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अहोई अष्टमी : शाम 05:42 से 06: 59 बजे के बीच करें पूजन
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बुलंदशहर। संतान खासकर पुत्र की लंबी आयु और सौभाग्य के लिए बृहस्पतिवार को अहोई अष्टमी मनाई जाएगी। माताएं निर्जला उपवास रखकर संतान की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:42 बजे से 6:59 बजे तक रहेगा।
मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन माताएं अपने पुत्र की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं। इस दिन माताएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर और व्रत रखकर अहोई माता से प्रार्थना करती हैं। निर्जल व्रत कर भगवान नाम स्मरण करते हुए व्रत के 10 नियमों का पालन करती हैं। शाम के समय तारे निकलने पर अहोई माता के नाम से अर्घ्य देकर व्रत समापन किया जाता है।
पंडित अंकुर शर्मा ने बताया कि इस बार इस बार अहोई अष्टमी की पूजा के दौरान गुरु-पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। अहोई अष्टमी पूजन के लिए शाम 05:42 बजे से 06:59 बजे तक शुभ मुहूर्त है। पंडित राज शर्मा ने बताया कि व्रत रखने वाली माताएं अहोई माता की गेरु, चूना से निर्मित प्रतिमा अथवा अहोई माता की तस्वीर पर गंगाजल अर्पित करते हुए रोली का तिलक लगाएं। लाल फूलों की माला अर्पण करना अति शुभ माना जाता है। दीपदान और गेहूं के सात दाने हाथ में लेकर कथा श्रवण करें। माता के भोग में चना, हलवा, पूरी, मूली, सिंघाड़ा व गन्ना शुभ माना जाता है।
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मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन अहोई अष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन माताएं अपने पुत्र की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं। इस दिन माताएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म से निवृत होकर और व्रत रखकर अहोई माता से प्रार्थना करती हैं। निर्जल व्रत कर भगवान नाम स्मरण करते हुए व्रत के 10 नियमों का पालन करती हैं। शाम के समय तारे निकलने पर अहोई माता के नाम से अर्घ्य देकर व्रत समापन किया जाता है।
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पंडित अंकुर शर्मा ने बताया कि इस बार इस बार अहोई अष्टमी की पूजा के दौरान गुरु-पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। इस योग को अत्यंत शुभ माना जाता है। अहोई अष्टमी पूजन के लिए शाम 05:42 बजे से 06:59 बजे तक शुभ मुहूर्त है। पंडित राज शर्मा ने बताया कि व्रत रखने वाली माताएं अहोई माता की गेरु, चूना से निर्मित प्रतिमा अथवा अहोई माता की तस्वीर पर गंगाजल अर्पित करते हुए रोली का तिलक लगाएं। लाल फूलों की माला अर्पण करना अति शुभ माना जाता है। दीपदान और गेहूं के सात दाने हाथ में लेकर कथा श्रवण करें। माता के भोग में चना, हलवा, पूरी, मूली, सिंघाड़ा व गन्ना शुभ माना जाता है।
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