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Bulandshahar News: दिलासों के भंवर में फंसी काली को निर्मल बनाने की योजना
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काली नदी का फोटो।
बुलंदशहर। काली नदी को निर्मल बनाने की 100 करोड़ रुपये की योजना दिलासों के भंवर में फंसकर रह गई है। मई 2025 में मुजफ्फरनगर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई कवायद को दूसरे जिलों में भी लागू किया जाना था लेकिन यह प्रोजेक्ट नदी के उद्गम स्थल से ही आगे नहीं बढ़ सका।
बुलंदशहर जिले के 50 से अधिक गांवों के किनारे से निकल रही नदी की सफाई, सिल्ट हटाने, अतिक्रमण मुक्त कराने, जल प्रवाह सुचारु करने और दोनों किनारों पर पौधरोपण करने का प्रस्ताव था। अब अधिकारियों ने इस फाइल को टोकरी में डाल दिया है।
जिले में काली नदी कई स्थानों पर गंदगी, सिल्ट और अतिक्रमण से घिरी है। शहर और गांवों से निकलने वाले नालों का गंदा पानी भी इसमें पहुंचता है। कई जगह नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित है। ऐसे में सामान्य बारिश में भी पानी की निकासी प्रभावित होती है। तेज बारिश में स्थिति गंभीर हो जाती है।
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गुलावठी के साथ नगर, मालागढ़, रमपुरा, चावली, ग्यासपुर, नीमखेड़ा, ऐमनपुर, क्रियावली, अच्छेजा, हुर्थला, बनवारीपुर, पूठरी, रामपुर, जालपी, करैना, काधे पहासू, छतारी समेत अन्य क्षेत्र में 50 से अधिक गांवों के खेतों में नदी का पानी भरने से किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं।
जलभराव लंबे समय तक रहने पर अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होती है। किसान निशांत सिंह, अनिल शर्मा, कुलदीप शर्मा का कहना है कि नदी की सफाई के साथ अतिक्रमण हटाकर जल प्रवाह बहाल कर दिया जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
चारू की तलाश में भी सामने आई बदहाली
भारी बारिश के दौरान 11 वर्षीय चारू कश्यप के खुले नाले में बहने की घटना ने भी शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी, पुलिस, नगर पालिका और गोताखोरों ने कई दिनों तक नाले से काली नदी तक तलाशी अभियान चलाया था। करीब 93 घंटे बाद बागपत से आए गोताखोरों ने चावली के पास काली नदी से बच्ची का शव बरामद किया था।
पायलट के बाद आगे नहीं बढ़ी योजना
काली नदी के पुनर्जीवन के लिए तैयार कार्ययोजना में सिर्फ सफाई नहीं बल्कि अतिक्रमण हटाने और नदी के दोनों किनारों पर हरित पट्टी विकसित करने जैसे स्थायी उपाय प्रस्तावित थे। अधिकारियों के मुताबिक मुजफ्फरनगर में शुरू किए गए कार्य में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इस वजह से फाइल को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
पत्र लिखा, आश्वासन मिला... लेकिन बात नहीं बनी
तत्कालीन जिलाधिकारी श्रुति ने इसके लिए पत्र भी लिखा और उच्चाधिकारियों से वार्ता की, आश्वासन भी मिला लेकिन बात नहीं बनी। उस समय कहा गया था कि मुजफ्फरनगर से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है। बुलंदशहर में इस पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसमें कब्जे हटाना, दोनों किनारों पर पौधरोपण करना, गंदे पानी को गिरने से रोकने के लिए नालों पर व्यवस्था करना, पानी को साफ करने के लिए जिगजैग सिस्टम बनाना शामिल था।
कोट--
काली नदी के किनारे पौधे लगाने के लिए मनरेगा योजना से काम होना था लेकिन मुजफ्फरनगर में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। जल्द ही आगे की योजना तैयार की जाएगी। गोपाल कृष्ण चौधरी, डीसी मनरेगा
काली नदी के किनारे दोनों ओर पौधे लगाए जाने थे लेकिन सफाई और सुंदरीकरण का काम ही नहीं हो पाया। इस वजह से पौधे नहीं लगाए गए हैं। शासन स्तर से जल्द अपेक्षित कदम उठाए जाएंगे।
डॉ. हरेंद्र सिंह, डीएफओ
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बुलंदशहर जिले के 50 से अधिक गांवों के किनारे से निकल रही नदी की सफाई, सिल्ट हटाने, अतिक्रमण मुक्त कराने, जल प्रवाह सुचारु करने और दोनों किनारों पर पौधरोपण करने का प्रस्ताव था। अब अधिकारियों ने इस फाइल को टोकरी में डाल दिया है।
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जिले में काली नदी कई स्थानों पर गंदगी, सिल्ट और अतिक्रमण से घिरी है। शहर और गांवों से निकलने वाले नालों का गंदा पानी भी इसमें पहुंचता है। कई जगह नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित है। ऐसे में सामान्य बारिश में भी पानी की निकासी प्रभावित होती है। तेज बारिश में स्थिति गंभीर हो जाती है।
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गुलावठी के साथ नगर, मालागढ़, रमपुरा, चावली, ग्यासपुर, नीमखेड़ा, ऐमनपुर, क्रियावली, अच्छेजा, हुर्थला, बनवारीपुर, पूठरी, रामपुर, जालपी, करैना, काधे पहासू, छतारी समेत अन्य क्षेत्र में 50 से अधिक गांवों के खेतों में नदी का पानी भरने से किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं।
जलभराव लंबे समय तक रहने पर अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित होती है। किसान निशांत सिंह, अनिल शर्मा, कुलदीप शर्मा का कहना है कि नदी की सफाई के साथ अतिक्रमण हटाकर जल प्रवाह बहाल कर दिया जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
चारू की तलाश में भी सामने आई बदहाली
भारी बारिश के दौरान 11 वर्षीय चारू कश्यप के खुले नाले में बहने की घटना ने भी शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी, पुलिस, नगर पालिका और गोताखोरों ने कई दिनों तक नाले से काली नदी तक तलाशी अभियान चलाया था। करीब 93 घंटे बाद बागपत से आए गोताखोरों ने चावली के पास काली नदी से बच्ची का शव बरामद किया था।
पायलट के बाद आगे नहीं बढ़ी योजना
काली नदी के पुनर्जीवन के लिए तैयार कार्ययोजना में सिर्फ सफाई नहीं बल्कि अतिक्रमण हटाने और नदी के दोनों किनारों पर हरित पट्टी विकसित करने जैसे स्थायी उपाय प्रस्तावित थे। अधिकारियों के मुताबिक मुजफ्फरनगर में शुरू किए गए कार्य में अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इस वजह से फाइल को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
पत्र लिखा, आश्वासन मिला... लेकिन बात नहीं बनी
तत्कालीन जिलाधिकारी श्रुति ने इसके लिए पत्र भी लिखा और उच्चाधिकारियों से वार्ता की, आश्वासन भी मिला लेकिन बात नहीं बनी। उस समय कहा गया था कि मुजफ्फरनगर से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है। बुलंदशहर में इस पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसमें कब्जे हटाना, दोनों किनारों पर पौधरोपण करना, गंदे पानी को गिरने से रोकने के लिए नालों पर व्यवस्था करना, पानी को साफ करने के लिए जिगजैग सिस्टम बनाना शामिल था।
कोट
काली नदी के किनारे पौधे लगाने के लिए मनरेगा योजना से काम होना था लेकिन मुजफ्फरनगर में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। जल्द ही आगे की योजना तैयार की जाएगी। गोपाल कृष्ण चौधरी, डीसी मनरेगा
काली नदी के किनारे दोनों ओर पौधे लगाए जाने थे लेकिन सफाई और सुंदरीकरण का काम ही नहीं हो पाया। इस वजह से पौधे नहीं लगाए गए हैं। शासन स्तर से जल्द अपेक्षित कदम उठाए जाएंगे।
डॉ. हरेंद्र सिंह, डीएफओ