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लगातार बढ़ रहा शहर का प्रदूषण स्तर
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लगातार बढ़ रहा शहर का प्रदूषण स्तर
बुलंदशहर। शहर में दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा चुका है। डाक्टरों की मानें तो इस दौरान स्वांस के रोगियों और बच्चों पर काफी ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है। एक्यूआई में फेरबदल के चलते मौसम भी बार-बार रंगत बदल रहा है। विगत दिवस एक्यूआई 187 था, जो बुधवार को बढ़कर 276 पर पहुंच गया।
बढ़ते प्रदूषण स्तर से श्वांस के रोगियों को परेशानी होने लगी है। भले ही कृषि विभाग की ओर से किसानों को पराली न जलाने की चेतावनी देने के साथ जुर्माना लगाने के आदेश जारी कर दिए हों, लेकिन जिले में अभी भी धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। वहीं, दूसरी ओर नगर के साथ जनपद में जगह-जगह कूड़े के ढेरों में आग लगने से उठने वाला धुआं भी पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि जनपद में एक्यूआई लगातार बढ़ता जा रहा है और बुधवार को बढ़कर 276 पर पहुंच गया। जो काफी हद तक खतरनाक माना जा रहा है।
सेटेलाइट से पराली जलाने पर रखी जा रही है नजर
कृषि विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि अब जक जनपद में छह स्थानों पर धान की पराली जलाने के मामले ट्रेस कर लिए हैं। जबकि दिल्ली से सेटेलाइट से भी पराली जलाने पर नजर रखी जा रही है। वहां से चार किसानों द्वारा पराली जलाने की शिकायत मिली थी। इन सभी पर जुर्माना लगाया गया है। साथ ही अब जो पराली जलाने वाले छह मामले ट्रेस किए गए हैं, उन पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया चल रही है। पराली जलाने पर किसानों पर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। कृषि अधिकारियों ने किसानों से धान की पराली को जलाने की बजाय खेत में ही नष्ट कर खाद बनाने का आह्वान किया है।
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नहीं रुक रहा कूड़े में आग लगाने का सिलसिला
नगर में ही नहीं, बल्कि जनपद भर में कूड़े में आग लगाने का सिलसिला जारी है। इस पर संबंधित अधिकारी चेतावनी देने तक ही सीमित हैं। जबकि अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। बुधवार को अनूपशहर रोड पर कूड़े में आग लगने के मामले ने संबंधित अफसरों की लापरवाही को उजागर करने का काम किया। यदि इस तरह से जगह-जगह लगने वाली आग पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे पर्यावरण तो दूषित होगा ही। साथ ही आने वाले समय में इसके भयावह परिणाम सामने आने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
कोट
किसानों द्वारा धान की पराली में आग लगाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। साथ ही पराली को आग लगाने वाले किसानों को ट्रेस कर उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है। नगर सहित जनपद में जगह-जगह कूड़े-कचरे में लगने वाली आग को रोकने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को पहल करनी होगी। ताकि लगातार बिगड़ रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। - अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी, बुलंदशहर।
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बुलंदशहर। शहर में दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा चुका है। डाक्टरों की मानें तो इस दौरान स्वांस के रोगियों और बच्चों पर काफी ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है। एक्यूआई में फेरबदल के चलते मौसम भी बार-बार रंगत बदल रहा है। विगत दिवस एक्यूआई 187 था, जो बुधवार को बढ़कर 276 पर पहुंच गया।
बढ़ते प्रदूषण स्तर से श्वांस के रोगियों को परेशानी होने लगी है। भले ही कृषि विभाग की ओर से किसानों को पराली न जलाने की चेतावनी देने के साथ जुर्माना लगाने के आदेश जारी कर दिए हों, लेकिन जिले में अभी भी धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। वहीं, दूसरी ओर नगर के साथ जनपद में जगह-जगह कूड़े के ढेरों में आग लगने से उठने वाला धुआं भी पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि जनपद में एक्यूआई लगातार बढ़ता जा रहा है और बुधवार को बढ़कर 276 पर पहुंच गया। जो काफी हद तक खतरनाक माना जा रहा है।
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सेटेलाइट से पराली जलाने पर रखी जा रही है नजर
कृषि विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि अब जक जनपद में छह स्थानों पर धान की पराली जलाने के मामले ट्रेस कर लिए हैं। जबकि दिल्ली से सेटेलाइट से भी पराली जलाने पर नजर रखी जा रही है। वहां से चार किसानों द्वारा पराली जलाने की शिकायत मिली थी। इन सभी पर जुर्माना लगाया गया है। साथ ही अब जो पराली जलाने वाले छह मामले ट्रेस किए गए हैं, उन पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया चल रही है। पराली जलाने पर किसानों पर 15 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। कृषि अधिकारियों ने किसानों से धान की पराली को जलाने की बजाय खेत में ही नष्ट कर खाद बनाने का आह्वान किया है।
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नहीं रुक रहा कूड़े में आग लगाने का सिलसिला
नगर में ही नहीं, बल्कि जनपद भर में कूड़े में आग लगाने का सिलसिला जारी है। इस पर संबंधित अधिकारी चेतावनी देने तक ही सीमित हैं। जबकि अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। बुधवार को अनूपशहर रोड पर कूड़े में आग लगने के मामले ने संबंधित अफसरों की लापरवाही को उजागर करने का काम किया। यदि इस तरह से जगह-जगह लगने वाली आग पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे पर्यावरण तो दूषित होगा ही। साथ ही आने वाले समय में इसके भयावह परिणाम सामने आने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
कोट
किसानों द्वारा धान की पराली में आग लगाने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। साथ ही पराली को आग लगाने वाले किसानों को ट्रेस कर उन पर जुर्माना लगाया जा रहा है। नगर सहित जनपद में जगह-जगह कूड़े-कचरे में लगने वाली आग को रोकने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को पहल करनी होगी। ताकि लगातार बिगड़ रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके। - अश्विनी कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी, बुलंदशहर।