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Bulandshahar News: रेबीज से युवक की मौत, नहीं लगवाई थी एआरवी
सार
बुलंदशहर के अनूपशहर निवासी देवेंद्र की कुत्ते के काटने के बाद रेबीज वैक्सीन न लगवाने से मृत्यु हो गई। परिवार ने इलाज के लिए कई अस्पतालों में प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। जिले में इस वर्ष यह तीसरी रेबीज से मौत है।
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विस्तार
बुलंदशहर। रेबीज ने घर के इकलौते बेटे को छीन लिया। युवक को रक्षाबंधन से दो दिन पहले कुत्ते ने काटा था लेकिन उसने एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) नहीं लगवाई थी। बुधवार रात को पानी देखकर वह डरने लगा तो परिजन बृहस्पतिवार को अनूपशहर से लेकर दिल्ली तक अस्पतालों में भटके लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। रात में दिल्ली से मेरठ ले जाते समय उसने दम तोड़ दिया।
अनूपशहर नगर के अहार अड्डा निवासी देवेंद्र (25) टीनशेड बनाने का कार्य करता था। परिवार में मां, दो अविवाहित व दो शादीशुदा बहनें हैं। देवेंद्र के पिता महेंद्र का पहले ही निधन हो चुका है। मां मुख्त्यारी ने बताया कि रक्षाबंधन से दो दिन पहले कुत्ते ने देवेंद्र को काट लिया था। वह कहता रहा कि एआरवी लगवा लेंगे लेकिन लगवाई नहीं।
24 सितंबर की रात उसे घबराहट महसूस होने लगी। पानी देखकर डरने लगा और उसकी जीभ भी लड़खड़ाने लगी। खाना-पीना भी छोड़ दिया।
बृहस्पतिवार को परिवार के लोग देवेंद्र को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अनूपशहर पहुंचे। वहां से उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। जिला चिकित्सालय में स्थिति गंभीर बता दिल्ली ले जाने के लिए कह दिया। इसके बाद परिवार के लोग गाजियाबाद व दिल्ली के दो अस्पतालों में दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वहां से रेबीज की पुष्टि करते हुए मेरठ ले जाने के लिए कह दिया गया। रात में दिल्ली से मेरठ लेकर जाते समय देवेंद्र ने दम तोड़ दिया।
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इकलौते बेटे की मौत होने से परिवार गहरे सदमे में है। मां ने कहा कि देवेंद्र ने कुत्ते के काटने को मामूली चोट समझा और लापरवाही बरती। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी को कोई पालतू या आवारा जानवर काटे तो एआरवी जरूर लगवाएं।
इस साल रेबीज से हुई तीसरी मौत
रेबीज से इस वर्ष यह तीसरी मौत है। जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज उपाध्याय एवं फार्मासिस्ट अरुण यादव ने बताया कि कुत्ता, बंदर या बिल्ली काटने पर 24 से 48 घंटे में पहली डोज लगवा लेनी चाहिए। दूसरी डोज तीन दिन बाद, तीसरी सात दिन बाद और चौथी 14 दिन बाद या जरूरत पड़ने पर 28 दिन बाद लगवा लेनी चाहिए। टीका नहीं लगवाने पर रेबीज के लक्षण एक माह बाद या दो साल से लेकर 15 साल तक भी सामने आ सकते हैं।
Iरेबीज से युवक की मौत की जानकारी की जा रही है। टीम को भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। रेबीज की पुष्टि होने पर संबंधित के संपर्क में आने वालों को एआरवी लगाई जाएगी। - डॉ. सुनील कुमार दोहरे, सीएमओI
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अनूपशहर नगर के अहार अड्डा निवासी देवेंद्र (25) टीनशेड बनाने का कार्य करता था। परिवार में मां, दो अविवाहित व दो शादीशुदा बहनें हैं। देवेंद्र के पिता महेंद्र का पहले ही निधन हो चुका है। मां मुख्त्यारी ने बताया कि रक्षाबंधन से दो दिन पहले कुत्ते ने देवेंद्र को काट लिया था। वह कहता रहा कि एआरवी लगवा लेंगे लेकिन लगवाई नहीं।
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24 सितंबर की रात उसे घबराहट महसूस होने लगी। पानी देखकर डरने लगा और उसकी जीभ भी लड़खड़ाने लगी। खाना-पीना भी छोड़ दिया।
बृहस्पतिवार को परिवार के लोग देवेंद्र को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अनूपशहर पहुंचे। वहां से उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। जिला चिकित्सालय में स्थिति गंभीर बता दिल्ली ले जाने के लिए कह दिया। इसके बाद परिवार के लोग गाजियाबाद व दिल्ली के दो अस्पतालों में दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वहां से रेबीज की पुष्टि करते हुए मेरठ ले जाने के लिए कह दिया गया। रात में दिल्ली से मेरठ लेकर जाते समय देवेंद्र ने दम तोड़ दिया।
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इकलौते बेटे की मौत होने से परिवार गहरे सदमे में है। मां ने कहा कि देवेंद्र ने कुत्ते के काटने को मामूली चोट समझा और लापरवाही बरती। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी को कोई पालतू या आवारा जानवर काटे तो एआरवी जरूर लगवाएं।
इस साल रेबीज से हुई तीसरी मौत
रेबीज से इस वर्ष यह तीसरी मौत है। जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज उपाध्याय एवं फार्मासिस्ट अरुण यादव ने बताया कि कुत्ता, बंदर या बिल्ली काटने पर 24 से 48 घंटे में पहली डोज लगवा लेनी चाहिए। दूसरी डोज तीन दिन बाद, तीसरी सात दिन बाद और चौथी 14 दिन बाद या जरूरत पड़ने पर 28 दिन बाद लगवा लेनी चाहिए। टीका नहीं लगवाने पर रेबीज के लक्षण एक माह बाद या दो साल से लेकर 15 साल तक भी सामने आ सकते हैं।
Iरेबीज से युवक की मौत की जानकारी की जा रही है। टीम को भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। रेबीज की पुष्टि होने पर संबंधित के संपर्क में आने वालों को एआरवी लगाई जाएगी। - डॉ. सुनील कुमार दोहरे, सीएमओI