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37 बच्चे और पहुंचे अस्पताल
अमर उजाला, शिकारपुर
Updated Fri, 12 Feb 2016 10:30 PM IST
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पेट के कीड़े मारने वाली दवा एलबेंडाजोल खाने से 37 और बच्चों की हालत खराब हो गई। उन्हें सीएचसी में भर्ती कराया गया जहां इलाज के बाद 29 को छुट्टी दे दी गई लेकिन 8 बच्चों को तीन दिन के मेडिकल आब्जर्वेशन में रखा गया है।
इलाज के दौरान बच्चों के परिजनों ने हंगामा किया तो जिला मुख्यालय से स्वास्थ्य अफसरों की टीम भेजी गई। मालूम रहे कि कृमि मुक्ति दिवस के आयोजन के तहत स्कूली बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा एलबेंडाजोल खिलाई जा रही है।
इसके खाने के बाद बृहस्पतिवार को 19 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। उन्हें सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। देर रात 15 और बच्चों को सीएचसी में भर्ती कराया गया।
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शुक्रवार सुबह 22 बच्चों को उनके अभिभावक अस्पताल लाए, जिन्हें भर्ती कर लिया गया। उपचार के दौरान कुछ बच्चे पेट में ज्यादा दर्द होने से बुरी तरह रोने लगे, जिससे परिजनों का धैर्य जवाब दे गया।
परिजनों ने हंगामा करते हुए बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज कराने की बात कही। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन बच्चों का ठीक से उपचार नहीं कर रहा है।
सीएमओ ने सूचना मिलने के बाद एसीएमओ और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित कुमार को मौके पर भेजा। एसएमओ डॉ. ललित कुमार की देखरेख में बच्चों का उपचार शुरू किया गया।
करीब दो घंटे तक चले उपचार के बाद 29 बच्चों की हालत सामान्य हुई। जबकि आठ बच्चों को तीन दिन तक आब्जर्वेशन में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एलबेंडाजोल से ही बीमार हुए बच्चे
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि हर शरीर की दवा रियेक्शन को सहन करने की क्षमता अलग-अलग होती है। एलबेंडाजोल गोली खाने के बाद पेट में दवा क्रियाशील होती है।
इसके बाद कुछ बच्चे इसे सहन कर लेते हैं और कुछ को दर्द हो जाता है। जी मिचलाने या उल्टी आने की शिकायत हो सकती है। उल्टी आने पर कुछ बच्चे चक्कर आने या सिर दर्द जैसी शिकायत भी कर सकते हैं।
लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चों को मनोवैज्ञानिक सपोर्ट की जरूरत है। सभी बच्चे सामान्य हैं। आठ बच्चों को ऑब्जर्बेशन में रखा गया है। पूरी तरह सामान्य होने पर इन्हें डिस्चार्ज किया जाएगा।
कुछ बच्चों को सूट नहीं करती एलबेंडाजोल
डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि कुछ बच्चों को एलबेंडाजोल दवा सूट नहीं करती है। इसके कारण बच्चों को पेट दर्द, जी मचलाना, उल्टी आने की शिकायत रहती है।
डिप्टी सीएमओ ने बताया कि एलबेंडाजोल से बच्चों को खतरा नहीं होता है। दवा खाने के बाद कुछ तला हुआ खाने पर इस तरह की दिक्कत सामने आती है।
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इलाज के दौरान बच्चों के परिजनों ने हंगामा किया तो जिला मुख्यालय से स्वास्थ्य अफसरों की टीम भेजी गई। मालूम रहे कि कृमि मुक्ति दिवस के आयोजन के तहत स्कूली बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा एलबेंडाजोल खिलाई जा रही है।
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इसके खाने के बाद बृहस्पतिवार को 19 बच्चों की हालत बिगड़ गई थी। उन्हें सीएचसी में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। देर रात 15 और बच्चों को सीएचसी में भर्ती कराया गया।
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शुक्रवार सुबह 22 बच्चों को उनके अभिभावक अस्पताल लाए, जिन्हें भर्ती कर लिया गया। उपचार के दौरान कुछ बच्चे पेट में ज्यादा दर्द होने से बुरी तरह रोने लगे, जिससे परिजनों का धैर्य जवाब दे गया।
परिजनों ने हंगामा करते हुए बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज कराने की बात कही। परिजनों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन बच्चों का ठीक से उपचार नहीं कर रहा है।
सीएमओ ने सूचना मिलने के बाद एसीएमओ और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित कुमार को मौके पर भेजा। एसएमओ डॉ. ललित कुमार की देखरेख में बच्चों का उपचार शुरू किया गया।
करीब दो घंटे तक चले उपचार के बाद 29 बच्चों की हालत सामान्य हुई। जबकि आठ बच्चों को तीन दिन तक आब्जर्वेशन में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एलबेंडाजोल से ही बीमार हुए बच्चे
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि हर शरीर की दवा रियेक्शन को सहन करने की क्षमता अलग-अलग होती है। एलबेंडाजोल गोली खाने के बाद पेट में दवा क्रियाशील होती है।
इसके बाद कुछ बच्चे इसे सहन कर लेते हैं और कुछ को दर्द हो जाता है। जी मिचलाने या उल्टी आने की शिकायत हो सकती है। उल्टी आने पर कुछ बच्चे चक्कर आने या सिर दर्द जैसी शिकायत भी कर सकते हैं।
लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बच्चों को मनोवैज्ञानिक सपोर्ट की जरूरत है। सभी बच्चे सामान्य हैं। आठ बच्चों को ऑब्जर्बेशन में रखा गया है। पूरी तरह सामान्य होने पर इन्हें डिस्चार्ज किया जाएगा।
कुछ बच्चों को सूट नहीं करती एलबेंडाजोल
डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि कुछ बच्चों को एलबेंडाजोल दवा सूट नहीं करती है। इसके कारण बच्चों को पेट दर्द, जी मचलाना, उल्टी आने की शिकायत रहती है।
डिप्टी सीएमओ ने बताया कि एलबेंडाजोल से बच्चों को खतरा नहीं होता है। दवा खाने के बाद कुछ तला हुआ खाने पर इस तरह की दिक्कत सामने आती है।