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औपचारिकता बने आरोग्य मेले, कहीं डॉक्टर तो कहीं जांच नहीं
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नरौरा के पीएचसी पर लगे आरोग्य मेला में थर्मल स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्कर्मी।
- फोटो : BULANDSHAHR
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औपचारिकता बने आरोग्य मेले, कहीं डॉक्टर तो कहीं जांच नहीं
बुलंदशहर। आरोग्य मेले महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। न तो चिकित्सक पहुंच रहे हैं, न ही मरीजों की जांच के लिए उचित व्यवस्थाएं होती हैं। दूसरे रविवार को जिले में 71 स्थानों पर मेले का आयोजन हुआ। हर जगह कुछ न कुछ कमियां देखने को मिलीं। नरौरा में जहां एक घंटे बाद बिना चिकित्सक के स्वास्थ्यकर्मियों ने उपचार किया तो खानपुर में लैब टेक्नीशियन न होने के कारण लोगों को जांच कराने के लिए इंतजार करना पड़ा।
मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का गत वर्ष की तरह इस बार भी बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों के आयोजन किया जा रहा है। मेले में यूनानी, होम्योपैथिक विभाग की मदद भी ली जा रही है। नरौरा, खानपुर, ऊंचागांव और वैर स्थित एक-एक केंद्र पर टीम पहुंची। दो केंद्रों पर अव्यवस्थाएं मिलीं तो दो पर उपचार होते हुए पाया गया।
नरौरा (समय सुबह 10.58 बजे)
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मेले में सुबह 10.58 पर बिना चिकित्सक के फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपचार करते मिले। अब तक आयोजित हुए मेले में एक भी बार चिकित्सक की मौजूदगी देखने को नहीं मिली। शाम तक केंद्र पर 69 मरीजों का उपचार किया गया। मेले में मरीजों को बैठने के लिए टेंट आदि की भी व्यवस्था नहीं मिली।
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खानपुर (समय सुबह 10.47 बजे)
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मेले में 15 लोग उपचार करा चुके थे, जबकि 20 लोग अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे। 10 से अधिक लोग जांच कराने के लिए लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ का इंतजार करते मिले। मरीजों का कहना है कि न तो केंद्र पर जांच की जा रही है, न ब्लड प्रेशर चेक करने की कोई व्यवस्था है।
दौलतपुर कलां (समय सुबह 10.57 बजे)
ऊंचागांव क्षेत्र के दौलतपुर कलां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मेले में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी उपचार करते मिले। बुखार और मलेरिया आदि की जांच की गई। केंद्र पर शाम तक 91 मरीजों ने उपचार कराया, इसमें 31 लोग बुखार से पीड़ित मिले।
वैर (समय सुबह 11.15 बजे)
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। इस दौरान नाममात्र के मरीज जांच कराने के लिए पहुंचे। चिकित्सक मरीजों का इंतजार करते मिले। हालांकि शाम तक 145 मरीजों को देखने का दावा किया गया। इस दौरान लोगों की कोविड, बुखार, डेंगू और मलेरिया की जांच की गई व पात्र लोगों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाए गए।
5832 मरीजों का हुआ उपचार, 558 बुखार के मरीज मिले
एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी भंडारी ने बताया कि मेले में कोविड हेल्प डेस्क, सभी तरह की जांच, दवाइयां वितरित करने, गोल्डन कार्ड आदि के लिए स्टॉल लगाया गया। मेले में शाम तक 5832 मरीजों ने उपचार कराया। इसमें 2353 पुरुष, 2547 महिलाएं और 932 बच्चे शामिल रहे। मेले में 558 मरीज बुखार के मिले। 1430 त्वचा रोगी, 528 सांस रोगी, 583 उदर रोगी, 217 शुगर, 172 ब्लड प्रेशर, 143 लीवर, 50 क्षय रोग के संभावित और शेष अन्य बीमारियों के मरीज शामिल रहे। इस दौरान 842 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए, 380 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई और 67 कुपोषित बच्चे मिले।
जिले में विशेषज्ञों की कमी चल रही है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने पर आयुष विभाग के चिकित्सक व स्टाफ का सहयोग लेकर आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ के न आने का स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। बिना वजह देरी से आने पर संबंधित पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रयास रहेगा कि आगामी आरोग्य मेले में इस प्रकार की अव्यवस्था न मिले।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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बुलंदशहर। आरोग्य मेले महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। न तो चिकित्सक पहुंच रहे हैं, न ही मरीजों की जांच के लिए उचित व्यवस्थाएं होती हैं। दूसरे रविवार को जिले में 71 स्थानों पर मेले का आयोजन हुआ। हर जगह कुछ न कुछ कमियां देखने को मिलीं। नरौरा में जहां एक घंटे बाद बिना चिकित्सक के स्वास्थ्यकर्मियों ने उपचार किया तो खानपुर में लैब टेक्नीशियन न होने के कारण लोगों को जांच कराने के लिए इंतजार करना पड़ा।
मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का गत वर्ष की तरह इस बार भी बिना विशेषज्ञ चिकित्सकों के आयोजन किया जा रहा है। मेले में यूनानी, होम्योपैथिक विभाग की मदद भी ली जा रही है। नरौरा, खानपुर, ऊंचागांव और वैर स्थित एक-एक केंद्र पर टीम पहुंची। दो केंद्रों पर अव्यवस्थाएं मिलीं तो दो पर उपचार होते हुए पाया गया।
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नरौरा (समय सुबह 10.58 बजे)
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मेले में सुबह 10.58 पर बिना चिकित्सक के फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपचार करते मिले। अब तक आयोजित हुए मेले में एक भी बार चिकित्सक की मौजूदगी देखने को नहीं मिली। शाम तक केंद्र पर 69 मरीजों का उपचार किया गया। मेले में मरीजों को बैठने के लिए टेंट आदि की भी व्यवस्था नहीं मिली।
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खानपुर (समय सुबह 10.47 बजे)
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मेले में 15 लोग उपचार करा चुके थे, जबकि 20 लोग अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे। 10 से अधिक लोग जांच कराने के लिए लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ का इंतजार करते मिले। मरीजों का कहना है कि न तो केंद्र पर जांच की जा रही है, न ब्लड प्रेशर चेक करने की कोई व्यवस्था है।
दौलतपुर कलां (समय सुबह 10.57 बजे)
ऊंचागांव क्षेत्र के दौलतपुर कलां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित मेले में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी उपचार करते मिले। बुखार और मलेरिया आदि की जांच की गई। केंद्र पर शाम तक 91 मरीजों ने उपचार कराया, इसमें 31 लोग बुखार से पीड़ित मिले।
वैर (समय सुबह 11.15 बजे)
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। इस दौरान नाममात्र के मरीज जांच कराने के लिए पहुंचे। चिकित्सक मरीजों का इंतजार करते मिले। हालांकि शाम तक 145 मरीजों को देखने का दावा किया गया। इस दौरान लोगों की कोविड, बुखार, डेंगू और मलेरिया की जांच की गई व पात्र लोगों के आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाए गए।
5832 मरीजों का हुआ उपचार, 558 बुखार के मरीज मिले
एसीएमओ एवं नोडल अधिकारी डॉ. अश्वनी भंडारी ने बताया कि मेले में कोविड हेल्प डेस्क, सभी तरह की जांच, दवाइयां वितरित करने, गोल्डन कार्ड आदि के लिए स्टॉल लगाया गया। मेले में शाम तक 5832 मरीजों ने उपचार कराया। इसमें 2353 पुरुष, 2547 महिलाएं और 932 बच्चे शामिल रहे। मेले में 558 मरीज बुखार के मिले। 1430 त्वचा रोगी, 528 सांस रोगी, 583 उदर रोगी, 217 शुगर, 172 ब्लड प्रेशर, 143 लीवर, 50 क्षय रोग के संभावित और शेष अन्य बीमारियों के मरीज शामिल रहे। इस दौरान 842 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए, 380 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई और 67 कुपोषित बच्चे मिले।
जिले में विशेषज्ञों की कमी चल रही है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने पर आयुष विभाग के चिकित्सक व स्टाफ का सहयोग लेकर आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ के न आने का स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। बिना वजह देरी से आने पर संबंधित पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रयास रहेगा कि आगामी आरोग्य मेले में इस प्रकार की अव्यवस्था न मिले।
- डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ