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बंदी की कगार पर सिकंदराबाद का जरी उद्योग
ब्यूरो/अमर उजाला, सिकंदराबाद
Updated Thu, 22 Dec 2016 11:05 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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विदेशों में देश को पहचान दिलाने वाला सिकंदराबाद का वर्षो पुराना जरी उद्योग नोटबंदी के चलते बंदी की कगार पर है। इससे करीब 20 हजार लोगों पर रोजी-रोटी का संकट छा गया है।
बता दें कि सिकंदराबाद में छोटी-बड़ी करीब 500 जरी इंडस्ट्रीज हैं। सिकंदराबाद से ही खुर्जा, अलीगढ़, पहासू, बुलंदशहर, गुलावठी, व आसपास देहात के जरी कारीगर काम लेकर जाते है।
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जरी उद्योग से सिकंदराबाद व आसपास क्षेत्र के करीब 20 हजार कारीगर जुड़े हुए है। नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत के चलते उन्हें कच्चा माल नहीं मिल पर रहा है। वहीं कारीगर भी अपने पुराने नोट जमा करने और नई करेंसी लेने के लिए लाइनों में लगे हुए है। कच्चा माल के सप्पलायर भी खाते अपडेट न होने का हवाला देते हुए चेक में पेमेंट लेने से इंकार कर रहे हैं।
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माल नहीं मिलने के कारण वह समय पर आर्डर पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
नई करेंसी की किल्लत के चलते ना तो वह कच्चा माल खरीद पर रहे हैं और न ही कारीगरों को देने के लिए उनके पास रुपये हैं। - मो. शकील, जरी उद्यमी
कच्चा माल नहीं होने और कारीगरों को भुगतान न देने पाने के कारण जरी करोबार 90 प्रतिशत तक कम हो गया है। - मौ.अल्ताफ, जरी उद्यमी
मजदूरी में पुराने नोट मिल रहे हैं। जिन्हें बैंक में जमा कर नई करेंसी लेने के लिए लाइन में ही उनका समय कट रहा है। काम कब करेंगे। - नदीम अहमद, कारीगर
जरी उद्योग मालिकों के पास देने के लिए नई करेंसी नहीं है। पुरानी करेंसी चल नहीं रही। उनकी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। - तेज सिंह, कारीगर