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महंगाई की मार : अब कीटनाशक और खाद के दाम भी बढ़े
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महंगाई की मार : अब कीटनाशक और खाद के दाम भी बढ़े
बुलंदशहर। महंगाई की मार से कृषि क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा। डीजल के दाम में वृद्धि होने से पहले से ही खेत की जोताई महंगी होने पर किसान परेशान हैं, अब कीटनाशक और खाद के दाम भी बढ़ गए। इसके कारण खेती की लागत भी बढ़ गई है। इससे किसान चिंतित हैं।
किसानों के अनुसार खाद और कीटनाशक के दाम 150 से 200 रुपये तक की वृद्धि हुई है। जो कीटनाशक पहले 650 रुपये में मिल रहा था, वही अब 800 से 850 रुपये प्रति लीटर हो गया है। करीब 300 रुपये प्रति लीटर मिलने वाली घास को नष्ट करने वाली दवा का दाम अब 600 रुपये से अधिक है। पोटाश पोटाश पहले 900 रुपये प्रति 50 किलोग्राम की बोरी मिलती थी, अब 1800 रुपये प्रति बोरी हो गया है। किसानों का कहना है कि कृषि में काम आने वाले कीटनाशक और उर्वरक खरीदना महंगा हो गया है। इनके दाम में वृद्धि से खेती की लागत बढ़ गई है। इससे किसानों की आमदनी पर असर पड़ेगा। फसल का उचित दाम नहीं मिलने से लागत निकालना भी मुश्किल है।
150 रुपये बढ़े डीएपी के दाम, पहले था 1200 रुपये प्रति कट्टा
खेत के लिए जरूरी डीएपी के दाम में भी 150 रुपये प्रति बोरी की वृद्धि की गई है। पहले डीएपी का प्रति कट्टा 1200 रुपये में मिलता था, अब बढ़कर 1350 रुपये प्रति कट्टा हो गया है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के नेता मांगे राम त्यागी और भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार का किसानों की ओर ध्यान नहीं है।
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बोले किसान
खेती करना इतना महंगा हो गया है कि फसल की लागत भी नहीं निकल पा रही है। इस ओर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। किसानों की दो गुनी आय की बात करने वाली सरकार अब महंगाई को लेकर चुप्पी साध रही है। - प्रमोद कुमार
महंगाई से खेती भी अछूती नहीं रही। कीटनाशक और उर्वरक के दाम बढ़ गए, लेकिन फसलों का समर्थन मूल्य किसानों को नहीं मिल रहा। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। - धीरज शर्मा
खेती के लिए उर्वरक और कीटनाशक जरूरी हैं। यह भी महंगे होने के कारण किसान इस चिंता हैं कि वह फसल से इसकी कैसे भरपाई कर पाएगा। इस महंगाई से सरकार को राहत दिलानी चाहिए। - संजीव कुमार
अब समझ में नहीं आता है कि किस तरह से खेती होगी। सरकार का किसानों के लिए राहत देने का काम करने की ओर ध्यान देने की जरूरत है। - सोनू तेवतिया
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बुलंदशहर। महंगाई की मार से कृषि क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा। डीजल के दाम में वृद्धि होने से पहले से ही खेत की जोताई महंगी होने पर किसान परेशान हैं, अब कीटनाशक और खाद के दाम भी बढ़ गए। इसके कारण खेती की लागत भी बढ़ गई है। इससे किसान चिंतित हैं।
किसानों के अनुसार खाद और कीटनाशक के दाम 150 से 200 रुपये तक की वृद्धि हुई है। जो कीटनाशक पहले 650 रुपये में मिल रहा था, वही अब 800 से 850 रुपये प्रति लीटर हो गया है। करीब 300 रुपये प्रति लीटर मिलने वाली घास को नष्ट करने वाली दवा का दाम अब 600 रुपये से अधिक है। पोटाश पोटाश पहले 900 रुपये प्रति 50 किलोग्राम की बोरी मिलती थी, अब 1800 रुपये प्रति बोरी हो गया है। किसानों का कहना है कि कृषि में काम आने वाले कीटनाशक और उर्वरक खरीदना महंगा हो गया है। इनके दाम में वृद्धि से खेती की लागत बढ़ गई है। इससे किसानों की आमदनी पर असर पड़ेगा। फसल का उचित दाम नहीं मिलने से लागत निकालना भी मुश्किल है।
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150 रुपये बढ़े डीएपी के दाम, पहले था 1200 रुपये प्रति कट्टा
खेत के लिए जरूरी डीएपी के दाम में भी 150 रुपये प्रति बोरी की वृद्धि की गई है। पहले डीएपी का प्रति कट्टा 1200 रुपये में मिलता था, अब बढ़कर 1350 रुपये प्रति कट्टा हो गया है। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के नेता मांगे राम त्यागी और भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार का किसानों की ओर ध्यान नहीं है।
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बोले किसान
खेती करना इतना महंगा हो गया है कि फसल की लागत भी नहीं निकल पा रही है। इस ओर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। किसानों की दो गुनी आय की बात करने वाली सरकार अब महंगाई को लेकर चुप्पी साध रही है। - प्रमोद कुमार
महंगाई से खेती भी अछूती नहीं रही। कीटनाशक और उर्वरक के दाम बढ़ गए, लेकिन फसलों का समर्थन मूल्य किसानों को नहीं मिल रहा। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। - धीरज शर्मा
खेती के लिए उर्वरक और कीटनाशक जरूरी हैं। यह भी महंगे होने के कारण किसान इस चिंता हैं कि वह फसल से इसकी कैसे भरपाई कर पाएगा। इस महंगाई से सरकार को राहत दिलानी चाहिए। - संजीव कुमार
अब समझ में नहीं आता है कि किस तरह से खेती होगी। सरकार का किसानों के लिए राहत देने का काम करने की ओर ध्यान देने की जरूरत है। - सोनू तेवतिया