
सरकार कर रही फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित
उद्यान विभाग की ओर से भी फूलों की खेती करने पर प्रोत्साहन के रूप में किसानों को कई सरकारी योजनाओं से भी लाभान्वित किया जाता है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. धीरेंद्र सिंह का कहना है कि फूलों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौंदा है। इस खेती करने से जहां लागत कम आती है तो किसानों की आमदनी भी अधिक होती है। जनपद में जहां-जहां फूलों की खेती हो रही है। विभाग की ओर से उन किसानों से समय-समय पर संपर्क कर उन्हें कई तरह की जानकारी भी दी जाती है।
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लॉकडाउन में किसानों को उठाना पड़ा था नुकसान - कोरोना काल के चलते लॉकडाउन के दौरान फूल की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। उस समय फूल की मांग नहीं होने के कारण खेत में ही सूख गया था। इससे किसानों को काफी नुकसान भी हुआ था। लेकिन अब इस समय फूल की खेती करने वाले किसान लॉकडाउन में हुए नुकसान से भी निजात पाने लगे हैं। गांव त्रिलोकपुर के किसान जवाहर लाल राजपूत ने बताया कि लॉकडाउन के समय तो ऐसा लग रहा था कि अब तो फूलों की खेती नहीं करेंगे। लेकिन अब एक बार फिर फूलों की मांग बढ़ने से यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है।
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बुलंदशहर। किसानों के लिए फूलों की खेती फायदे का सौदा साबित हो रही है। वह एक बीघा में 15 से 20 हजार का मुनाफा ले रहे हैं। डिबाई क्षेत्र में हो रही खेती का किसान लगातार रकबा बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा जनपद में अन्य क्षेत्र में भी किसान फूलों की खेती कर अच्छी आमदनी पा रहे हैं।
शादी-विवाह हो या फिर कोई कार्यक्रम, फूलों की सबसे ज्यादा मांग रहती है। डिबाई क्षेत्र में इस समय बड़े पैमाने पर फूलों की खेती की जा रही है। इसके अलावा सिकंदराबाद, स्याना, बुलंदशहर, खुर्जा, जहांगीराबाद और शिकारपुर आदि क्षेत्रों में भी फूलों की खेती की जा रही है। अधिकतर किसान अपने फूल को दिल्ली के साथ गाजियाबाद, नोएडा आदि बड़े शहरों में ही बेचना पसंद करते हैं। यहां पर फूलों के दाम भी अधिक मिल जाते हैं। डिबाई क्षेत्र में फूलों की खेती कर रहे किसान त्रिलोकपुर निवासी जवाहर लाल राजपूत, ऋषिपाल सिंह, मोहनलाल और बालिस्टर सिंह आदि ने बताया कि हम पिछले कई साल से फूलों की खेती कर रहे हैं। वह सबसे अधिक गेंदा के फूल की खेती करते हैं। फूल की खेती करने पर एक तो लागत कम आती है और आमदनी अधिक होती है। इस क्षेत्र में फूलों की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। किसान फूल की खेती कर 15 से 20 हजार रुपये प्रति बीघा मुनाफा ले रहे हैं। अच्छी आमदनी को देखते हुए किसान लगातार फूलों की खेती का रकबा भी बढ़ा रहे हैं।
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इनसेट =
सरकार कर रही फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित
उद्यान विभाग की ओर से भी फूलों की खेती करने पर प्रोत्साहन के रूप में किसानों को कई सरकारी योजनाओं से भी लाभान्वित किया जाता है। जिला उद्यान अधिकारी डॉ. धीरेंद्र सिंह का कहना है कि फूलों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौंदा है। इस खेती करने से जहां लागत कम आती है तो किसानों की आमदनी भी अधिक होती है। जनपद में जहां-जहां फूलों की खेती हो रही है। विभाग की ओर से उन किसानों से समय-समय पर संपर्क कर उन्हें कई तरह की जानकारी भी दी जाती है।
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लॉकडाउन में किसानों को उठाना पड़ा था नुकसान - कोरोना काल के चलते लॉकडाउन के दौरान फूल की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। उस समय फूल की मांग नहीं होने के कारण खेत में ही सूख गया था। इससे किसानों को काफी नुकसान भी हुआ था। लेकिन अब इस समय फूल की खेती करने वाले किसान लॉकडाउन में हुए नुकसान से भी निजात पाने लगे हैं। गांव त्रिलोकपुर के किसान जवाहर लाल राजपूत ने बताया कि लॉकडाउन के समय तो ऐसा लग रहा था कि अब तो फूलों की खेती नहीं करेंगे। लेकिन अब एक बार फिर फूलों की मांग बढ़ने से यह फसल किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है।