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लखनऊ में सीएम को सुनाएंगे दर्द
Bulandshahr
Updated Sat, 02 Feb 2013 05:30 AM IST
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बुलंदशहर। प्रदेश की हृदय विदारक वारदातों में से एक बरारी नरसंहार के एक मात्र चश्मदीद गवाह कई माह से सुरक्षा और आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा था। पुलिस-प्रशासन ने उसकी कोई सुनवाई नहीं की। इससे क्षुब्ध होकर शुक्रवार को अमरपाल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने की आस लेकर पैदल ही लखनऊ की यात्रा के लिए निकल पड़ा।
चार वर्ष पहले बरारी में आठ लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मारे जाने वालों में दो आठ और नौ माह की गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं। हत्यारोपियों ने भूमि विवाद में एक पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया था। वारदात के बाद ग्रामीणों में खौफ था। हत्यारोपियों को वारदात को अंजाम देने जाने और आने के दौरान कई लोगों ने देखा था, लेकिन कोई गवाही के लिए सामने नहीं आया। ग्रामीण अमरपाल ने पुलिस को पूरा वाक्या बताया तो पुलिस ने उसे सरकारी नौकरी और सुरक्षा का झांसा देकर बरारी नरसंहार का गवाह बना दिया। लेकिन अमरपाल को गवाह बनने के बाद गांव से पलायन करना पड़ा। तब से वह परिवार समेत भटक रहा है। पीड़ित का कहना है कि दो बार हत्यारोपी और उनके रिश्तेदार उस पर जानलेवा हमला कर चुके हैं। पुलिस-प्रशासन से सुरक्षा और आर्थिक मदद की गुहार लगाई। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अमरपाल अब सीएम को अपना दर्द बताने के लिए पैदल लखनऊ निकल पड़ा है।
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चार वर्ष पहले बरारी में आठ लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मारे जाने वालों में दो आठ और नौ माह की गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं। हत्यारोपियों ने भूमि विवाद में एक पूरे परिवार को ही खत्म कर दिया था। वारदात के बाद ग्रामीणों में खौफ था। हत्यारोपियों को वारदात को अंजाम देने जाने और आने के दौरान कई लोगों ने देखा था, लेकिन कोई गवाही के लिए सामने नहीं आया। ग्रामीण अमरपाल ने पुलिस को पूरा वाक्या बताया तो पुलिस ने उसे सरकारी नौकरी और सुरक्षा का झांसा देकर बरारी नरसंहार का गवाह बना दिया। लेकिन अमरपाल को गवाह बनने के बाद गांव से पलायन करना पड़ा। तब से वह परिवार समेत भटक रहा है। पीड़ित का कहना है कि दो बार हत्यारोपी और उनके रिश्तेदार उस पर जानलेवा हमला कर चुके हैं। पुलिस-प्रशासन से सुरक्षा और आर्थिक मदद की गुहार लगाई। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अमरपाल अब सीएम को अपना दर्द बताने के लिए पैदल लखनऊ निकल पड़ा है।
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