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Bulandshahar News: घटना के 35 साल बाद डकैत को दस वर्ष का कारावास

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 19 Sep 2025 10:31 PM IST
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35 years after the incident, the dacoit was sentenced to ten years' imprisonment
बुलंदशहर। पहासू थाना क्षेत्र के गांव वेदरामपुर में वर्ष 1990 में डकैती डालने वाले बदमाश नवाबू उर्फ नब्बू को 35 वर्ष बाद एडीजे तृतीय वरुण मोहित निगम के न्यायालय ने दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे दस वर्ष का सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। दोषी के अन्य साथियों को वर्ष 2006 में ही इस मामले में 14-14 वर्ष की सजा हो चुकी है।
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गांव वेदरामपुर निवासी शोरन सिंह ने 31 जुलाई 1990 को पहासू थाने पर तहरीर देकर बताया था कि 30 जुलाई की रात करीब साढ़े 11 बजे 14-15 बदमाश सफेदा पेड़ की सीढ़ी बनाकर घर की छत पर चढ़ गए और उनके पुत्र नरेंद्र व पत्नी को बंधक बना लिया था। नरेंद्र ने शोर मचाया तो उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद फायरिंग शुरू कर दी। इस पर शोरन के बड़ा बेटा गजेंद्र भी अपनी लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग करने लगा।
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करीब एक घंटे तक दोनों ओर से फायरिंग हुई। डकैत घर से 25 हजार की नकदी समेत लाखों के आभूषण व अन्य कीमती सामान लूट ले गए। शोरन सिंह ने बताया कि उन्होंने जाते समय डकैत नवाबू उर्फ नब्बू, अमर सिंह, गजराज निवासी गांव वेदरामपुर, सोरन निवासी गांव पनिहावर जनपद अलीगढ़ व शंकर निवासी अतरौली को पहचान लिया था।
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पुलिस ने तहरीर के आधार पर नामजद पांच आरोपियों समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। नवाबू उर्फ नब्बू फरार था। बाकी सभी नामजद आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया था। सभी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई। न्यायालय ने वर्ष 2006 में सभी को दोषी मानते हुए 14-14 वर्ष का कारावास सुनाया था।

पुलिस ने वर्ष 2002 में नब्बू को गिरफ्तार किया। इसके बाद उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। उसकी फाइल अन्य सभी से पृथक चल रही थी। आरोपी ने खुद को बचाने के लिए हाईकोर्ट में भी कई अपील की। गवाहों के बयान उसके समक्ष न होने की बात कहते हुए न्यायालय को प्रार्थना पत्र दिया था। इसी कानूनी दांवपेच के चलते उसकी फाइल का निस्तारण नहीं हो पा रहा था। अब अदालत ने उसे दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
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