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यूपी : अब जेल में ‘मन की बात’ नहीं, होगी ‘बंदी परेड’
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amar ujala
- फोटो : amar ujala
यूपी : अब जेल में ‘मन की बात’ नहीं, होगी ‘बंदी परेड’
बुलंदशहर। जिला कारागार में होने वाले मन की बात कार्यक्रम पर अब विराम लग चुका है। इस कार्यक्रम ने अब बंदी परेड का रूप ले लिया है। प्रत्येक सोमवार को कारागार अधिकारी प्रत्येक बैरक में जाकर बंदी-कैदियों की समस्याएं सुन रहे हैं और उनका समाधान कर रहे हैं।
करीब दो वर्ष पहले जिला कारागार प्रशासन ने कैदियों और बंदियों को तनावमुक्त रखने के लिए एक पहल की थी। इसमें प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को जेल के प्रशासनिक अधिकारी बंदी-कैदियों के मन की बात जानते थे। उनकी समस्याएं सुनी जाती थीं और समाधान भी किया जाता था। इस दिन को कारागार अधिकारियों ने समस्या निवारण दिवस का भी नाम दिया था। जिला कारागार अधिकारियों ने अब इस पहल पर विराम लगा दिया है। अब इसके स्थान पर जिला कारागार में बंदी परेड कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक सोमवार को सभी कारागार अधिकारी प्रत्येक बैरक में मौजूद बंदी-कैदियों की समस्याओं को सुनते हैं और निवारण करते हैं।
माह के प्रत्येक सोमवार को बंदी परेड का आयोजन किया जाता है। इसमें उनकी समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की पुरजोर कोशिश की जाती है। पूर्व में जिला कारागार प्रशासन ने मन की बात कार्यक्रम का आयोजन किया था, लेकिन उस कार्यक्रम के दौरान माह में केवल एक दिन ही उनकी समस्या सुनी जाती थी। इस कारण बंदी परेड का आयोजन किया जा रहा है। - ओपी कटियार, जेल अधीक्षक
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बुलंदशहर। जिला कारागार में होने वाले मन की बात कार्यक्रम पर अब विराम लग चुका है। इस कार्यक्रम ने अब बंदी परेड का रूप ले लिया है। प्रत्येक सोमवार को कारागार अधिकारी प्रत्येक बैरक में जाकर बंदी-कैदियों की समस्याएं सुन रहे हैं और उनका समाधान कर रहे हैं।
करीब दो वर्ष पहले जिला कारागार प्रशासन ने कैदियों और बंदियों को तनावमुक्त रखने के लिए एक पहल की थी। इसमें प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को जेल के प्रशासनिक अधिकारी बंदी-कैदियों के मन की बात जानते थे। उनकी समस्याएं सुनी जाती थीं और समाधान भी किया जाता था। इस दिन को कारागार अधिकारियों ने समस्या निवारण दिवस का भी नाम दिया था। जिला कारागार अधिकारियों ने अब इस पहल पर विराम लगा दिया है। अब इसके स्थान पर जिला कारागार में बंदी परेड कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक सोमवार को सभी कारागार अधिकारी प्रत्येक बैरक में मौजूद बंदी-कैदियों की समस्याओं को सुनते हैं और निवारण करते हैं।
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माह के प्रत्येक सोमवार को बंदी परेड का आयोजन किया जाता है। इसमें उनकी समस्याओं को सुनकर उनके समाधान की पुरजोर कोशिश की जाती है। पूर्व में जिला कारागार प्रशासन ने मन की बात कार्यक्रम का आयोजन किया था, लेकिन उस कार्यक्रम के दौरान माह में केवल एक दिन ही उनकी समस्या सुनी जाती थी। इस कारण बंदी परेड का आयोजन किया जा रहा है। - ओपी कटियार, जेल अधीक्षक
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