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आज बन रहा विशेष योग, रात 11:57 से शुरू होगी खास पूजा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 10:22 PM IST
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A special celestial alignment is forming today; a special ritual will begin at 11:57 PM.
श्री कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बाजार में लड़्डू गोपाल को सजाने के लिए खरीदारी करती।
बुलंदशहर। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार को उत्साह से मनाया जाएगा। पंडितों के अनुसार, मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि होने के कारण शुक्रवार को व्रत रखना शुभ रहेगा। इसी रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। पंडित कैलाश शर्मा ने बताया कि निशीथ पूजा का मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक 45 मिनट का होगा।
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मध्यरात्रि का क्षण रात 12:20 बजे रहेगा, जबकि चंद्रोदय रात 11:29 बजे होगा। श्रद्धालु इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर विधिवत पूजन कर सकते हैं। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि शुक्रवार को रात 02:25 बजे शुरू होकर पांच सितंबर शनिवार की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मध्यरात्रि में मनाने की परंपरा है।
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इस बार शुक्रवार की रात जन्मोत्सव के समय अष्टमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए इसी दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन कर सकते हैं। बाल गोपाल को माखन-मिश्री का भोग लगाकर आरती करने से विशेष पुण्य मिलता है। मंदिरों और घरों में बाल गोपाल का विशेष शृंगार कर झांकियां सजाई जाएंगी। भगवान के जन्म के समय शंखनाद, घंटा-घड़ियाल और आरती के साथ उत्सव मनाया जाएगा।
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पूजन का महत्व
भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का अवतरण द्वापर युग में अधर्म के नाश के लिए हुआ था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और आधी रात तक जगकर जन्मोत्सव मनाते हैं। जन्माष्टमी के व्रत में अष्टमी तिथि के साथ मध्यरात्रि का विशेष महत्व होता है।
पूजन विधि
गांव गंगेरूआ स्थित द्वादश महालिंगेश्वर महापीठ के पीठाधीश्वर आचार्य मंजीत धर्मध्वज ने पूजन विधि बताई। बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराकर पीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। माखन-मिश्री का भोग लगाकर धूप-दीप जलाएं और मध्यरात्रि में शंख बजाकर आरती करें। प्रसाद वितरित करने के बाद व्रत का पारण स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार किया जाएगा।
घर-घर चल रहीं जन्माष्टमी की तैयारियां, मंदिरों में होंगे भजन-कीर्तन
बुगरासी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर घरों से लेकर मंदिरों तक उत्साह है। लोग घरों की साफ-सफाई और सजावट में जुटे हैं। वहीं, मंदिरों में भी भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भजन-कीर्तन के बाद श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की जाएगी।

जन्माष्टमी को लेकर महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से उत्साहित हैं। घरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी सजाने के लिए आकर्षक सामान खरीदा जा रहा है। मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के समय शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच आरती की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
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