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400 स्टूडेंट्स की जिंदगी खतरे में
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Tue, 12 Jan 2016 10:55 PM IST
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जिले के पांच प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे करीब 400 बच्चों की जिंदगी खतरे में है। ये सभी स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं। मामला तब खुला जब सिकंदराबाद में हुए हादसे के बाद शिक्षाविभाग के अधिकारियों ने स्कूलों का निरीक्षण किया।
अब अधिकारी इन जर्जर भवनों को ध्वस्त करवाने की तैयारी में हैं। लेकिन तत्काल बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
दिसंबर 2015 में सिकंदराबाद स्थित एक निजी स्कूल की छत गिर गई थी। घटना में एक छात्रा की मौत हो गई थी जबकि करीब दो दर्जन से अधिक बच्चे घायल हुए थे।
हादसे के बाद डीएम ने बेसिक शिक्षा विभाग के तहत संचालित विद्यालयों के भवनों की जांच के आदेश दिए थे। विभाग की गंभीरता का हाल यह रहा कि करीब महीना भर बीतने के बाद भी जांच शुरू नहीं की गई। अब जब जांच शुरू हुई तो भयावह तस्वीर सामने आ रही है।
नगर बेसिक शिक्षा अधिकारी भारतेंदु वशिष्ठ ने नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सराय चौधरियान, प्रेम नगर, चौक बाजार, सिविल लाइन और कबाड़ी बाजार का निरीक्षण किया।
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इन सभी स्कूलों की बिल्डिंग बेहद जर्जर अवस्था में हैं। विशेषकर कबाड़ी बाजार प्राथमिक विद्यालय का भवन कभी भी गिर सकता है। इन विद्यालयों में करीब 400 बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की सुरक्षा के लिए न तो स्कूल के शिक्षक और न ही प्रशासनिक अधिकारी फिक्रमंद हैं।
हर साल होनी चाहिए जांच
नियमत: हर साल शिक्षा विभाग की ओर से इन स्कूलों के भवनों की जांच और मरम्मत होनी चाहिए। कागजों में जांच और मरम्मत होती भी है लेकिन स्कूलों की दशा जस की तस रह जाती है। अफसर तब जागते हैं जब सिकंदराबाद जैसी कोई घटना घटित हो जाती है।
दावा: सुरक्षित कमरों में हो रही पढ़ाई
कार्यवाहक बीएसए के मुताबिक चिह्नित किए गए जर्जर विद्यालयों में कुछ सुरक्षित कमरे भी हैं। बच्चों को इन्हीं कमरों में पढ़ाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
विभागीय अफसरों को भी इन विद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जर्जर हो चुके भवनों को ध्वस्त करने और उनके स्थान पर नए कमरे बनाने के लिए प्रशासन और शासन को पत्र लिखा जाएगा।
निरीक्षण की रिपोर्ट मिली है। जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हालत में पाए गए हैं, उन्हें ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए शासन और प्रशासन से जल्द ही अनुमति ले ली जाएगी।
- विनोद कुमार, कार्यवाहक बीएसए
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अब अधिकारी इन जर्जर भवनों को ध्वस्त करवाने की तैयारी में हैं। लेकिन तत्काल बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
दिसंबर 2015 में सिकंदराबाद स्थित एक निजी स्कूल की छत गिर गई थी। घटना में एक छात्रा की मौत हो गई थी जबकि करीब दो दर्जन से अधिक बच्चे घायल हुए थे।
हादसे के बाद डीएम ने बेसिक शिक्षा विभाग के तहत संचालित विद्यालयों के भवनों की जांच के आदेश दिए थे। विभाग की गंभीरता का हाल यह रहा कि करीब महीना भर बीतने के बाद भी जांच शुरू नहीं की गई। अब जब जांच शुरू हुई तो भयावह तस्वीर सामने आ रही है।
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नगर बेसिक शिक्षा अधिकारी भारतेंदु वशिष्ठ ने नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय सराय चौधरियान, प्रेम नगर, चौक बाजार, सिविल लाइन और कबाड़ी बाजार का निरीक्षण किया।
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इन सभी स्कूलों की बिल्डिंग बेहद जर्जर अवस्था में हैं। विशेषकर कबाड़ी बाजार प्राथमिक विद्यालय का भवन कभी भी गिर सकता है। इन विद्यालयों में करीब 400 बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों की सुरक्षा के लिए न तो स्कूल के शिक्षक और न ही प्रशासनिक अधिकारी फिक्रमंद हैं।
हर साल होनी चाहिए जांच
नियमत: हर साल शिक्षा विभाग की ओर से इन स्कूलों के भवनों की जांच और मरम्मत होनी चाहिए। कागजों में जांच और मरम्मत होती भी है लेकिन स्कूलों की दशा जस की तस रह जाती है। अफसर तब जागते हैं जब सिकंदराबाद जैसी कोई घटना घटित हो जाती है।
दावा: सुरक्षित कमरों में हो रही पढ़ाई
कार्यवाहक बीएसए के मुताबिक चिह्नित किए गए जर्जर विद्यालयों में कुछ सुरक्षित कमरे भी हैं। बच्चों को इन्हीं कमरों में पढ़ाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
विभागीय अफसरों को भी इन विद्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करने के आदेश जारी कर दिए हैं। जर्जर हो चुके भवनों को ध्वस्त करने और उनके स्थान पर नए कमरे बनाने के लिए प्रशासन और शासन को पत्र लिखा जाएगा।
निरीक्षण की रिपोर्ट मिली है। जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हालत में पाए गए हैं, उन्हें ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए शासन और प्रशासन से जल्द ही अनुमति ले ली जाएगी।
- विनोद कुमार, कार्यवाहक बीएसए