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गेहूं खरीद का लक्ष्य बढ़ा, पर रखोगे कहां
Bulandshahr
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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बुलंदशहर। जिले का गेहूं खरीद लक्ष्य तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन रखने की पर्याप्त जगह नहीं है। सिर्फ 1.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं रखने की जगह बन पाई है, जबकि खरीद का लक्ष्य 1.32 लाख मीट्रिक टन है। ऐसे में बिना इंतजाम गेहूं कहीं बर्बाद न हो जाए। इसको लेकर क्रय एजेंसियों के अधिकारी भी चिंतित हैं।
गेहूं की अच्छी पैदावार को देखते हुए जिले में खरीद का लक्ष्य 80500 से बढ़ाकर 1.32 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। गेहूं की खरीद भले कोई भी एजेंसी करे, लेकिन स्टोरेज की जिम्मेदारी एफसीआई की है। वर्तमान में एफसीआई के अपने गोदामों में 62856 मीट्रिक टन गेहूं रखने की जगह है। 78208 मीट्रिक टन खाद्यान्न उसके गोदामों में पहले से भरा हुआ है। गेहूं भंडारण के लिए एफसीआई ने स्टेट वेयर हाउस (राजकीय भंडारण निगम) के सात गोदाम बुलंदशहर, जोखाबाद, खुर्जा, शिकारपुर, पहासू, गुलावठी, डिबाई में भी जगह तलाशी लेकिन इन गोदामों में भी पर्याप्त जगह नहीं मिली। सात गोदामों में मिलाकर महज 28300 मीट्रिक टन गेहूं के लिए ही जगह मिल पाई है। एफसीआई ने जनपद गौतमबुद्ध नगर के दादरी में बने केंद्रीय भंडारण निगम के गोदाम में भी जगह मांगी है।
एफसीआई के एरिया मैनेजर राजेंद्र सिंह का कहना है कि दादरी के गोदाम में भी उन्हें 19000 मीट्रिक टन गेहूं रखने की जगह मिली है। हालांकि एफसीआई के अधिकारियों का कहना है कि गेहूं खरीद पूरी होने तक भंडारण के लिए जगह बना ली जाएगी।
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खुले में पड़ा है गेहूं, बारिश हुई तो ‘सत्यानाश’
खुर्जा। तहसील क्षेत्र के क्रय केंद्रों पर सैकड़ों कुंतल गेहूं खुले में पड़ा है। यदि बारिश हुई तो लाखों रुपये का गेहूं बर्बाद हो जाएगा। वहीं किसानों का लाखों का भुगतान लटका हुआ है। इसके चलते क्षेत्र के किसान क्रय केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। बुधवार को अमर उजाला टीम ने नवीन मंडी स्थित दो क्रय केंद्रों का दौरा किया तो यह बदइंतजामी नजर आई।
मंडी समिति एग्रो क्रय केंद्र नंबर एक पर चार ट्रक गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा मिला। केंद्र इंचार्ज आलोक भाटिया से पूछने पर पता चला कि तीन दिन से उठान नहीं हुआ है। केंद्र पर फसल बेचने वाले किसानों का करीब 26 लाख रुपये बकाया हो चुका है। उधर, मंडी स्थित खाद एवं रसद विभाग के क्रय केंद्र पर करीब तीन ट्रक गेहूं आसमान के नीचे पड़ा मिला। केंद्र इंचार्ज बिजेंद्र सिंह ने कहा कि ट्रक आने पर माल भेज दिया जाएगा। केंद्र पर दोनों इलेक्ट्रानिक तौल कांटे खराब थे। पड़ोस के केंद्र से एक कांटा मंगाकर काम चलाया जा रहा था।
इस संबंध में एसडीएम डीपी सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं तहसीलदार युगराज सिंह ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
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गेहूं की अच्छी पैदावार को देखते हुए जिले में खरीद का लक्ष्य 80500 से बढ़ाकर 1.32 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। गेहूं की खरीद भले कोई भी एजेंसी करे, लेकिन स्टोरेज की जिम्मेदारी एफसीआई की है। वर्तमान में एफसीआई के अपने गोदामों में 62856 मीट्रिक टन गेहूं रखने की जगह है। 78208 मीट्रिक टन खाद्यान्न उसके गोदामों में पहले से भरा हुआ है। गेहूं भंडारण के लिए एफसीआई ने स्टेट वेयर हाउस (राजकीय भंडारण निगम) के सात गोदाम बुलंदशहर, जोखाबाद, खुर्जा, शिकारपुर, पहासू, गुलावठी, डिबाई में भी जगह तलाशी लेकिन इन गोदामों में भी पर्याप्त जगह नहीं मिली। सात गोदामों में मिलाकर महज 28300 मीट्रिक टन गेहूं के लिए ही जगह मिल पाई है। एफसीआई ने जनपद गौतमबुद्ध नगर के दादरी में बने केंद्रीय भंडारण निगम के गोदाम में भी जगह मांगी है।
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एफसीआई के एरिया मैनेजर राजेंद्र सिंह का कहना है कि दादरी के गोदाम में भी उन्हें 19000 मीट्रिक टन गेहूं रखने की जगह मिली है। हालांकि एफसीआई के अधिकारियों का कहना है कि गेहूं खरीद पूरी होने तक भंडारण के लिए जगह बना ली जाएगी।
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खुले में पड़ा है गेहूं, बारिश हुई तो ‘सत्यानाश’
खुर्जा। तहसील क्षेत्र के क्रय केंद्रों पर सैकड़ों कुंतल गेहूं खुले में पड़ा है। यदि बारिश हुई तो लाखों रुपये का गेहूं बर्बाद हो जाएगा। वहीं किसानों का लाखों का भुगतान लटका हुआ है। इसके चलते क्षेत्र के किसान क्रय केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। बुधवार को अमर उजाला टीम ने नवीन मंडी स्थित दो क्रय केंद्रों का दौरा किया तो यह बदइंतजामी नजर आई।
मंडी समिति एग्रो क्रय केंद्र नंबर एक पर चार ट्रक गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा मिला। केंद्र इंचार्ज आलोक भाटिया से पूछने पर पता चला कि तीन दिन से उठान नहीं हुआ है। केंद्र पर फसल बेचने वाले किसानों का करीब 26 लाख रुपये बकाया हो चुका है। उधर, मंडी स्थित खाद एवं रसद विभाग के क्रय केंद्र पर करीब तीन ट्रक गेहूं आसमान के नीचे पड़ा मिला। केंद्र इंचार्ज बिजेंद्र सिंह ने कहा कि ट्रक आने पर माल भेज दिया जाएगा। केंद्र पर दोनों इलेक्ट्रानिक तौल कांटे खराब थे। पड़ोस के केंद्र से एक कांटा मंगाकर काम चलाया जा रहा था।
इस संबंध में एसडीएम डीपी सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं तहसीलदार युगराज सिंह ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।