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Bulandshahar News: लखपति दीदी योजना से 26,832 महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 29 Oct 2025 10:32 PM IST
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26,832 women became self-reliant through Lakhpati Didi Yojana
बुलंदशहर। जिले में केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लखपति दीदी योजना ने महिलाओं को सशक्त बनाने में बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले दो वर्ष में अब तक 26,832 महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। इनकी वार्षिक पारिवारिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो गई है।
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उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उपायुक्त स्वत: सूबेदार सिंह के अनुसार लखपति दीदी योजना का संचालन वर्ष 2024 से शुरू हुआ था। इस योजना का मुख्य लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। जिले की 26,832 महिलाओं के परिवारों की कुल शुद्ध वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।
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इससे उनके जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आया है और परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं। उन्होंने बताया कि जिले में करीब 14 हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इनसे जुड़ी महिलाएं कुछ न कुछ काम कर आत्मनिर्भर बनने के साथ अच्छी कमाई कर रही हैं। इन महिलाओं को काम करने के लिए बैंक से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें विभिन्न कामों के लिए प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जा रहा है।
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यह है लखपति दीदी योजना

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उपायुक्त स्वत: सूबेदार सिंह ने बताया कि यह योजना महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह के लाभ प्रदान करती है। योजना के तहत महिलाओं को विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हो सकें। इसके बाद रोजगार स्थापित करने के लिए इन महिलाओं को 1 से 5 लाख तक का ऋण दिया जाता है, जिस पर कोई ब्याज नहीं लगता। महिलाओं द्वारा उत्पादित वस्तुओं के लिए बाजार तक पहुंच और मार्केटिंग में भी सहायता प्रदान की जाती है।

इस आधार पर माना जाता है लखपति दीदी
उपायुक्त स्वत: सूबेदार सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की ऐसी सदस्य को लखपति दीदी माना जाता है, जिनकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख या उससे अधिक हो। इस आय की गणना कम से कम चार कृषि मौसमों या चार व्यापार चक्रों के लिए की जाती है। जिनकी औसत मासिक आय 10 हजार या इससे अधिक बनी रहती है। उन्हें लखपति दीदी माना जाता है।
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