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Bulandshahar News: सांसों पर छाया संकट, अस्थमा का दौरा पड़ने से 28 लोग पहुंचे अस्पताल
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बुलंदशहर। सांसों पर एक बार फिर संकट गहरा गया है। शुक्रवार को पूरे दिन स्मॉग की चादर छाई रही। सुबह 11 बजे के बाद थोड़ी देर के लिए ही सूरज दिखाई दिया। हवा की गति भी धीमी रही। अस्थमा और सांस के मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। अस्थमा का दौरा पड़ने से 28 मरीजों को अस्पताल जाना पड़ा। एलर्जी और आंखों के जलन के मरीज भी बढ़ गए हैं।
शुक्रवार को दूसरे दिन भी शहर का एक्यूआई लाल श्रेणी में शामिल रहा। खुर्जा का एक्यूआई 336 और बुलंदशहर का 325 दर्ज किया गया। देश के सबसे प्रदूषित 234 शहरों में खुर्जा 24वें तो बुलंदशहर 26वें स्थान पर रहा। प्रदूषण की वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल की ओपीडी 1510 मरीज पहुंचे, जिसमें 224 को आंखों में जलन, 129 को एलर्जी की शिकायत मिली। सांस लेने में दिक्कत की वजह से 17 मरीजों को ऑक्सीजन लगानी पड़ी। इनके अलावा 11 गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। खुर्जा में आंखों में जलन और सांस में दिक्कत की वजह से 142 मरीजों ने उपचार कराया। जटिया चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को 70 से अधिक मरीज सांस संबंधित बीमारी के, 72 मरीज आंखों में जलन व संक्रमण के और करीब 200 मरीज बुखार व खांसी से पीड़ित थे।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण से एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस के मरीज बढ़े है। वायु प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की समस्या आ रही है। आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ा है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल का कहना है कि वायु प्रदूषण बढ़ने से लंबी बीमारी व उपचाराधीन मरीजों को भी समस्या हो रही है। बचाव के लिए उन्होंने सड़कों और पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराने की मांग की है।
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पुआल व कूड़ा न जलाने की अपील
जिला प्रशासन ने लोगों से पुआल और कूड़ा न जलाने की अपील की है। मौसम वैज्ञानिक डाॅ. विवेक राज का कहना है कि जिस तरह से वायुमंडल में धूल और धुएं के कण मिलकर वायु की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं, उसको सामान्य करने के लिए बारिश बेहद जरूरी है। अगर तेज हवा चलती है या बारिश होती है तो इससे छुटकारा मिल सकता है।
ऐसे करें आंखों की देखभाल
- आंखों को गंदे हाथ या कपड़े से ना छुएं।
- बाहर निकलते समय सनग्लास जरूर पहनें।
- समय-समय पर आंखों को साफ पानी से धोएं।
- कॉन्टेक्ट लेंस वाले लोग जीरो नंबर का चश्मा लगाएं।
- चिकित्सक से परामर्श के बाद ही आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें।
ये बरतें एहतियात
- बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग अवश्य करें।
- पीने के लिए नियमित रूप से गुनगुना पानी लें। खानपान सादा रखें और समय से भोजन लें।
- सुबह की सैर के लिए न निकलें। बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को सुबह-शाम बाहर न घूमने दें।
- खुले में व्यायाम न करें। खुले में जल्दी-जल्दी सांस लेने से प्रदूषण के तत्कव फेफड़ों में अधिक मात्रा में चले जाते हैं। इसलिए घर या जिम में व्यायाम करें।
वातावरण बदलाव के कारण एक्यूआई में इजाफा हो रहा है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे है। समस्त निकाय, ग्राम पंचायत और प्रदूषण विभाग समेत अन्य विभागों को प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वायु प्रदूषण करने वालों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। - विवेक कुमार मिश्र, एडीएम वित्त एवं राजस्व
जिले में ग्रैप की दूसरी स्टेज लागू कर दी गई है। निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है। - सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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शुक्रवार को दूसरे दिन भी शहर का एक्यूआई लाल श्रेणी में शामिल रहा। खुर्जा का एक्यूआई 336 और बुलंदशहर का 325 दर्ज किया गया। देश के सबसे प्रदूषित 234 शहरों में खुर्जा 24वें तो बुलंदशहर 26वें स्थान पर रहा। प्रदूषण की वजह से अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल की ओपीडी 1510 मरीज पहुंचे, जिसमें 224 को आंखों में जलन, 129 को एलर्जी की शिकायत मिली। सांस लेने में दिक्कत की वजह से 17 मरीजों को ऑक्सीजन लगानी पड़ी। इनके अलावा 11 गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। खुर्जा में आंखों में जलन और सांस में दिक्कत की वजह से 142 मरीजों ने उपचार कराया। जटिया चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को 70 से अधिक मरीज सांस संबंधित बीमारी के, 72 मरीज आंखों में जलन व संक्रमण के और करीब 200 मरीज बुखार व खांसी से पीड़ित थे।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण से एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस के मरीज बढ़े है। वायु प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और पानी आने की समस्या आ रही है। आंखों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ा है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल का कहना है कि वायु प्रदूषण बढ़ने से लंबी बीमारी व उपचाराधीन मरीजों को भी समस्या हो रही है। बचाव के लिए उन्होंने सड़कों और पेड़ों पर पानी का छिड़काव कराने की मांग की है।
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पुआल व कूड़ा न जलाने की अपील
जिला प्रशासन ने लोगों से पुआल और कूड़ा न जलाने की अपील की है। मौसम वैज्ञानिक डाॅ. विवेक राज का कहना है कि जिस तरह से वायुमंडल में धूल और धुएं के कण मिलकर वायु की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं, उसको सामान्य करने के लिए बारिश बेहद जरूरी है। अगर तेज हवा चलती है या बारिश होती है तो इससे छुटकारा मिल सकता है।
ऐसे करें आंखों की देखभाल
- आंखों को गंदे हाथ या कपड़े से ना छुएं।
- बाहर निकलते समय सनग्लास जरूर पहनें।
- समय-समय पर आंखों को साफ पानी से धोएं।
- कॉन्टेक्ट लेंस वाले लोग जीरो नंबर का चश्मा लगाएं।
- चिकित्सक से परामर्श के बाद ही आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें।
ये बरतें एहतियात
- बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग अवश्य करें।
- पीने के लिए नियमित रूप से गुनगुना पानी लें। खानपान सादा रखें और समय से भोजन लें।
- सुबह की सैर के लिए न निकलें। बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को सुबह-शाम बाहर न घूमने दें।
- खुले में व्यायाम न करें। खुले में जल्दी-जल्दी सांस लेने से प्रदूषण के तत्कव फेफड़ों में अधिक मात्रा में चले जाते हैं। इसलिए घर या जिम में व्यायाम करें।
वातावरण बदलाव के कारण एक्यूआई में इजाफा हो रहा है। वायु प्रदूषण रोकने के लिए प्रयास किए जा रहे है। समस्त निकाय, ग्राम पंचायत और प्रदूषण विभाग समेत अन्य विभागों को प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वायु प्रदूषण करने वालों पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। - विवेक कुमार मिश्र, एडीएम वित्त एवं राजस्व
जिले में ग्रैप की दूसरी स्टेज लागू कर दी गई है। निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। हवा की गति धीमी होने के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। प्रदूषण की प्रतिदिन मॉनीटरिंग की जा रही है। - सपना श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी