{"_id":"110-40891","slug":"Bulandshahr-40891-110","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘तेरी फितरत में है, बस दगा जिंदगी’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘तेरी फितरत में है, बस दगा जिंदगी’
Bulandshahr
Updated Sat, 25 Oct 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
बुलंदशहर। बज्मे हरनाम की 84वीं वर्षगांठ पर ब्रह्नपुरी में गंगा-यमुना कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन हुआ। शायरों ने कलाम और कवियों ने काव्य पाठ कर दर्शकाें को मंत्रमुग्ध कर दिया।
चांद बर्नी और ख्याली राम ‘खुशहाल’ को बेहतरीन प्रस्तुति पर सम्मानित किया गया। सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ। रमेश प्रसून द्वारा प्रस्तुत ‘चांद तारे आंख में दिनमान रखता हूं, मै उजाला हूं स्वयं पहचान रखता हूं’ को काफी सराहा गया। चांद बर्नी का कलाम ‘वादा करो पहले हम इंसान बनेंगे, फिर बाद में हिंदू या मुसलमान बनेंगे।’ डा. असलम द्वारा पढ़ी गई ‘तूने की कभी किससे वफा जिंदगी, तेरी फितरत में है बस दगा जिंदगी’ ने काफी तालियां बटोरी। डा. कमल किशोर भारद्वाज ने ‘दीपक से ज्यादा उजियारा फैलाओ नित प्यार का, मिट जाए अज्ञात का अंधियारा इस संसार का।’ कंछिद सिंह सरल ने ‘सब समर्पित रहे इस चमन के लिए, बस लड़े तो लड़े अमन के लिए।’ ख्याली राम खुशहाल ने ‘दीप करोड़ों जले मगर अभी अंधकार बाकी है। रावण दहन हुआ मगर गद्दार बाकी हैं।’ डा. रहबर बर्नी ने ‘अब के सावन की मुझ पर नवाजिश हुई। दिल के जख्मों की आंगन में बारिश हुई।’ किशोर अग्रवाल ने ‘दीपावली फिर आ गई संग उजियार, सुख समृद्धि का पर्व ये फैलाता है प्यार।’ इरशाद अहमद सरर ने ‘हम वफादार है इस वतन के लिए, खून हमने दिया इस चमन के लिए’, शंभू दत्त त्रिपाठी ने ‘बहुत सुहानी मेरे गाव की दीवाली, नानम रहीम ईसा राम की दीवाली’ को दर्शक ने खूब सराहा।
विज्ञापन
चांद बर्नी और ख्याली राम ‘खुशहाल’ को बेहतरीन प्रस्तुति पर सम्मानित किया गया। सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ। रमेश प्रसून द्वारा प्रस्तुत ‘चांद तारे आंख में दिनमान रखता हूं, मै उजाला हूं स्वयं पहचान रखता हूं’ को काफी सराहा गया। चांद बर्नी का कलाम ‘वादा करो पहले हम इंसान बनेंगे, फिर बाद में हिंदू या मुसलमान बनेंगे।’ डा. असलम द्वारा पढ़ी गई ‘तूने की कभी किससे वफा जिंदगी, तेरी फितरत में है बस दगा जिंदगी’ ने काफी तालियां बटोरी। डा. कमल किशोर भारद्वाज ने ‘दीपक से ज्यादा उजियारा फैलाओ नित प्यार का, मिट जाए अज्ञात का अंधियारा इस संसार का।’ कंछिद सिंह सरल ने ‘सब समर्पित रहे इस चमन के लिए, बस लड़े तो लड़े अमन के लिए।’ ख्याली राम खुशहाल ने ‘दीप करोड़ों जले मगर अभी अंधकार बाकी है। रावण दहन हुआ मगर गद्दार बाकी हैं।’ डा. रहबर बर्नी ने ‘अब के सावन की मुझ पर नवाजिश हुई। दिल के जख्मों की आंगन में बारिश हुई।’ किशोर अग्रवाल ने ‘दीपावली फिर आ गई संग उजियार, सुख समृद्धि का पर्व ये फैलाता है प्यार।’ इरशाद अहमद सरर ने ‘हम वफादार है इस वतन के लिए, खून हमने दिया इस चमन के लिए’, शंभू दत्त त्रिपाठी ने ‘बहुत सुहानी मेरे गाव की दीवाली, नानम रहीम ईसा राम की दीवाली’ को दर्शक ने खूब सराहा।
विज्ञापन