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12 सितंबर के दिन गुलावठी क्षेत्र के 9 देशभक्तों ने देश के लिए दी अपनी शहादत
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गुलावठी में स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों की स्मृति में बना शहीद स्तम्भ।
- फोटो : BULANDSHAHR
12 सितंबर के दिन गुलावठी क्षेत्र के 9 देशभक्तों ने देश के लिए दी अपनी शहादत
गुलावठी। सन् 1930 में जब देश की आजादी के लिए आंदोलन चरम पर था। 12 सितंबर के दिन गुलावठी क्षेत्र के 9 देशभक्तों ने भी देश के लिए अपनी शहादत दी। उस दिन इन देशभक्तों के खून से धरती लाल हो गई थी।
पुलिस की गोलियों से 9 देशभक्त शहीद हुए। जिनमें भगवान सिंह, भरत सिंह, मुन्नालाल, छुट्टन लाल, कन्हैयालाल, चंदूलाल, जहारिया, श्रीराम एवं नवल सिंह शामिल हैं। देश की आजादी के बाद इन शहीदों की याद में सन् 1948 में शहीद स्मारक की स्थापना की गई। समय-समय पर शहीद स्मारक का सुंदरीकरण कराया जाता रहा है। अब नगरपालिका द्वारा करीब 12 लाख रुपये की लागत से शहीद स्मारक का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। जिसके तहत शहीद स्मारक का मुख्य द्वार एवं शहीद स्तंभ के चारों ओर उद्यान एवं फव्वारा आदि शामिल हैं।
गुलावठी का शहीद स्मारक गुलावठी की गौरगाथा तथा इस क्षेत्र के लोगों की देशभक्ति की पहचान बना हुआ है। 12 सितंबर 1930 को स्थानीय प्राचीन बड़ा महादेव मंदिर परिसर में अग्रेजी शासन के विरुद्ध सभा की गई थी। जिला प्रशासन द्वारा उस सभा को रोकने के लिए सभी हथकंडे अपनाए गए थे। घोड़े पर सवार तत्कालीन थानेदार ने सभा में भीड़ पर घोड़ा चढ़ा दिया था। जिससे सभा में भगदड़ मच गई तथा कई लोग घायल हो गए। पुलिस की इस करतूत से लोगों में रोष फैल गया। स्थानीय शहीद तिराहे पर पुलिस और देशभक्तों में संघर्ष हुआ। ग्राम भटौना निवासी भगवान सिंह की लाठी के प्रहार से थानेदार की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने लोगों पर कहर ढाना शुरू किया। बेरहमी से लाठियां व गोलियां बरसाई। जिसमें भगवान सिंह समेत 9 देशभक्त शहीद हो गए। पुलिस ने 400 लोगों को गिरफ्तार किया। इन्हीं शहीदों की याद में हर वर्ष शहीद दिवस मनाया जाता है। इतिहास में इन शहीदों की गाथा गुलावठी कांड के नाम से दर्ज है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी बाबू बनारसीदास एवं मगनलाल अग्रवाल का भी देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्पवूर्ण योगदान रहा। शहीद स्मारक के सौन्दर्यीकरण में नगरपालिका परिषद के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर जगवीर सिंह, चौ.वेदराम सिंह नागर, पूर्व सांसद सुरेंद सिंह नागर, शिक्षाविद् बलवंत सिंह शर्मा एवं कांतिप्रसाद गोयल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डीएन इंटर कॉलेज में इन शहीदों के वंशजों को सम्मानित किया जाता है।
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गुलावठी। सन् 1930 में जब देश की आजादी के लिए आंदोलन चरम पर था। 12 सितंबर के दिन गुलावठी क्षेत्र के 9 देशभक्तों ने भी देश के लिए अपनी शहादत दी। उस दिन इन देशभक्तों के खून से धरती लाल हो गई थी।
पुलिस की गोलियों से 9 देशभक्त शहीद हुए। जिनमें भगवान सिंह, भरत सिंह, मुन्नालाल, छुट्टन लाल, कन्हैयालाल, चंदूलाल, जहारिया, श्रीराम एवं नवल सिंह शामिल हैं। देश की आजादी के बाद इन शहीदों की याद में सन् 1948 में शहीद स्मारक की स्थापना की गई। समय-समय पर शहीद स्मारक का सुंदरीकरण कराया जाता रहा है। अब नगरपालिका द्वारा करीब 12 लाख रुपये की लागत से शहीद स्मारक का सुंदरीकरण कराया जा रहा है। जिसके तहत शहीद स्मारक का मुख्य द्वार एवं शहीद स्तंभ के चारों ओर उद्यान एवं फव्वारा आदि शामिल हैं।
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गुलावठी का शहीद स्मारक गुलावठी की गौरगाथा तथा इस क्षेत्र के लोगों की देशभक्ति की पहचान बना हुआ है। 12 सितंबर 1930 को स्थानीय प्राचीन बड़ा महादेव मंदिर परिसर में अग्रेजी शासन के विरुद्ध सभा की गई थी। जिला प्रशासन द्वारा उस सभा को रोकने के लिए सभी हथकंडे अपनाए गए थे। घोड़े पर सवार तत्कालीन थानेदार ने सभा में भीड़ पर घोड़ा चढ़ा दिया था। जिससे सभा में भगदड़ मच गई तथा कई लोग घायल हो गए। पुलिस की इस करतूत से लोगों में रोष फैल गया। स्थानीय शहीद तिराहे पर पुलिस और देशभक्तों में संघर्ष हुआ। ग्राम भटौना निवासी भगवान सिंह की लाठी के प्रहार से थानेदार की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने लोगों पर कहर ढाना शुरू किया। बेरहमी से लाठियां व गोलियां बरसाई। जिसमें भगवान सिंह समेत 9 देशभक्त शहीद हो गए। पुलिस ने 400 लोगों को गिरफ्तार किया। इन्हीं शहीदों की याद में हर वर्ष शहीद दिवस मनाया जाता है। इतिहास में इन शहीदों की गाथा गुलावठी कांड के नाम से दर्ज है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी बाबू बनारसीदास एवं मगनलाल अग्रवाल का भी देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्पवूर्ण योगदान रहा। शहीद स्मारक के सौन्दर्यीकरण में नगरपालिका परिषद के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर जगवीर सिंह, चौ.वेदराम सिंह नागर, पूर्व सांसद सुरेंद सिंह नागर, शिक्षाविद् बलवंत सिंह शर्मा एवं कांतिप्रसाद गोयल का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डीएन इंटर कॉलेज में इन शहीदों के वंशजों को सम्मानित किया जाता है।
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