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चार हजार जवान करेंगे सुरक्षा
Bulandshahr
Updated Thu, 07 Nov 2013 05:42 AM IST
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बुलंदशहर। मोहर्रम पर कानून व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी चार हजार पुलिस वालों पर होगी। 3000 सिपाही, पीएसी जवान और होमगार्ड का दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। कप्तान ने राजपत्रित अधिकारी, एडिशनल एसपी और इंस्पेक्टरों की जिम्मेदारी तय कर दी है। मोहर्रम पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन के निर्देश पर जिला पुलिस ने तैयारी शुरू कर दी है। सार्वजनिक और संवेदनशील क्षेत्रों में पांच दमकल गाड़ियां खड़ी की गई है। मोबाइल वाहन पर पुलिस की टीमें गठित कर दी गई हैं। मिश्रित आबादी वाले स्याना, बुलंदशहर, सिकंदराबाद, खुर्जा, जहांगीराबाद में खास नजर रहेगी।
इनकी लगी ड्यूटी
3000 सिपाही, पीएसी जवान और होमगार्ड, 300 सब इंस्पेक्टर और 30 इंस्पेक्टर, पांच एडिशनल एसपी,11 अफसर व रिजर्व में भी पुलिसकर्मी होंगे। सांखनी, शिकारपुर, खुर्जा, गुलावठी समेत बुलंदशहर में ऊपरकोट की निगरानी पुलिस की प्राथमिकता में रहेगी।
इमामबाड़ों में अलम सजे, मजलिसें शुरू
बुलंदशहर। मंगलवार की शाम को मोहर्रम का चांद दिखने के बाद बुधवार को शिया समुदाय ने इमामबाड़ों और अजाखानोें में अलम सजा दिए। शौहदा ए कर्बला की याद में मजलिसों का दौर शुरू हो गया। सोग में महिलाओं ने अपने जेवर मदन से उतार दिए। काले लिबास पहल लिए हैं।
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शहर के उपर कोट के इमामबाड़े में बुधवार की शाम को मजलिस हुई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने कर्बला का वाकया बयां किया। यह सुनकर सोगवार जार जार रोए। मौलाना ने हजरत हुसैन की शहादत से सीख लेने की गुजारिश की। इमाबाड़ा कमेटी के सदर जावेद जाफरी ने बताया कि फिलहाल पांच मोहर्रम तक इमामवाड़े और अजाखानों में मजलिसें होंगी। ख्वातीन की मजलिसें भी होगी। छह मोहर्रम के बाद जुलूस ए अलम, जुलूस ए जुलजुनाह निकलेगा। दस मोहर्रम के बाद भी मजलिसों का दौर जारी रहेगा। सोगवार जुलूस में सीनाजनी, झुरी और जंजीरों के मातम के साथ आग पर मातम करेंगे। शिकारपुर, सासनी, औरंगाबाद, खुर्जा में भी मजलिस शुरू हो गई है।
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इनकी लगी ड्यूटी
3000 सिपाही, पीएसी जवान और होमगार्ड, 300 सब इंस्पेक्टर और 30 इंस्पेक्टर, पांच एडिशनल एसपी,11 अफसर व रिजर्व में भी पुलिसकर्मी होंगे। सांखनी, शिकारपुर, खुर्जा, गुलावठी समेत बुलंदशहर में ऊपरकोट की निगरानी पुलिस की प्राथमिकता में रहेगी।
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इमामबाड़ों में अलम सजे, मजलिसें शुरू
बुलंदशहर। मंगलवार की शाम को मोहर्रम का चांद दिखने के बाद बुधवार को शिया समुदाय ने इमामबाड़ों और अजाखानोें में अलम सजा दिए। शौहदा ए कर्बला की याद में मजलिसों का दौर शुरू हो गया। सोग में महिलाओं ने अपने जेवर मदन से उतार दिए। काले लिबास पहल लिए हैं।
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शहर के उपर कोट के इमामबाड़े में बुधवार की शाम को मजलिस हुई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने कर्बला का वाकया बयां किया। यह सुनकर सोगवार जार जार रोए। मौलाना ने हजरत हुसैन की शहादत से सीख लेने की गुजारिश की। इमाबाड़ा कमेटी के सदर जावेद जाफरी ने बताया कि फिलहाल पांच मोहर्रम तक इमामवाड़े और अजाखानों में मजलिसें होंगी। ख्वातीन की मजलिसें भी होगी। छह मोहर्रम के बाद जुलूस ए अलम, जुलूस ए जुलजुनाह निकलेगा। दस मोहर्रम के बाद भी मजलिसों का दौर जारी रहेगा। सोगवार जुलूस में सीनाजनी, झुरी और जंजीरों के मातम के साथ आग पर मातम करेंगे। शिकारपुर, सासनी, औरंगाबाद, खुर्जा में भी मजलिस शुरू हो गई है।