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अपनों में ही उलझी सपा
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Mon, 01 Feb 2016 10:37 PM IST
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ब्लॉक प्रमुख चुनाव को लेकर वीआईपी कहे जाने वाले सिकंदराबाद ब्लॉक में जंग समाजवादी पार्टी बनाम समाजवादी पार्टी के बीच हो गई है। घोषित और अघोषित दोनों प्रत्याशियों के पक्ष में सपा के धुरंधर रणनीति बनाने में जुटे हैं।
यहां पर हार और जीत सपा की ही होगी। लेकिन अपनों के बीच ही जंग को लेकर पार्टी उलझी हुई है। बीडीसी के चुनाव के बाद से ही यहां पूर्व ब्लॉक प्रमुख बलबीर भाटी ने अपने पुत्र को बतौर प्रमुख पेश किया था।
उनके समर्थन में सूबे के एक मंत्री और जिले के कई सपा नेता पैरवी कर रहे थे। जबकि एक पूर्व सांसद, एक पूर्व मंत्री और एक एमएलसी उनके पक्ष में नहीं थे, उन्होंने पुष्पेंद्र भाटी के नाम को हाईकमान के लिए भेजा था।
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आखिर में पुष्पेंद्र भाटी को सपा ने प्रत्याशी घोषित कर दिया। अब हालत ऐसे है कि पुष्पेंद्र को जिताने के लिए पार्टी की साख दांव पर है और बलबीर भाटी को अपने पुत्र को प्रमुख बनाने के लिए अस्तित्व का सवाल है।
दोनों के बीच सपा बनाम सपा की लड़ाई है। इस ब्लाक में प्रमुख की लड़ाई यह भी तय करेगी कि गुर्जरों का बड़ा नेता कौन। दरअसल, दोनों ही गुर्जर हैं। इसके अलावा दोनों के पेरोकार भी गुर्जर नेता ज्यादा हैं।
सपा जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर का कहना है कि पार्टी के घोषित प्रत्याशियों को जिताने के लिए संगठन काम कर रहा है। पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यहां 7 को होगा चुनाव
बुलंदशहर , गुलावठी, ऊंचागाव, अरनिया, डिबाई, स्याना (सभी अनारक्षित), अनूपशहर, शिकारपुर, दानपुर (सभी महिला) खुर्जा, सिकदंराबाद (पिछड़ा वर्ग), बीबीनगर, पहासू (पिछड़ा वर्ग महिला), जहांगीराबाद, अगौता (अनुसुचित जाति), लखावटी (अनुसूचित जाति महिला)।
बीबीनगर में ठनी
बीबीनगर में सपा ने एक हिस्ट्रीशीटर की पत्नी को प्रत्याशी बनाया है। इस दागी की पत्नी की पैरवी सूबे के मंत्री कर रहे हैं। जबकि सपा के ही चर्चित विधायक विरोध कर रहे हैं।
इस जंग में जीत किसकी होगी, यह सात फरवरी को खुलासा होगा। गुलावठी में सपा युवजन सभा के अध्यक्ष की पत्नी को प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से वहां पहले से पार्टी में विवाद है।
ऊंचागांव प्रत्याशी की शिकायत आजम से
ऊंचागांव से रहमत खान को प्रत्याशी बनाया है। उनके खिलाफ बसीबांगर के सगीर और जमील ने कब्रिस्तान की जमीन कब्जाने की शिकायत एसडीएम से तहसील दिवस में की है।
तहसील स्तर से इस मामले की जांच की जा रही है। कब्रिस्तान की जमीन कब्जाने का यह मामला मंत्री आजम खां के दरबार में भी पहुंचाया गया है। वहां भी शिकायत की गई है।
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यहां पर हार और जीत सपा की ही होगी। लेकिन अपनों के बीच ही जंग को लेकर पार्टी उलझी हुई है। बीडीसी के चुनाव के बाद से ही यहां पूर्व ब्लॉक प्रमुख बलबीर भाटी ने अपने पुत्र को बतौर प्रमुख पेश किया था।
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उनके समर्थन में सूबे के एक मंत्री और जिले के कई सपा नेता पैरवी कर रहे थे। जबकि एक पूर्व सांसद, एक पूर्व मंत्री और एक एमएलसी उनके पक्ष में नहीं थे, उन्होंने पुष्पेंद्र भाटी के नाम को हाईकमान के लिए भेजा था।
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आखिर में पुष्पेंद्र भाटी को सपा ने प्रत्याशी घोषित कर दिया। अब हालत ऐसे है कि पुष्पेंद्र को जिताने के लिए पार्टी की साख दांव पर है और बलबीर भाटी को अपने पुत्र को प्रमुख बनाने के लिए अस्तित्व का सवाल है।
दोनों के बीच सपा बनाम सपा की लड़ाई है। इस ब्लाक में प्रमुख की लड़ाई यह भी तय करेगी कि गुर्जरों का बड़ा नेता कौन। दरअसल, दोनों ही गुर्जर हैं। इसके अलावा दोनों के पेरोकार भी गुर्जर नेता ज्यादा हैं।
सपा जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर का कहना है कि पार्टी के घोषित प्रत्याशियों को जिताने के लिए संगठन काम कर रहा है। पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यहां 7 को होगा चुनाव
बुलंदशहर , गुलावठी, ऊंचागाव, अरनिया, डिबाई, स्याना (सभी अनारक्षित), अनूपशहर, शिकारपुर, दानपुर (सभी महिला) खुर्जा, सिकदंराबाद (पिछड़ा वर्ग), बीबीनगर, पहासू (पिछड़ा वर्ग महिला), जहांगीराबाद, अगौता (अनुसुचित जाति), लखावटी (अनुसूचित जाति महिला)।
बीबीनगर में ठनी
बीबीनगर में सपा ने एक हिस्ट्रीशीटर की पत्नी को प्रत्याशी बनाया है। इस दागी की पत्नी की पैरवी सूबे के मंत्री कर रहे हैं। जबकि सपा के ही चर्चित विधायक विरोध कर रहे हैं।
इस जंग में जीत किसकी होगी, यह सात फरवरी को खुलासा होगा। गुलावठी में सपा युवजन सभा के अध्यक्ष की पत्नी को प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से वहां पहले से पार्टी में विवाद है।
ऊंचागांव प्रत्याशी की शिकायत आजम से
ऊंचागांव से रहमत खान को प्रत्याशी बनाया है। उनके खिलाफ बसीबांगर के सगीर और जमील ने कब्रिस्तान की जमीन कब्जाने की शिकायत एसडीएम से तहसील दिवस में की है।
तहसील स्तर से इस मामले की जांच की जा रही है। कब्रिस्तान की जमीन कब्जाने का यह मामला मंत्री आजम खां के दरबार में भी पहुंचाया गया है। वहां भी शिकायत की गई है।