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बिन पुस्तक कैसे ‘वैज्ञानिक’ बनेंगे छात्र
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:55 PM IST
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किताबें
- फोटो : अमर उजाला
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परिषदीय स्कूलों में शिक्षा के हालात किसी से छिपे नहीं है। ‘पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया’ का नारा देने वाली सरकार अभी तक स्कूलों में किताबें मुहैया नहीं करा पाई है। हालात यह है कि बच्चों के पास गणित, विज्ञान, अंग्रेजी जैसे विषयों की भी किताबें नहीं है।
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परिषदीय स्कूलों के बच्चों ने बिन किताबों के ही अर्द्घवार्षिक परीक्षा भी दे दी है। प्रशासन दिवाली बाद शासन को पत्र लिखने की बात कह रहा है। बता दें कि बेसिक शिक्षा विभाग ने दो वर्ष पूर्व सत्र शुरू कर दिया था, लेकिन अक्तूबर के बाद भी बच्चों को किताबें नहीं मिली है। अर्द्घवार्षिक परीक्षाएं भी खत्म होने को है।
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फिर भी मुख्य विषयों की भी किताबें नहीं मिली है। हद तो तब है जब बच्चों ने इन विषयों की परीक्षा भी दे दी है। इससे पूर्व तत्कालीन बीएसए ने किताबों के वितरण का दावा किया था, लेकिन बीएसए धर्मेंद्र सक्सेना को जब पता चला तो उन्होंने बुधवार को किताब उपलब्ध करवाने वाली कंपनी से फोन पर दिवाली से पहले किताब देने का कहा।
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